मिल्खा सिंह ने एक हॉकी खिलाड़ी के सपने को पूरा करने में मदद के लिए उठाया कदम

दिग्गज धावक मिल्खा सिंह ने हरप्रीत सिंह की वित्तीय मदद की, जिनको अपने परिवार की मदद करने के लिए मजदूर की तरह काम करना पड़ रहा था।

लेखक विवेक कुमार सिंह ·

हरप्रीत सिंह (Harpreet Singh) ने अपने जीवन में कभी सोचा भी नहीं होगा कि उनके खेल करियर को पटरी पर लाने के लिए भारत के सबसे महान एथलीटों में से एक मिल्खा सिंह (Milkha SIngh) उनकी मदद करेंगे।

हरप्रीत 18 वर्षीय हॉकी खिलाड़ी हैं, जो इस साल की शुरुआत में खेलो इंडिया यूथ गेम्स (Khelo India Youth Games) में शीर्ष स्कोरर में से एक थे।  जिनको भारतीय जूनियर टीम के संभावित खिलाड़ियों की सूची में भी शामिल किया गया था। उनको अपने परिवार की मदद करने के लिए डबल-शिफ्ट में एक मजदूर की तरह काम करना पड़ रहा था।

हरप्रीत की कहानी को समाचार एजेंसी “द ट्रिब्यून” ने रिपोर्ट किया था। जिसे मिल्खा सिंह ने पढ़ा और उन्होंने इस नौजवान की मदद करने का मन बना लिया।

मिल्खा सिंह, उनकी पत्नी, पूर्व भारतीय वालीबॉल खिलाड़ी निर्मल कौर (Nirmal Kaur), और उनके बेटे भारतीय गोल्फर जीव मिल्खा सिंह (Jeev Milkha Singh) ने हरप्रीत सिंह को 50,000 का चेक दिया।

उन्होंने हरप्रीत को ये भी आश्वासन दिया कि उन्हें 'मिल्खा के चैरिटेबल ट्रस्ट' द्वारा कई सुविधाएँ प्रदान की जाएंगी। ये वो ट्रस्ट है, जिसे उन्होंने हरप्रीत जैसे युवाओं की मदद के लिए स्थापित किया है ताकि उनकी क्षमता को पूरा करने के लिए आवश्यक समर्थन मिल सके।

मिल्खा सिंह ने हरप्रीत सिंह से कहा, “कोई भी सपना छोटा नहीं होता। अगर आप भारत के लिए खेलना चाहते हैं, तो आपको इसे प्राप्त करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए तैयार रहना चाहिए। मैंने ऐसी परिस्थितियों का सामना किया है। जब आप बाधाओं के खिलाफ लड़ते हैं, तो आप वो हासिल करते हैं, जो आप चाहते हैं।”

18 वर्षीय हरप्रीत के लिए, वित्तीय सहायता जीवन किसी नई रोशनी की तरह है और इससे उन्हें अपने सपने को पूरा करने की नई आश भी मिलती है। सबसे अच्छी खबर ये है कि  स्थानीय हॉकी संघ ने राष्ट्रीय चयनकर्ताओं से अपील की है कि वो हरप्रीत को ट्रायल दें।

हरप्रीत सिंह ने द ट्रिब्यून को बताया, "मैं बहुत ख़ुश हूँ। अपनी भावनाओं को समझाने के लिए मेरे पास कोई शब्द नहीं है। मुझे कभी भी मिल्खा सर और उनके परिवार से इस तरह मिलने की उम्मीद नहीं थी। मैंने उन्हें कभी निराश नहीं करूंगा।”

मिल्खा सिंह परिवार लंबे समय से ज़रूरतमंद लोगों की मदद कर रहे हैं। उन्होंने मिल्खा सिंह पर बनने वाली बायोपिक 'भाग मिल्खा भाग' के निर्माताओं से अनुरोध किया कि वे फिल्म से मिल्खा चैरिटेबल ट्रस्ट को आय दान करें।

मिल्खा सिंह की बेटी डॉक्टर मोना भी न्यूयॉर्क में COVID-19 के खिलाफ लड़ाई में सबसे आगे थीं।