ओलंपिक टीम का हिस्सा बनने के लिए दिलप्रीत सिंह कर रहे कड़ी मेहनत

पहले से काफी बेहतर बन चुके दिलप्रीत राष्ट्रीय शिविर में कर रहे प्रशिक्षण    

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

युवा स्ट्राइकर दिलप्रीत सिंह (Dilpreet Singh) पुरुष हॉकी के सीनियर वर्ग के संभावित कोर ग्रुप में शामिल हैं। सिंह टोक्यो ओलंपिक के लिए चु​नी जाने वाली भारतीय हॉकी टीम में जगह बनाने की पूरी उम्मीद कर रहे हैं। 

21 वर्षीय भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) केंद्र बैंगलोर में चल रहे राष्ट्रीय शिविर में खुद को और बेहतर बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। 

दिलप्रीत ने हॉकी इंडिया को बताया, "हम उन बातों की चिंता नहीं करना चाहते जो हमारे नियंत्रण में नहीं हैं। मैं तब तक इंतजार नहीं भी करना चाहता जब तक कि मैं खुद को भारत की तरफ से मैच खेलने के लिए मजबूत दावेदार नहीं बना लेता। इसलिए इस मौके का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठा लेना चाहता हूं। मैं अपने कौशल का प्रदर्शन करते हुए योग्यता साबित करने के लिए शिविर में पहुंचा हूं। हम प्रत्येक प्रशिक्षण सत्र में अपना 100 प्रतिशत दे रहे हैं।" 

2018 एशियाई खेलों के कांस्य पदक विजेता टीम के सदस्य दिलप्रीत खेल के तकनीकी पहलुओं में सुधार करना चाहते हैं और शिविर में वरिष्ठ खिलाड़ियों के साथ समय बिताने से उन्हें इसमें मदद मिली है। 

उन्होंने कहा, "मैं अपने तकनीकी खेल पर काम कर रहा हूं। मैंने अपने खेल के समापन में भी सुधार किया है। सीनियर खिलाड़ियों को खेलते हुए देखना और उनके साथ समय व्यतीत करने से मुझे बहुत आत्मविश्वास मिला है। हम अपने सीनियर खिलाड़ियों से सुझाव और मार्गदर्शन लेते हैं, जो कि हमारे लिए हमेशा मददगार साबित होती है।"

मैच के दौरान गोल का जश्न मनाते दिलप्रीत सिंह

अमृतसर का खिलाड़ी 2018 विश्व कप के लिए जूनियर कोर ग्रुप का हिस्सा था। जूनियर ग्रुप में उनके लगातार अच्छे प्रदर्शन ने उन्हें एक साल बाद वर्ल्ड चैंपियन बेल्जियम के खिलाफ FIH प्रो लीग में हुए मुकाबले में जगह बनाने में मदद की। 

दिलप्रीत ने कहा, "सीनियर टीम में जगह बनाने के लिए मैंने जूनियर कैंप में कड़ी मेहनत की। मैं सीनियर टीम द्वारा की गई प्रत्येक ड्रिल का अनुसरण करता था। मैं इसके लिए वरिष्ठ खिलाड़ियों के लगातार संपर्क में रहकर मागदर्शन लेता था। आखिरकार 2020 में मैं कोर ग्रुप से FIH हॉकी प्रो लीग में टीम में वापसी कर सका।" 

नौजवान हॉकी खिलाड़ी का यह भी मानना ​​है कि टोक्यो 2020 का स्थगित होना, उसके लिए वरदान साबित हुआ है। क्योंकि, इससे उसके जैसे खिलाड़ियों को खुद में सुधार करने का वक्त मिल गया। 

उन्होंने कहा, "ओलंपिक स्थगित होने से खिलाड़ियों को खुद को बेहतर बनाने और उस स्थिति से बाहर निकलने का मौका मिला। टीम का चयन मेरे हाथों में नहीं है। मेरा ध्यान मैदान पर अपना 100 प्रतिशत देने और दिन-प्रतिदिन सुधार करने पर केंद्रित है।" 

भारत की ओर से टोक्यो ओलंपिक में 16 सदस्यीय टीम भेजी जाएगी।