भारतीय हॉकी टीम को अप्रत्याशित चुनौतियों के लिए तैयार रहने की जरूरत- मनप्रीत सिंह 

खोया हुआ सम्मान वापस पाने के लिए ओलंपिक में पदक हासिल करने की तैयारी में भारतीय पुरुष हॉकी टीम  

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

जहां, एक तरफ भारतीय महिला हॉकी टीम करीब एक साल बाद पहले अंतरराष्ट्रीय दौरे पर अर्जेंटीना गई है। वहीं, पुरुषों की हॉकी टीम के रास्ते में आई कोरोना महामारी की बाधा के कारण अभी भी अनिश्चितताओं से जूझ रही है।

टीम का निर्धारित दक्षिण अफ्रीका दौरा कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन मिलने के बाद मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण रद्द कर दिया गया है।

दक्षिण अफ्रीका की 'समर सीरीज़' में पुरुषों की हॉकी टीम की करीब एक साल बाद अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में वापसी करती। 10-27 जनवरी को केपटाउन में होने वाले इस टूर्नामेंट में मेजबान दक्षिण अफ्रीका के अलावा बेल्जियम, फ्रांस, ग्रेट ब्रिटेन और भारत को शामिल होना था।

यह टोक्यो ओलंपिक के लिए उनकी तैयारी में एक और अवरोध है। जिसे कोरोना महामारी के कारण 2021 की गर्मियों तक स्थगित कर दिया गया था।

दौरे के रद्द होने की खबर से एक दिन पहले ही भारतीय कप्तान मनप्रीत सिंह (Manpreet Singh) ने कहा था कि उनकी टीम केवल उन चीजों पर ध्यान केंद्रित कर रही है जो उनके नियंत्रण में हो सकती हैं।

एक मैच के दौरान भारतीय कप्तान और FIH प्लेयर ऑफ द ईयर मनप्रीत सिंह 

मनप्रीत सिंह ने कहा, "पिछले साल से हमे सबसे बड़ी सीख ये मिली कि बाहरी कारक हमारे लक्ष्य को प्रभावित नहीं कर सकते।" 

उन्होंने आगे कहा, "कई अनिश्चितताएं हो सकती हैं, लेकिन हमें केवल इस बात की चिंता करनी चाहिए कि हमारे नियंत्रण में क्या है। वह हमारे सर्वश्रेष्ठ बनने की दिशा में काम करता है। इस साल ओलंपिक खेलों के लिए कई चुनौतियां सामने आ सकती है। हमें इसके लिए मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए।"

भारतीय टीम ने आखिरी प्रतिस्पर्धा फरवरी, 2020 में भुवनेश्वर में FIH प्रो लीग में की थी।

राष्ट्रीय टीम मास्को में 1980 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में स्वर्ण पदक हासिल करने के बाद से पदक जीतने में नाकाम रही है। ऐसे में भारतीय पुरुष टीम खोए हुए गौरव को हासिल करने के लिए टोक्यो ओलंपिक में पोडियम फिनिश के लिए प्रयास करेगी।

हाल के वर्षों में भारत टीम विश्व कप (2018) में छठे स्थान पर और चैंपियंस ट्रॉफी (2018) में दूसरे पायदान पर रही। जबकि 2018 एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता और गोल्ड कोस्ट, राष्ट्रमंडल खेलों में चौथे स्थान पर रही। 

हालांकि, भारतीय टीम पदक का सूखा होने के बावजूद ओलंपिक में सबसे सफल टीम रही है। राष्ट्रीय टीम ने 1928, 1932, 1936, 1948, 1952, 1952, 1956, 1964, 1980 के खेलों में आठ स्वर्ण पदक हासिल किए हैं।