भारतीय टेनिस खिलाडियों को चतुराई से उठाना होगा अगला कदम- विशाल उप्पल 

टेनिस खिलाड़ी अंकिता रैना ‘लकी लूजर’ के रूप में मेलबर्न मेजर के मुख्य ड्रॉ में पा सकती हैं जगह 

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

भारतीय टेनिस खिलाड़ी अंकिता रैना बुधवार को दुबई में आयोजित ऑस्ट्रेलियाई ओपन क्वालीफाइंग स्पर्धा के तीसरे राउंड में सर्बिया की ओल्गा डेनिलोविच से 2-6, 6-3, 1-6 से हार गई। आशा की एक उम्मीद अभी भी जिंदा है। वो मेलबर्न मेजर के मुख्य ड्रॉ में एक ‘लकी लूजर’ के ​​रूप में मौका पा सकती है, क्योंकि उन्हांने क्वालिफिकेशन के तीसरे राउंड में जगह बनाई थी।

भारत के बिली जीन किंग कप के कप्तान विशाल उप्पल कहते हैं, "यह उनके पास एक और मौका है जिसे वो पा सकती हैं। वह काफी समय से कड़ी मेहनत कर रही है और पिछले कुछ समय से वो एक स्लैम के मुख्य ड्रॉ में पहुंचने के करीब आ गई है। अगर किसी एक भाग्यशाली को इसमें खेलने का मौका मिलता है तो वो इसकी हकदार है।"

क्वालिफाइंग के तीसरे दौर में हारने वाले सर्वोच्च रैंक वाले खिलाड़ी को ‘लकी लूज़र’ के रूप में प्रविष्टि दी जाती है। ये एक से ज्यादा भी हो सकते हैं जो ग्रैंड स्लैम शुरू होने से पहले मुख्य ड्रॉ में शामिल होने वाले खिलाडियों की संख्या पर निर्भर करता है।

28 वर्षीय खिलाड़ी ने पहली बार क्वालीफाइंग के अंतिम दौर में जगह बनाई। अन्य किसी भारतीय खिलाड़ियों, पुरुषों या महिलाओं में से किसी ने भी क्वालिफायर के तीसरे दौर में जगह नहीं बनाई। करमन कौर थांडी पहले दौर में मरियम बोलकवाज के खिलाफ खेलते हुए 6-7 (4), 6-7 (4) से बाहर हो गईं। पुरुषों के क्षेत्र में 12वीं वरियता प्राप्त प्रजनेश गुणेश्वरन लगातार तीसरे वर्ष में क्वालीफायर में 2-6, 3-6 से हार गए, जबकि रामकुमार रामानाथन ने शुरूआती दौर में 10वीं वरियता प्राप्त फेनसैगो बैगनीस को हरा दिया, लेकिन दूसरे दौर में वू तुंग-लिन के खिलाफ 3-6, 2-6 से हार गये।

भारत के पूर्व डेविस कप खिलाड़ी उप्पल कहते हैं, "मुझे लगता है कि इस प्रदर्शन से पुरुष खिलाड़ी काफी निराश होंगे। इसलिए नहीं कि वे योग्य नहीं थे, बल्कि जिस तरह से वे हारे। वे सीधे स्कोर करने वाल थे, और जिनसे वो हारे उनकी रैंकिंग भी उनसे कम थी। यह एक बार फिर साबित करता है कि रैंकिंग खेल में ज्यादा मायने नहीं रखती है।"

गुणेश्वरन ने पहले मेजर के लिए क्वालिफाइ किया और सभी चार ग्रैंड स्लैम इवेंट खेले हैं। जबकि 26 वर्षीय रामकुमार 19 प्रयासों में भी नहीं कर पाये।

उप्पल कहते हैं, "उन्हें बस कोशिश करते रहना चाहिए जब तक की सफलता नहीं मिल जाती। उनके खेल को देखते हुए, मुझे लगता है कि एक मेजर खेलने के लिए उनके पास विंबलडन या यूएस ओपन में अच्छा मौका होगा।"

ऑल इंग्लैंड क्लब के प्रमुख कोच डेन ब्लोथम के साथ विशाल उप्पल

उप्पल यह भी उम्मीद कर रहे हैं कि भारत की सबसे होनहार प्रतिभाओं में से एक 22 वर्षीय थांडी स्वस्थ और फिट रहते हुए प्रतियोगिताओं में लम्बा सफर तय कर सकती हैं। पिछले दो सत्रों से थांडी को कंधे की चोट के कारण पीछे हटना पडा है। 6 फीट लम्बी थांडी संभवतः पहली भारतीय महिला खिलाड़ी हैं, जिनकी सर्विस रॉकेट की तरह निकलती है और उनके ग्राउंड स्ट्रोक भी शानदार हैं।

उप्पल कहते हैं, "उनके पास प्रतिद्वंदी को हराने हथियार मौजूद हैं। अब यह उन्हें तय करना है कि इसमें से कितना उन्हें इस्तेमाल करना है और कब। मुझे लगता है कि उनमें परिपक्वता आएगी। उनके अंदर बहुत दूर तक जाने की प्रवृत्ति है। शायद उन्हें यह सीखने की ज़रूरत है कि कैसे धैर्य रखते हुए सामने वाले को मात देनी है।"

भारतीय टेनिस खिलाड़ी रैना और रामकुमार, विशेष रूप से पिछले कुछ समय से ग्रैंड स्लैम के इवेंट में पहुंचने के लिए मशक्कत कर रहे हैं। 44 साल के उप्पल का मानना ​​है कि उन्हें अगला कदम उठाने के लिए खेल से जुड़ाव रखते हुए मेजर खेलना शुरू करना होगा।

उन्होंने कहा, "एक खिलाड़ी के रूप में आपको बढ़ते रहना चाहिए, क्योंकि आपके प्रतिद्वंदी आप पर नजर रखते हैं और आपका विश्लेषण करते हैं। आपकी कमजोरियों का पता लगा लेते हैं। उस स्तर पर सभी के पास अपने-अपने शॉट्स होत हैं, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों को इनका इस्तेमाल बड़ी चतुराई और चालाकी से करने की जरूरत है। उन्हें अपने प्रतिद्वंदियों को इतना चौंका देने में सक्षम बनना होगा, जितने की उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी।"

फिल्हाल के लिए रैना को इंतजार करते हुए यह देखना होगा कि ऑस्ट्रेलियाई ओपन ड्रॉ कैसे खेला जा रहा है। वो सीजन के पहले मेजर में भारत की तरफ से एक निश्चित तौर पर प्रविष्टि है। हालांकि, सुमित नागल को भी पुरुषों के ड्रॉ में वाइल्डकार्ड प्रविष्टि मिल गई है।