चोट के बाद नीरज चोपड़ा की नज़र डायमंड लीग और फेडरशन कप पर

भारतीय जेवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा चोट से वापसी करते हुए डायमंड लीग और फेडरशन कप में खेलना चाहते हैं।

लेखक जतिन ऋषि राज ·

नेशनल ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप के 59वें संस्करण से भारतीय स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा को चोट की वजह से अपना नाम वापस लेना पड़ा था। यह प्रतियोगिता अक्टूबर में खेली गई और देश के अलग-अलग राज्यों से खिलाड़ियों ने इसमें भाग लिया।

कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स 2018 में गोल्ड जीतने वाले नीरज अपनी रिकवरी पर ज़्यादा ध्यान दे रहे थे। हालांकि नेशनल ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भाग न लेने के कारण उनके कोच और फेडरेशन के निर्णय को माना जा रहा है। वे चाहते थे कि मैदान में उतरने से पहले नीरज पूरी तरह से फिट हों ताकि उनके प्रदर्शन पर असर न पड़ सके।

IAAF अंडर-20 वर्ल्ड कप में जेवलिन थ्रो करते हुए नीरज चोपड़ा

डिप्टी चीफ नेशनल कोच, राधाकृष्णन नायर ने स्पोर्ट्सस्टार को एक इंटरव्यू में बताया था कि “मेरा मानना है कि नीरज को नेशनल ओपन एथलेटिक्स चैंपियनचिप में भाग नहीं लेना चाहिए और इस बात से एएफआई के अध्यक्ष, प्लानिंग कमीटी चेयरमैन, हाई परफॉरमेंस डायरेक्टर और चीफ कोच भी सहमति रखते हैं। वैसे वह अब ठीक हैं, लेकिन अगर वह फील्ड पर उतरते हैं तो यह जोखिम उनका खुद का होता।” 

चोट से उभरकर अच्छे प्रदर्शन पर है नज़र

पॉचेफ्स्ट्रूम, साउथ अफ्रीका की नार्थ-वेस्ट यूनिवर्सिटी में नए कोच क्लाऊस बार्टोनिएट्ज़ से ट्रेनिंग ले रहे नीरज का मानना है कि वह प्रतियोगीताओं में प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो रहे हैं।

नीरज चोपड़ा ने ओलंपिक चैनल से बात करते हुए बताया कि “मैं अप्रैल में होने वाले फेडरशन कप और डायमंड लीग को नज़र में रख रहा हूं।”

“हालांकि मैं अपने कोच से बात करूंगा कि मैं साऊथ अफ्रीका में भी किसी प्रतियोगिता का हिस्सा बन पाऊं। अभी तक कुछ पक्का नहीं हुआ है, मैं बस इस पर विचार कर रहा हूं। वैसे तो डायमंड लीग और फेडरेशन कप के लिए मेरी ट्रेनिंग चल रही है ताकि मैं अच्छे से वापसी कर पाऊं।” 

कोच बदला, गेम बदलेगी

चोट के बाद रिपोर्ट्स के हवाले से माना जा रहा था कि नीरज के कंधे में तकलीफ की वजह से उन्हें थ्रो करने में दिक्कत थी और कमर में दुर्बलता की वजह से भी उन्हें दिक्कत पेश हुई। इन सब कारणों की वजह से उनकी कोहनी की दशा नहीं बन पा रही थी और जिसकी मालूमात उन्हें ज़रा देर से हुई।

फिलहाल इस भारतीय स्टार एथलीट की स्थिति ठीक है और वह अपनी प्राक्रतिक तकनीक पर लौटना चाहते हैं। इस वजह से उन्होंने जर्मनी के उवे हॉन की जगह साउथ अफ्रीका के बार्टोनिएट्ज़ का रुख़ किया। नीरज ने आगे बताया कि “मैं कभी-कभी उवे हॉन से सलाह ले रहा हूं लेकिन मेरे वर्तमान कोच मेरी तकनीकों को ज़्यादा जानते हैं।"

“साल 2018 में मैंने उवे के साथ काफी ट्रेनिंग की लेकिन मेरी चोट के दौरान मुझे लगा कि हमारी ट्रेनिंग की तकनीक में थोड़ी खराबी थी और इस वजह से मैंने खुद को ज़रूरत से ज़्यादा थका दिया। मैं उम्मीद करता हूं कि बार्टोनिएट्ज़ के साथ मैं अपनी पुरानी तकनीक पर काम कर सकूं।” 

साल 2019 रहा निराशाजनक

हर खिलाड़ी के जीवन में उतार-चढ़ाव तो आते ही हैं लेकिन चोट के कारण जब कोई एथलीट खेल से बाहर होता है तो उसके मानसिक संतुलन पर भी असर पड़ता है। साल 2019 में जेवलिन थ्रो के खेल में किसी भी खिलाड़ी ने ख़ासा प्रदर्शन नहीं किया है।

पिछले साल इस खेल ने कुछ बेहतरीन प्रदर्शन देखे। लगभग 90 मीटर की थ्रो तो आम तौर पर दिखी। हालांकि इसके बाद सभी के प्रदर्शन में गिरावट दिखी और डायमंड लीग के गोल्ड मेडल विजेता ने 85 मीटर की थ्रो कर खिताब अपने नाम किया और वर्ल्ड चैंपियनशिप के विजेता ने 86 मीटर की थ्रो कर अपने नाम का डंका बजाया।

नीरज चोपड़ा ने आगे बताया “यह साल पिछले साल जितना बेहतरीन नहीं रहा और जबकि हम ओलंपिक गेम्स के बहुत नज़दीक खड़े हैं। ऐसे में मैं उम्मीद लगा रहा हूं कि हर कोई कड़ी मेहनत और ज़ोर-आज़माइश करता हुआ दिखेगा।”

कुछ ही दिनों में साल 2020 का आगाज़ हो रहा है जो खेल की दुनिया का सबसे बड़ा मेला अपने साथ लाएगा। जी हां, 2020 ओलंपिक गेम्स की तैयारी ज़ोरों से शुरू हो चुकी है और हर खिलाड़ी इस मैदान को फतह करने की कोशिश में लगा है। ऐसे में भारत के स्टार जेवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा की कोशिश यही होगी कि जल्द से जल्द वह फील्ड पर अपनी वापसी करते हुए टोक्यो 2020 के लिए क्वालिफाई करें।