निरंतर प्रयास करना ही है नीरज चोपड़ा की सफलता का राज़

भारतीय जेवलिन थ्रो का सितारा नीरज चोपड़ा कर रहा है 2020 ओलंपिक गेम्स की तैयारी।  

लेखक जतिन ऋषि राज ·

जेवलिन थ्रो की बात की जाए तो जर्मनी का नाम सबसे पहले आता है। विश्व के सर्वश्रेष्ठ 25 जेवलिन थ्रोअर की फेहरिस्त में 5 जर्मनी के खिलाड़ी हैं। हाल ही में जर्मनी का उभरता सितारा बन एंड्रियास होफमैन, जिसने यूरोपियन चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज़ मेडल जीत अपनी कला का प्रमाण दिया था। उन्होंने यह मुकाम 87.60 मीटर की थ्रो फेंक कर हासिल किया।

हालांकि यूरोप की ज़मीन से एक सितारा और निकला है और वह है जोहान्स वेटर। वेटर ने शानदार 94.44 मीटर की थ्रो फेंक सबके दिलों में अपना घर कर लिया और बन गए यूरोप के अव्वल जेवलिन थ्रोअर। इस खेल की खूबी ही यह है कि हर एक खिलाड़ी अपने प्रदर्शन से कभी भी खेल जगत को अपने होने का प्रमाण दे देता है। ऐसा ही कुछ किया चेक रिपब्लिक के जैन ज़ेलेंज़ी ने। ज़ेलेंज़ी जेवलिन थ्रो के इतिहास की सबसे अच्छी थ्रो (98.48 मीटर) फेंक कर बन गए इस खेल के महारथी।

अगर बात भारत की करें तो आईएएएफ वर्ल्ड अंडर 20 के दौरान नीरज चोपड़ा ने 88.06 की शानदार थ्रो फेंक कर पूरे देश में अपने नाम का डंका बजाया।ओलंपिक चैनल से बात करते हुए नीरज चोपड़ा ने बताया कि “इस खेल में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन यूरोप के देश करते थे। पहले फिनलैंड, चेक रिपब्लिक और अब जर्मनी का नाम सबसे पहले लिया जाता है। यह सब इसलिए हुआ क्योंकि जेवलिन थ्रो नामक खेल के लिए उनकी सोच और समझ अलग है, चाहे वह खेल की कोचिंग हो या संरचना। शुरूआती दौर से ही जेवलिन थ्रो की प्रगति को लेकर वह चले हैं और अब उन्हें इस मेहनत का फल मिल रहा है।”

“भारत में जेवलिन थ्रो खेल आगे बढ़ रहा है। अगर आप देखें शिवपाल सिंह, जिन्होंने मिलिट्री गेम्स में गोल्ड मेडल जीता या फिर विपिन कसाना जैसे उम्दा खिलाड़ी को देखें तो इस खेल का महत्व समझ आएगा। इन खिलाड़ियों ने लगभग हर बार 80 मीटर थ्रो फेंकी है और यह एक बहुत अच्छे संकेत है।”

शारीरिक ताकत, बेहतर काया और स्फूर्ति जैसी चीज़ों पर जर्मनी ज़्यादा ध्यान देती है। नीरज ने आगे बताया “जर्मनी के लोग ज़्यादा ताकतवर और तेज़ पैदा होते हैं। लेकिन हर खिलाड़ी की एक अपनी खासियत है – कोई चुस्त है तो कोई ताकतवर तो किसी की तकनीक बहुत अच्छी है। वह लगभग 93 से 94 मीटर की थ्रो फेंकते हैं जो कि हमसे 4-5 मीटर ज़्यादा है। मैं कोशिश करता हूं कि लगातार लय में प्रदर्शन करूँ और इस कारण मुझे फायदा भी होता है।"

रिकवरी की राह पर नीरज

कोहनी में लगी चोट के लिए अब नीरज की रिकवरी का आखिरी पड़ाव चल रहा है। नीरज को डायमंड लीग और वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप जैसी बड़ी प्रतियोगिताओं को छोड़ना पड़ा लेकिन अब वह साउथ अफ्रीका की नार्थ-वेस्ट यूनिवर्सिटी में अपने आने वाले सीज़न की तैयारी में लगे हैं।

लगभग 8 महीनों की ट्रेनिंग के बाद इंडियन आर्मी का यह नायब सूबेदार अब मैदान में आने के लिए उत्सुक है और उन्होंने ओलंपिक चैनल को अपने रोज़ के प्रशिक्षण से अवगत भी कराया।

“आज कल मैं दिन में दो दफा ट्रेनिंग सेशन लेता हूं, अगर शाम को ट्रेनिंग ज़्यादा हो जाए तो मैं सुबह 6:30 बजे उठ कर हल्का वर्क आउट करता हूं ताकि मेरी रिकवरी जल्दी हो सके और दिन के दूसरे सेशन के लिए भी तैयार हो सकूं।”

नीरज ने आगे और बताया कि “सब कुछ कोच क्लाऊस बार्टोनिएट्ज़ ही तय करते हैं – कि कब मुझे कौन सी ट्रेनिंग लेनी है या फिर स्प्रिंट, जंप और कब वज़न उठाना है या फिर कब थ्रो का अभ्यास करना है। हर चीज़ सुबह और शाम में बांटी हुई है। वह चीज़ों को मिलाते रहते हैं ताकि मुझे मेहनत करनी पड़े। मैं वह सब कर रहा हूं जो कि एक खिलाड़ी करता है।"

दबाव न लेने का मंत्रा अपनाते है नीरज

मैदान से 1 साल तक दूर रहने के बाद भी नीरज चोपड़ा का नाम उन खिलाड़ियों में लिया जाता है जो कि 2020 ओलंपिक गेम्स में भारत को मेडल जितवा सकते हैं। हालांकि उन पर अभी भी किसी चीज़ का दबाव नहीं है और वह खुद को तैयार करने में जुटे हैं।

“मैंने दबाव कभी नहीं लिया। यह सब आशाएं, उम्मीदें मुझे और ज़्यादा साहस देती हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स से पहले भी जनता को मुझसे काफी उम्मीदें थी। मुझे इन सब चीजों से दबाव महसूस नहीं होता और अच्छा लगता है की देश को मुझसे कुछ कर दिखाने की उम्मीदें हैं।”

नीरज ने आगे कहा “मैं बचपन से ही ऐसा था। मैं हमेशा से ही दबाव नहीं लेता था और मज़े करता था, संगीत सुनता था और वह सब करता था जिससे मैं बेहतर महसूस कर सकूं। हम बहुत बड़े स्तर के लिए ट्रेनिंग करते हैं और अगर प्रयास दिल लगाकर कर रहे हैं तो प्रदर्शन की चिंता नहीं होती। दबाव तब आता है जब आप अपने देश में प्रदर्शन करते हैं। हालांकि मैं इन सब चीज़ों से निकल चुका हूं और मैंने इन चीज़ों को सही से संभाला है।” 

साल 2020 ओलंपिक गेम्स का साल है और पूरा भारत देश नीरज चपड़ा की वापसी पर नज़रें टिकाए बैठा है। नीरज जानते हैं कि टोक्यो 2020 में अपना नाम शुमार करना ही फिलहाल सबसे बड़ा लक्ष्य है और वह इसी लक्ष्य की प्राप्ति में लगे हैं।