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मुंबई मैराथन 2020: नितेंद्र सिंह रावत नहीं होंगे इस दौड़ का हिस्सा

भारतीय पुरुषों की श्रेणी में 2019 के विजेता ने घुटने की चोट के कारण दौड़ में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया है।

लेखक रितेश जायसवाल ·

भारतीय पुरुष वर्ग में डिफेंडिंग चैंपियन और भारत के प्रमुख लंबी दूरी के धावकों में से एक नितेंद्र सिंह रावत ने मुंबई मैराथन के 2020 संस्करण से अपना नाम वापस ले लिया है।

ओलंपिक चैनल के साथ एक विशेष बातचीत में इस आर्मीमैन ने खुलासा किया है कि उनके घुटने में लगी चोट ने उन्हें एशिया की सबसे बड़ी सड़क दौड़ में से एक से अपनी भागीदारी वापस लेने के लिए मजबूर कर दिया है। रावत ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि मैं मुंबई में दौड़ने के लिए तैयार हूं। मैंने एक सप्ताह पहले अपने घुटने को घायल कर लिया था और यह अभी ठीक नहीं लग रहा है। मैंने आयोजकों को इसके बारे में सूचित किया है।”

इस 29 वर्षीय मैराथन धावने ने आगे कहा, “यह मेरे लिए एक मुश्किल सीज़न रहा है। मैंने काफी समय से प्रतिस्पर्धा में हिस्सा नहीं लिया है। मैं तीन दौड़ में हिस्सा लेने वाला था, लेकिन हर बार दौड़ से ठीक पहले मुझे कोई न कोई चोट लग जाती। सबसे पहले वर्ल्ड (2019 IAAF वर्ल्ड चैंपियनशिप), फिर लखनऊ में इंटर-स्टेट मीटिंग और अब मुंबई मैराथन में भी हिस्सा नहीं ले पाउंगा।”

एक मुश्किल सीज़न

मुंबई मैराथन के 2016 संस्करण में शानदार खिताबी जीत के बाद रावत सुर्खियों में आए, उन्हें चोटों के कारण कुछ महीनों के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इसके बाद वह 2019 के मुंबई मैराथन में एक अच्छी दौड़ के साथ ही दोहा वर्ल्ड के लिए क्वालिफाई करने में सफल रहे। लेकिन चोट लगने के कारण रावत क़तर की राजधानी में होने वाली इस वर्ल्ड की दौड़ में शामिल नहीं हो सके।

हालांकि, इस भारतीय एथलीट के दुर्भाग्य की शुरुआत पिछले साल अगस्त में इंटर-स्टेट चैंपियनशिप से हुई। जहां उन्हें एक और चोट लगने की वजह से इस दौड़ से अपना नाम वापस लेना पड़ा। अपने इस सीज़न के अच्छा न जाने की वजह को बताते हुए उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि विश्व चैंपियनशिप गंवाने के लिए मैं खुद ही जिम्मेदार हूं।”

उन्होंने आगे कहा, “मैंने अपने आपको कुछ अधिक ही तैयारी में झोंक दिया। आप कह सकते हैं कि जरूरत से ज्यादा ही लोड ले लिया। मैं वर्ल्ड के लिए काफी उत्साहित था और मैं वहां ओलंपिक समय में इस दौड़ को खत्म करना चाहता था। लेकिन ये जो परिस्थितियां उत्पन्न हुईं, इसकी उम्मीद नहीं थी। हम अपनी लय में थे और योजना के अनुसार चीजें आगे बढ़ रही थीं।”

हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब रावत के करियर ने ऐसा मोड़ लिया है। 2016 रियो ओलंपिक में भी शानदार फॉर्म में रहने की वजह से इस भारतीय धावक से काफी उम्मीद की जा रही थी। लेकिन दौड़ के दौरान एक दुर्भाग्यपूर्ण हैमस्ट्रिंग की चोट की वजह से वह ब्राजील की राजधानी में हुई इस दौड़ में 84 वें स्थान पर रहे।

रावत की मानसिक दृढ़ता

रियो खेलों के बाद, रावत को शीर्ष पर वापस लौटने में कुछ समय लगा। लेकिन वह स्वीकार करते हैं कि उनका समय सुर्खियों से दूर रहा और प्रतिस्पर्धा के दबाव ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बना दिया। उन्होंने कहा, “चोट खेल का एक हिस्सा है। लेकिन यह आपकी इच्छाशक्ति और प्रेरणा है जो एक बड़ी हिट (एक बार चोट लगने के बाद) लेता है। आप देखते हैं कि आपके साथी अच्छा करते हैं और यह सभी बातें आपके दिमाग के साथ खेलती हैं। यह एक मानसिक पहलू है। हमें मानसिक रूप से मजबूत होना है और मानना ​​है कि वापसी इतनी दूर नहीं है।”

यह मानसिक दृढ़ता ही है कि आने वाले महीनों में रावत को वापसी करनी पड़ेगी। उन्होंने आने वाले हफ्तों में अपनी योजना के बारे में बात करते हुए कहा, “योजना स्पष्ट है। पहले तो मुझे यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि मैं अपने घुटने को पर्याप्त आराम दूं और जितनी जल्दी हो सके वापस आ जाऊं।”

उन्होंने आगे कहा, “दूसरा, मैं सियोल मैराथन (मार्च में) को लक्ष्य कर रहा हूं। यह एक दौड़ है, जिसका मैंने आनंद लिया है। मैंने वहां अच्छा समय बिताया है। इस बार मैं वहां ओलंपिक समय पर निशाना साधने की कोशिश करुंगा।”

टोक्यो 2020 के लिए क्वालिफाई करना रावत के लिए मुश्किल काम साबित हो सकता है, जिसमें क्वालिफाइंग समय 2 घंटे, 11 मिनट और 30 सेकंड निर्धारित किया गया है, जबकि उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ 2:15:59 है। लेकिन, रावत ने इस समय को कम करने का भरोसा दिया है।

उन्होंने निष्कर्ष निकालते हुए कहा, "मुझे नहीं लगता कि यह इतना मुश्किल है। मेरा मानना ​​है कि अगर हम अपने पेस में सर्वश्रेष्ठ हैं तो हम समय में कटौती करते हुए ओलंपिक अवधि को छू सकते हैं। यह हमारी पहुंच से बहुत बाहर नहीं है। मैराथन एक लंबी दौड़ है। हम आसानी से 4-5 मिनट की कटौती कर सकते हैं, यदि हम उसको ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण लें।”