भारत का इन बड़े खेलों में ओलंपिक डेब्यू करना अब भी बाकी

भारत की सीए भवानी देवी तलवारबाज़ी में ओलंपिक टिकट हासिल करने वाली देश की पहली तलवारबाज़ बनकर इतिहास रच सकती हैं।

लेखक रितेश जायसवाल ·

भारत ने अपने 120 साल के लम्बे ओलंपिक खेलों के इतिहास में अब तक कुल 28 पदक हासिल किए हैं, लेकिन इतने लम्बे अंतराल के बावजूद देश सभी खेलों में हिस्सा नहीं ले पाया है। जहां हॉकी में भारत ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए शूटिंग, कुश्ती, बैडमिंटन जैसे खेलों में अपनी पदक तालिका में सुधार किया। वहीं कई ऐसे ओलंपिक खेल रहे, जिसमें भारत के एथलीटों का अभी भी क्वालिफाई करना बाकी है।

यहां हम आपके लिए उन ओलंपिक खेलों की सूची लेकर आए हैं, जिनमें भारत के एथलीट अभी तक क्वालिफाई करने में असफल रहे हैं।

वॉलीबॉल

भारत बीते काफी समय से वॉलीबॉल (Volleyball) खेल रहा है। वॉलीबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया का गठन 1951 में किया गया था। वॉलीबॉल का यह खेल 13 साल पहले टोक्यो 1964 के खेलों में एक ओलंपिक खेल बन गया था।

देखा जाए तो भारत शुरू से ही एशियाई वॉलीबॉल चैंपियनशिप में एक कड़ा प्रतिद्वंदी साबित हुआ है। हालांकि इस खेल में भारतीय टीम ने सबसे पहली उपलब्धि 1958 के एशियाई खेलों हासिल की, जहां उन्होंने सियोल में कांस्य पदक जीता।

पुरुषों और महिलाओं की दोनों वॉलीबॉल टीमों ने 2019 के दक्षिण एशियाई खेलों में अपनी-अपनी श्रेणियों में स्वर्ण पदक जीता। इसी के चलते भारत ने टोक्यो ओलंपिक में क्वालिफाई करने के लिए एक अच्छी संभावना देखी। हालांकि, कतर और दक्षिण कोरिया से लगातार हार मिलने के बाद भारत टोक्यो ओलंपिक एशियन क्वालिफिकेशन से बाहर हो गया।

फेंसिंग (तलवारबाज़ी)

भारत में लंबे समय से तलवारबाज़ी (Fencing) एक नियमित खेल के तौर पर रहा है, हालांकि भारत सरकार ने इसे साल 1997 में मान्यता दी। फेंसिंग एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (FAI) को भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) द्वारा एक राष्ट्रीय खेल संघ के सदस्य के रूप में मान्यता प्राप्त है, जो सभी आयु वर्गों में प्रतियोगिताओं का आयोजन करता है।

साल 1896 से तलवारबाज़ी आधुनिक ओलंपिक खेलों का हिस्सा रहा है। लेकिन इतने सालों तक भारत के किसी भी एथलीट ने इस खेल में हिस्सा नहीं लिया है। अब भवानी देवी के रूप में देश के पास इस ओलंपिक खेल का हिस्सा बनने का शानदार मौका है।

26 वर्षीय इस तलवारबाज़ ने आइसलैंड में आयोजित 2017 टूरनोई सैटेलाइट फेंसिंग चैंपियनशिप में पहली बार स्वर्ण पदक जीता। जिसने भवानी को अंतरराष्ट्रीय तलवारबाज़ी स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाला पहला भारतीय तलवारबाज़ बना दिया।

तमिलनाडु की भवानी देवी एथेंस और बेल्जियम में हुए वर्ल्ड कप तलवारबाज़ी इवेंट में दो बार राउंड ऑफ-32 में अपनी जगह बनाने में नाकाम रहीं। जिसके चलते वह ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाली पहली भारतीय तलवारबाज़ नहीं बन पाईं। हालांकि अब कोरोना वायरस (COVID-19) के प्रकोप के चलते सभी इवेंट स्थगित कर दिए गए हैं।

रग्बी

भारत में सबसे पहला आधिकारिक रग्बी (Rugby) मैच 1872 में खेला गया। वास्तव में यह खेल देश के लिए विदेशी नहीं था। हालांकि, रग्बी सेवन्स (7 खिलाड़ियों वाला रग्बी) जो 2016 के ओलंपिक के बाद 15-ए-साइड रग्बी (15 खिलाड़ियों वाला रग्बी) की जगह ले लेता है, यह देश के लिए जरूर अपेक्षाकृत एक नया खेल रहा।

भारत ने 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में सेवंस टूर्नामेंट में मेज़बान राष्ट्र के रूप में स्वंतः ही क्वालिफिकेशन हासिल कर लिया। हालांकि टीम का प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा और दक्षिण अफ्रीका, वेल्स और टोंगा के साथ ग्रुप बी में खेलते हुए भारत चौथे स्थान पर रहा।

उसके बाद से भारत ने कई छोटे-छोटे कदम उठाए। हाल ही में भारत ने 2019 एशिया रग्बी सेवन्स ट्रॉफी में हिस्सा लिया, जो कि एशियाई रग्बी सेवेंस श्रृंखला के लिए एक क्वालिफिकेशन इवेंट था। इस टूर्नामेंट ने टोक्यो ओलंपिक के क्वालिफिकेशन के मार्ग को प्रशस्त किया।

पूल-सी में सिंगापुर के बाद भारत दूसरे स्थान पर रहा और प्लेट फाइनल में इंडोनेशिया को 24-14 से हराकर इस कॉन्टिनेंटल टूर्नामेंट के सफर को समाप्त किया। हालांकि टीम एशियन रग्बी सेवन्स सीरीज के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाई।

हैंडबॉल

भारत लगभग 50 वर्षों से हैंडबॉल खेल रहा है, क्योंकि जगत सिंह लोहान ने म्यूनिख में 1972 के ओलंपिक के दौरान हैंडबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया की स्थापना की थी। इन वर्षों में नेशनल फेडरेशन अपने प्रयासों के चलते एशियाई हैंडबॉल महासंघ (AHF), अंतरराष्ट्रीय हैंडबॉल महासंघ (IHF), राष्ट्रमंडल हैंडबॉल संघ और दक्षिण एशियाई हैंडबॉल महासंघ का सदस्य बनने में सफल रहा है।

राष्ट्रीय हैंडबॉल टीम की हालिया उपलब्धि की बात की जाए तो 2019 के दक्षिण एथियाई खेलों में पुरुषों की टीम ने रजत पदक और महिलाओं की टीम ने स्वर्ण पदक जीता। हालांकि, दोनों टीमें ओलंपिक में अपनी जगह बना पाने में नाकामयाब रहीं।

भारतीय पुरुषों की हैंडबॉल टीम टोक्यो ओलंपिक के एशियन क्वालिफिकेशन इवेंट के प्रारंभिक दौर में कतर और सऊदी अरब के बाद तीसरे स्थान पर रही और महिलाओं की टीम क्वालिफायर तक भी नहीं पहुंच सकी।

ताइक्वांडो

ताइक्वांडो (Taekwondo) को साल 2000 में सिडनी खेलों में एक ओलंपिक खेल के रूप में पेश किया गया था। भारत में यह खेल 1960 के दशक से प्रचलित है। ताइक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया की स्थापना 1976 में हुई थी और 1985 तक यह वर्ल्ड ताइक्वांडो फेडरेशन, एशियन ताइक्वांडो संघ और भारतीय ओलंपिक संघ से जुड़ गया।

पिछले कुछ वर्षों में देश ने इस खेल में लगातार शानदार प्रदर्शन किया है और महाद्वीपीय स्तर पर भी खुद को साबित किया है। ताइक्वांडो में भारत ने हाल ही में साल 2019 में काठमांडू में हुए दक्षिण एशियाई खेलों में सभी श्रेणियों में नौ पदक जीते।

हालांकि, भारत अभी भी ताइक्वांडो में ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने के मौका इंतजार कर रहा है। कोरोना वायरस के चलते एशियाई ओलंपिक क्वालिफाइंग टूर्नामेंट को चीन के वूशी से जॉर्डन के अम्मान में स्थानांतरित कर दिया गया है। हालांकि इस टूर्नामेंट की नई तारीखों की घोषणा किया जाना अभी भी बाकी है।