युवा महिलाओं को बढ़ाने के लिए मिस्सी फ़्रैंकलिन ने भारतीय एनजीओ ‘युवा’ के साथ मिलाया हाथ

ओलंपिक दिग्गज तैराक मिस्सी फ़्रैंकलिन संन्यास लेने के बाद खेल को भारत में बढ़ाने में जुटीं।

5 बार की ओलंपिक गोल्ड मेडल विजेता मिस्सी फ्रैंकलिन (Missy Franklin) अब भारतीय एनजीओ युवा (NGO Yuwa) के बोर्ड से जुड़ गई हैं। पिछले साल लॉरियस वर्ल्ड स्पोर्ट्स अकादमी (Laureus World Sports Academy) ने मिस्सी फ्रैंकलिन को ‘लॉरियस सपोर्ट फोर गुड’ (‘Laureus Sport for Good’) के खिताब से भी नवाज़ा था। यह उनके कार्य ही तो हैं जो संन्यास लेने के बाद भी उन्हें खेल जगत से उपलब्धियां दिलाते जा रहे हैं।

उनको युवा से प्रेरणा मिली और उन्होंने भी संस्था में रहकर खेल के विकास में हाथ बटाने की साझी। संस्था ने फुटबॉल की मदद से झारखंड में हिंसा और बाल विवाह के खिलाफ जंग लड़ी थी और मिस्सी फ्रैंकलिन इससे बेहद प्रभावित हो गईं।

बातचीत के दौरान उन्होंने कहा “मुझे बहुत खुशो हो रही है यह बताते हुए कि लॉरियस अकादमी की सदस्य होने साथ मैं युवा के साथ भी जुड़ चुकी हूं और फ्रान्ज़ और रोज़ (Franz and Rose) गैस्टलर - सह-संस्थापक (Gastler - co-founders) के साथ युवा लड़कियों की मदद कर रही हूं।”

आगे की योजना

ग़ौरतलब है कि मिस्सी फ्रैंकलिन ने लंदन ओलंपिक गैस में 4 गोल्ड और एक ब्रॉन्ज़ मेडल जीत कर स्वीमिंग में अपना लोहा मनवाया था, और इतना ही नहीं रियो गेम्स में भी उन्होंने एक और गोल्ड मेडल पर अपने नाम की मुहर लगा दी थी। इसके बाद महज़ 23 साल की उम्र में ही उन्हें क्रोनिक शोल्डर पेन की वजह से खेल से संन्यास लेना पड़ा जो खेल जगत के लिए भी गहरा आघात था।

जिस खेल को उन्होंने तहे दिल से चाहा उसी खेल को उन्हें कम उम्र में ही अलविदा कहना पड़ गया लेकिन अपनी कुछ अच्छी आदतों के चलते वे फिर एक बार सुर्ख़ियों में आईं।

हालांकि यूएसए की दिग्गज तैराक अभी अपने ही देश में सेल्फ-आइसोलेशन पर हैं और अब दोबारा वह अपने कार्यों से फिर खेल हित में हाथ बटाना चाह रही हैं।

चैंपियन ने आगे कहा “हमारा मकसद वहां पर लड़कियों के लिए एक स्कूल बनाना है। मैं उम्मीद कर रही हूं कि मैं जल्द ही वहां जाकर लड़कियों से मिल पाउंगी और कुछ फुटबॉल के कौशल भी सीख सकूंगी।”

आपको बता दें कि मिस्सी फ्रैंकलिन भारत में आकर मदद करने वाली पहली तैराक नहीं हैं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया की तैराक स्टेफनी राइस (Stephanie Rice) ने भी स्टेफनी राइस स्वीमिंग अकादमी को भारत में चलाकर अपना योगदान दिया था।

इस दिग्गज खिलाड़ी की आशा है कि वे भारत में स्वीमिंग को महत्व देकर ऐसी बुनियादी संरचना बनाएं जिससे ओलंपिक गेम्स 2028 में भारत भी इस खेल में उतरने के लिए सक्षम हो सके।

पिछले साल स्पोर्ट्स्टार से बातचीत के दौरान मिस्सी फ्रैंकलिन ने कहा था कि, ‘’अभी भी भारत में बेहतरीन तैराक हैं। दुर्भाग्यवश उन मे से ज़्यादातर भारत में ट्रेनिंग नहीं लेते। वे यूएसए और थाईलैंड में जाकर अपने कौशल को पूर्ण रूप से सक्षम बनाते हैं। मैं उन सभी खिलाड़ियों को स्टेफनी राइस स्वीमिंग अकादमी में वापस लाना चाहती हूं। मैं चाहती हूं कि वे भारत में ही उच्च स्तर के कोचों के साथ ट्रेनिंग करें।’’

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