पीवी सिंधु ने युवा बैडमिंटन खिलाड़ियों के लिए माता-पिता का समर्थन बताया बेहद जरूरी  

कोरोना महामारी के दौरान मौजूदा विश्व चैंपियन ने नहीं खोया धैर्य और सकारात्मकता का विचार     

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

’हार भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी की जीत’ यह कथन बिल्कुल सही है, खासकर खेल भावना में। स्टार भारतीय शटलर पीवी सिंधु (PV Sindhu) न केवल इसे समझती हैं बल्कि जीवन में भी आत्मसात करती हैं, क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में सफलताओं की तुलना में असफलताओं से ज्यादा सबक लिया है। 

सिंधु ने कहा, इसके साथ महत्वाकांक्षी युवा एथलीटों के लिए अपने सपनों को पूरा करने के लिए माता-पिता का समर्थन भी महत्वपूर्ण होता है। 

माता-पिता को भी अपने खेल को लेकर भावुक बच्चों का भावनात्मक समर्थन करना चाहिए। यह उनकी क्षमता बढ़ाने और उनके सपनों को पूरा करने में मदद करता है।

सिंधु ने IANS को बताया, "मैं सभी युवा जूनियर्स से कहना चाहती हूं कि उनके लिए अपने माता-पिता का सपोर्ट बहुत जरूरी है। जब मैंने बैडमिंटन खेलना शुरू किया, तो मेरे माता-पिता ने मुझे बहुत सपोर्ट किया। मुझे लगता है कि पेरेंट्स को भी यह समझने की जरूरत है कि उनका बच्चा किस चीज में दिलचस्पी रखता है और उन्हें सपोर्ट करें।”  

सिंधु ने कहा कि युवाओं को सफलता किसी भी खेल में जल्दी और आसानी से नहीं मिलती है। वो, उन्हें हार के लिए तैयार रहने के साथ-साथ आत्मविश्वास खोने के बजाय इनसे सीखने की सलाह देती हैं। 

उन्होंने कहा, "शुरुआत में आप कुछ जीत हासिल करते हैं तो कुछ हार। जब आप हारते हैं, तो यह आपको परेशान कर देती हैं, क्योंकि आप हमेशा जीतना चाहते हैं। जबकि, हमेशा ऐसा नहीं होता है, लेकिन आप हार से बहुत कुछ सीख सकते हैं। मैंने भी अपनी हार से बहुत कुछ सीखा है। इसके बाद आप अगली बार मजबूती से वापसी करते हैं।"  

रियो 2016 की रजत पदक विजेता ने ये बात इस हफ्ते की शुरुआत में थाईलैंड ओपन के शुरुआती दौर में मिली चौंका देने वाली हार के बाद कही थी। मार्च, 2020 में ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप के बाद पहले प्रतिस्पर्धी टूर्नामेंट में मौजूदा विश्व चैंपियन, डेनमार्क की मिया ब्लिचफेल्ट से मात खा गईं। 

हालांकि, 25 वर्षीय इस हार से व्यथित नहीं हैं। वो टोक्यो 2020 से पहले अपने खेल को और बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

उन्होंने कहा, "मैं कोर्ट में वापसी करने के लिए उत्साहित हूं। अभी मैं केवल अपने बैडमिंटन गेम पर ध्यान केंद्रित कर रही हूं।"

भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु

तत्काल परिणाम हासिल करना सिंधु की प्राथमिकता नहीं है, क्योंकि दुनियाभर में कोरोना वायरस महामारी ने न केवल खेल गतिविधियां बाधित की बल्कि, टोक्यो ओलंपिक को भी स्थगित करने के लिए मजबूर कर दिया। अब दुनिया में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं।  

"पिछले साल मार्च और अप्रैल के आसपास हम ओलंपिक के लिए तैयार हो रहे थे, लेकिन दुर्भाग्य से यह स्थगित हो गया। इससे थोड़ा दु:ख हुआ, लेकिन फिर मैंने इसे सकारात्मक तरीके से लेते हुए सोचा कि अब तैयारी करने के लिए ज्यादा समय मिल गया है। अपनी गलतियों को सुधारने और स्ट्रोक्स पर काम करने के लिए मेरे पास पर्याप्त समय है। इस तरह सकारात्मक रहने और आगे बढ़ने का रास्ता मिल गया।" 

सकारात्मक बने रहना और धैर्य दिखाना ऐसे गुण हैं जिन पर सिंधु निर्भर है, क्योंकि वह ओलंपिक वर्ष में प्रवेश कर चुकी हैं।

 “मैंने पिछले साल बहुत कुछ सीखा है। पहली बात जो सीखी वो धैर्य था, क्योंकि हमारे पास कुछ महीनों के लिए कोई टूर्नामेंट नहीं था। हम बाहर नहीं जा सकते थे, और न ही बैडमिंटन खेल सकते थे। ऐसे समय में हमें धैर्य रखने की जरूरत थी।" 

“इस दौरान मैंने अपने परिवार के साथ बहुत समय बिताया। क्योंकि पहले ज्यादातर समय टूर्नामेंट के लिए यात्रा करने में ही गुजर जाता था। पहली बार मुझे परिवार के साथ इतना समय बिताने का मौका मिला। मैंने घर पर रहते हुए ट्रेनिंग की। इस दौरान मैंने धैर्य रखना और हर समय सकारात्मक रहना सीखा।”