प्रधानमंत्री बाल पुरस्कार 2021: खेल श्रेणी में इन सात खिलाड़ियों को मिला पुरस्कार

विभिन्न क्षेत्रों में विशेष योगदान के लिए कुल 32 बच्चों को मिला प्रधानमंत्री बाल पुरस्कार

लेखक भारत शर्मा ·

देश में 72वें गणतंत्र दिवस पर विभिन्न क्षेत्रों में अपने विशेष योगदान के लिए 32 बच्चों को प्रधानमंत्री बाल पुरस्कार 2021 से सम्मानित किया गया है। इन बच्चों ने नवाचार, खोज, खेल, कला और संस्कृति, सामाजिक सेवा और बहादुरी के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य किया है।

यहां हम जानेंगे खेल क्षेत्र में पुरस्कार हासिल करने वाले उन सात खिलाड़ियों के बारे में-ख़ुशी चिराग पटेल

अहमदाबाद निवासी ख़ुशी चिराग पटेल को कलात्मक रोलर स्केटिंग में अपनी विशेष उपलब्धि के लिए यह पुरस्कार दिया गया है। इस वर्ष उन्होंने फ्रांस में आयोजित कलात्मक स्केटिंग विश्व चैम्पियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया। 14 वर्षी खुशी अंडर-19 आयु वर्ग में सबसे कम उम्र की प्रतिभागी थी। इसमें उन्होंने चौथा स्थान हासिल किया था।

उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करने के अलावा जिला और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कई पदक हासिल किए हैं। पटेल ने 17वीं एशियाई रोलर स्केटिंग चैंपियनशिप में भाग लिया और अंतर्राष्ट्रीय स्तर (कैडेट समूह) में तीन पदक हासिल किए। उन्होंने 4 साल की उम्र में स्केटिंग शुरू की और सरदार पटेल जूनियर अवार्ड और जयदीप सिंह जूनियर अवार्ड भी अपने नाम कर चुकी है।

काम्या कार्तिकेयन

मुंबई के नेवी चिल्ड्रन स्कूल में कक्षा 8 की छात्रा काम्या कार्तिकेयन अर्जेंटीना के माउंट एकांकागुआ पर जाने वाली सबसे कम उम्र की बालिका है।

कमांडर एस कार्तिकेयन की बेटी, काम्या वर्तमान में "सरस" नामक एक मिशन पर है। साहसी किशोरी पर्वतारोही ने उत्तरी ध्रुव, दक्षिणी ध्रुव और सात शिखर (एवरेस्ट, एकांकागुआ, डेनाली, किलिमंजारो, विंसन, पुणक जया, माउंट एल्ब्रस) तक पहुंचने की इच्छा जताई है।

इस अति उत्साही वंडरकिड ने अब तक अफ्रीका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अमेरिका में सबसे ऊंची चोटियों पर फतह हासिल कर ली है। इसके अलावा अगस्त 2017 में माउंट स्टोक कांगड़ी पर चढ़ने में सबसे कम उम्र का विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया है। वह रूस के शिखर माउंट एल्ब्रस से स्की करने वाली सबसे कम उम्र की किशोरी भी हैं।

मंत्र जितेन्द्र हरखानी

राजकोट के 17 वर्षीय किशोर मंत्र जितेंद्र हरखानी डाउन सिंड्रोम से पीड़ित है, लेकिन उन्होंने कभी भी इस बीमारी को अपने सपनों को पूरा करने के बीच में नहीं आने दिया। उन्होंने 2019 में अबू धाबी में आयोजित स्पेशल ओलंपिक की तैराकी स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था।

मंत्र ने चार साल की उम्र में तैराकी शुरू की थी और तब से 50 मीटर फ्रीस्टाइल और स्पेशल ओलंपिक में 50 मीटर बैकस्ट्रोक इवेंट्स में टॉप पोडियम फिनिश हासिल कर चुके हैं।

अर्शिया दास

10 वर्षीय शतरंज सनसनी अर्शिया दास त्रिपुरा राज्य की निवासी है। वह 2019 में उज्बेकिस्तान में एशियाई स्कूल शतरंज चैम्पियनशिप में भारत के लिए एकमात्र स्वर्ण पदक विजेता थी।

वह अपने परिवार की तरफ से इस खेल में महारात हासिल करने वाली पहली महिला हैं। उनके पिता पूर्णेंदु दास भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के कर्मचारी हैं, जबकि उनकी मां अर्निशा नाथ दास एक गृहिणी हैं।

वह एक शॉपिंग मॉल में शतरंज बोर्ड के आने के बाद खेल में लग गई। इससे पहले वह अपने कंप्यूटर पर शतरंज का अभ्यास करती थी। उनकी पहली राष्ट्रीय चैम्पियनशिप उपस्थिति 6 साल की उम्र में हुई और वह एक महिला ग्रैंडमास्टर बनना चाहती हैं। भारतीय शतरंज के दिग्गज विश्वनाथन आनंद उनके आदर्श हैं।

सविता कुमारी

16 साल की सविता कुमारी झारखंड के रांची की रहने वाली हैं और उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिताओं में उनकी उपलब्धि के लिए पुरस्कार दिया गया है। वह कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय सोनाहातु की छात्रा हैं और उन्होंने 2018 (सीनियर वर्ग) में दक्षिण एशियाई तीरंदाजी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता था।

उन्होंने 2014 में बिरसा मुंडा तीरंदाजी अकादमी, सिल्ली द्वारा प्रदर्शित एक डेमो शो में भाग लेने के बाद तीरंदाजी में रुचि दिखाई। वह एक कौशल परीक्षण के माध्यम से उस पर अपना स्थान अर्जित करने के बाद उसी अकादमी में प्रशिक्षण लेती है। उनके पिता एक सुरक्षा गार्ड हैं और उन्हें खेल के लिए समर्पित रहने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

पलक शर्मा

इंदौर निवासी 12 वर्षीय गोताखोर पलक शर्मा का सपना ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने का है।

उन्होंने 8 साल की उम्र में तैराकी में गहरी रुचि विकसित की और 2019 एशियन एज ग्रुप डाइविंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल किया। उसने छह राष्ट्रीय टूर्नामेंटों में अपने राज्य का प्रतिनिधित्व किया है और 12 स्वर्ण और चार रजत पदक हासिल किए हैं।

कोरोना महामारी के कारण उसका अभ्यास प्रभावित हुआ था, लेकिन जब स्थानीय जिला कलेक्टर मनीष सिंह को इस बारे में सूचित किया गया, तो उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वो इलाके में एक नजदीकी स्विमिंग पूल शुरू करें ताकि वह प्रशिक्षण फिर से शुरू कर सकें।

मोहम्मद रफी

उत्तर प्रदेश के 17 वर्षीय जिमनास्ट ने 2019 में मंगोलिया में आयोजित जूनियर एशियन कप में फ्लोर एक्सरसाइज श्रेणी में भारत के लिए कांस्य पदक हासिल किया। रफी को उनके भाई ने इस खेल को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया था।

वह अपने आयु वर्ग में पांच बार के राष्ट्रीय चैंपियन हैं। उन्होंने पुरुषों के अंडर-17 ऑल-राउंड कलात्मक जिम्नास्टिक स्पर्धा में खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2019 में तीन स्वर्ण पदक और एक रजत पदक भी जीता है।