भारत को बैडमिंटन का पॉवरहाउस बनाने के इरादे से पुलेला गोपीचंद अब कोच के मेंटर बनेंगे

पूर्व भारतीय बैडमिंटन स्टार ने बताया कि क्यों वह टोक्यो ओलंपिक के बाद कोच के मेंटर की भूमिका निभाएंगे

लेखक ओलंपिक चैनल ·

बैडमिंटन के मुख्य राष्ट्रीय कोच पुलेला गोपीचंद (Pullela Gopichand) ने सोमवार को इस बात का ख़ुलासा किया कि वह टोक्यो ओलंपिक के बाद ज़्यादा समय कोच की मेंटरिंग में बिताएंगे। इसके पीछा का उनका मक़सद है भारत को बैडमिंटन का पॉवरहाउस बनाना।

गोपीचंद बेंगलुरु के "द स्पोर्ट्स स्कूल" के साथ भी जुड़ गए हैं, और इसी दौरान उन्होंने कहा कि, "ओलंपिक के बाद, मैं अपना ज़्यादातर समय कोच को मेंटर करने में दूंगा और अगले कुछ सालों के लिए मैं स्पोर्ट्स साइंस रिसर्च प्रोगराम के साथ भी जुड़ा रहूंगा।"

उन्होंने आगे कहा, "2020 के बाद मैं अपने अनुभव को दूसरे कोच के साथ भी साझा करूंगा, ताकि हम साथ काम करें और इसका फ़ायदा बैडमिंटन को पहुंच सके। और भारतीय बैडमिंटन का स्तर ख़ूब ऊपर की ओर जाए, मुझे आशा है कि मैं इसे सच कर पाऊंगा। हम एक दिन बैडमिंटन के पॉवरहाउस होंगे और हम सब साथ मिलकर अपने देश के लिए इसे संभव करेंगे।"

पिछले डेढ़ दशकों से पुलेला गोपीचंद भारतीय बैडमिंटन की जान की तरह हैं, अब वह अनुप श्रीधर बैडमिंटन ऐकेडमी में बैडमिंटन प्रोग्राम के साथ जुड़ेंगे जो ‘’द स्पोर्ट्स स्कूल’’ के अंतर्गत आता है।

2001 में ऑल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन चैंपियनशिप जीतने वाले पुलेला गोपीचंद सिर्फ़ दूसरे भारतीय शटलर हैं। साइना नेहवाल (Saina Nehwal) और पी वी सिंधु (PV Sindhu) को ओलंपिक पदक दिलाने में गोपीचंद का अहम किरदार रहा है और अब उन्होंने इस बात का ख़ुलासा किया कि वह कोच को मेंटर करेंगे ताकि हर एक खिलाड़ी को निखारा जा सके।

पुलेला गोपीचंद ने घोषणा की है कि राष्ट्रीय शिविर सोमवार 17 अगस्त से फिर से शुरू होगा।

प्रत्येक खिलाड़ी के लिए एक कोच, फ़िज़ियो और ट्रेनर होना चाहिए

गोपीचंद ने अपनी बातों को आगे बढ़ाते हुए कहा, "हमारे पास कई कोच हैं, उदाहरण के लिए साइना के पास एक व्यक्तिगत कोच, फ़िज़ियो, मालिश करने वाला और ट्रेनर हैं। इसी तरह सिंधु और युगल खिलाड़ियों के साथ भी ऐसा ही है। तो हम कह सकते हैं कि हमारे कुछ खिलाड़ियों के साथ पूरी टीम काम करती है।‘’

"मैंने पिछले कुछ सालों में जो किया है, उसी रास्ते पर चलते हुए ज़रूरी नहीं कि आगे भी हमें वही नतीजे और क़ामयाबी मिल सकें। मैं मानता हूं कि मेरे अनुभवों का साझा करना चाहिए, लिहाज़ा मैं कोच को मेंटर करने के लिए कोच प्रोगराम का हिस्सा बनना चाहता हूं, मैं स्पोर्ट्स साइंस और रिसर्च प्रोगराम की ओर जा रहा हूं, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग मेरे अनुभवों का फ़ायदा उठा पाएं।"

भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों के नाम अब तक सिर्फ़ दो ओलंपिक पदक रहे हैं, साइना नेहवाल ने लंदन 2012 में कांस्य पदक अपने नाम किया था, तो रियो 2016 में पी वी सिंधु ने रजत पदक पर कब्ज़ा जमाया था।

साइना नेहवाल और पी वी सिंधु दोनों ने ही पुलेला गोपीचंद की कोचिंग में इन पदकों को हासिल किया था।