जनवरी में होने वाले टूर्नामेंट के बाद पता चलेगा, हम कहां खड़े हैं: पुलेला गोपीचंद

भारतीय टीम के कोच अपने खिलाड़ियों की ट्रेनिंग से तो खुश नजर आएं लेकिन भविष्य के प्लान बनाने से पहले वह थाईलैंड ओपन तक का इंतजार करना चाहते हैं।

लेखक लक्ष्य शर्मा ·

अगले साल मार्च में ओलंपिक क्वालीफिकेशन विंडो पर नज़र रखने के साथ ही भारतीय राष्ट्रीय बैडमिंटन टीम के मुख्य कोच पुलेला गोपीचंद (Pullela Gopichand) जनवरी में होने वाले थाईलैंड ओपन का भी इंतजार कर रहे हैं। इस टूर्नामेंट के जरिए वह देखना चाहते हैं कि खिलाड़ी का कोरोना वायरस (COVID-19) ब्रेक के बाद स्तर क्या है।

अक्टूबर में डेनमार्क ओपन और सारलोर्क्स ओपन को छोड़कर साल 2020 में विश्वभर के बैडमिंटन टूर्नामेंट कोरोना महामारी के कारण प्रभावित हुए हैं।

डेनमार्क और जर्मनी में हुए इन टूर्नामेंट में पीवी सिंधु (PV Sindhu), साइना नेहवाल (Saina Nehwal), बी साई प्रणीत (B Sai Praneeth) सहित कई बड़े खिलाड़ियों ने हिस्सा नहीं लिया था। BWF वर्ल्ड टूर का एशियाई लेग काफी लंबे ब्रेक के बाद फिर से शुरू होने की उम्मीद है।

बीडब्ल्यूएफ के नए कैलेंडर के मुताबिक 12 से 17 जनवरी तक योनेक्स थाईलैंड ओपन (Yonex Thailand Open), 19 से 24 जनवरी तक टोयोटा थाईलैंड ओपन (Toyota Thailand Open) और 27 से 31 जनवरी तक बैंकॉक में होने वाले बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर फाइनल्स (BWF World Tour Finals) खेला जाएगा।

गोपीचंद ने द वीक से बातचीत में बताया कि “जनवरी में होने वाले टूर्नामेंट्स से ही पता चलेगा, हम कहां खड़े हैं और उसी के बाद हम एक्शन लेंगे।”

इसके अलावा उन्होंने कहा कि “यह एक चुनौतीपूर्ण साल होगा, हमें जनवरी के दो हफ्तों में ही दो टूर्नामेंट्स खेलने हैं। हमारे सभी खिलाड़ी अनुभवी है और वह ओलंपिक के अनुसार ही अपनी तैयारियों को जारी रखेंगे।”

कोविड-19 के कारण मिले ब्रेक के दौरान गोपीचंद को हैदराबाद में अपनी अकादमी में एक स्टार्ट-स्टॉप राष्ट्रीय शिविर में कुछ खिलाड़ियों के साथ काम करने का अवसर मिला है, लेकिन पूर्व ऑल इंग्लैंड चैंपियन का मानना है कि खिलाड़ियों की असली परीक्षा टूर्नामेंट में ही होती है।

हालांकि गोपीचंद खिलाड़ियों की मेहनत से खुश हैं।

इस बारे में इस दिग्गज का कहना है कि “सभी खिलाड़ियों ने अच्छी वापसी की, खासकर सीनियर्स खिलाड़ियों अपनी फिटनेस पर काफी मेहनत कर रहे हैं, यहां किसी को कोई परेशानी नहीं है और अगर किसी को है भी वह शारीरिक तौर पर है। अगर आपके पास एक महीने का समय है तो खिलाड़ी इस परेशानी को दूर कर सकते हैं। जल्दबाजी नहीं है।”

गोपीचंद ने बताया कि मेरे लिए "मेरे हिसाब से चुनौती उन युवा खिलाड़ियों के साथ अधिक है, जिन्होंने सीनियर्स की तुलना में एक साल का समय गंवाया है।"

पारुपल्ली कश्यप (Parupalli Kashyap), साइना नेहवाल (Saina Nehwal), लक्ष्य सेन (Lakshya Sen), एचएस प्रणॉय (HS Prannoy) और सतविकसाईराज रणकीरेड्डी (Satwik Rankireddy) जैसे स्टार खिलाड़ियों सहित कई खिलाड़ियों के लिए पिछले कुछ महीने कठिन रहे हैं। इन सभी को कोरोना ने अपनी जकड़ में ले लिया था।

भारत के पूर्व दिग्गज गोपीचंद ने कहा "सतविकसाईराज कोविड-19 के इंफेक्शन के बाद लौटे हैं और उनका थोड़ा वजन भी बढ़ गया है, उनकी वापसी से पहले हम उनकी शारीरिक फिटनेस पर ध्यान दे रहे हैं। अब तक उन्होंने अच्छा काम किया है और मुझे उम्मीद है कि टूर्नामेंट शुरू होने से पहले वह अपनी फिटनेस हासिल कर लेंगे।"

इसके अलावा गोपीचंद ने खिलाड़ियों की तबीयत पर जानकारी देते हुए बताया कि "साइना, कश्यप और प्रणॉय पिछले कुछ दिनों से थके थके दिख रहे हैं लेकिन वह लगातार फिटनेस पर काम कर रहे हैं। कोरोना के कारण उनके फेफड़े वास्तव में प्रभावित नहीं हुए हैं, इसलिए मुझे लगता है कि वह जल्दी वापसी करेंगे।"