पुलेला गोपीचंद ओलंपिक से पहले पीवी सिंधु के खेल में इस तरह लाएंगे बदलाव

राष्ट्रीय बैडमिंटन कोच पुलेला गोपीचंद मानते हैं कि शटलरों को मई, जून और जुलाई के दौरान अपने खेल के स्तर को सुधारना होगा ताकि वह ओलंपिक के लिए तैयार हो सकें।

लेखक सैयद हुसैन ·

2019 में कुछ सकारात्मक बैडमिटंन खेलने के बाद अब भारतीय शटलरों की नज़र अपनी कमियों को दूर करते हुए ओलंपिक के लिए तैयार रहने पर है। राष्ट्रीय कोच पुलेला गोपीचंद ने भी कहा है कि 2020 टोक्यो ओलंपिक के लिए भारतीय शटलरों के पास खेल के स्तर को सुधारने के लिए मई, जून और जुलाई का वक़्त बेहद अहम है।

‘’मैं मानता हूं कि मई, जून और जुलाई तैयारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन मुझे उम्मीद है कि हमारा एक बड़ा दल होगा जो इस दौरान खेल रहा होगा और ओलंपिक के लिए क्वालीफ़ाई कर रहा होगा, फिर चाहे वह पुरुष एकल या महिला एकल हो या युगल। ख़ासतौर से ओलंपिक के प्रारूप को देखते हुए, जो भी वहां क्वालीफ़ाई करेगा उसके पास टोक्यो में मौक़ा भी होगा।‘’ गोपीचंद ने यह बातें मुंबई में लॉन्च हुए बैडमिंटन गुरुकुल के दौरान कहीं, जिसे स्क्रॉल ने प्रकाशित किया है।

ऐसे में जब मई में भारतीय शटलर किसी बड़ी प्रतियोगिता में शिरकत नहीं कर रहे हैं, तो जून के महीने में होने वाली 500 सीरीज़ थाईलैंड ओपन और सुपर 1000 सीरीज़ इंडोनेशिया ओपन में उनके पास इन प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेने का मौक़ा होगा।

वापसी से पहले पी वी सिंधु को अपने खेल में लाने होंगे बदलाव

अगस्त में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में चैंपियन रहीं पीवी सिंधु से लोगों की उम्मीदें बहुत बढ़ गईं थीं, और वह अब एक अलग स्तर पर पहुंच चुकी हैं। लेकिन वर्ल्ड चैंपियनशिप के बाद से सिंधु का प्रदर्शन लगातार नीचे की ओर गिर रहा है। इस दौरान उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन फ़्रेंच ओपन के क्वार्टरफ़ाइनल में पहुंचना था, गोपीचंद को भी यही चिंता सता रही है और वह 2016 ओलंपिक की रजत पदक विजेता को कुछ सलाह भी दे रहे हैं।

‘’मुझे लगता है वह एक बेहतरीन खिलाड़ी हैं, जो अपना सर्वश्रेष्ठ नहीं दे पा रहीं। हां यह सही है कि नतीजे उनके पक्ष में नहीं जा पा रहे, लेकिन हम लोग वापसी करेंगे। हम इसमें बदलाव की ज़रूरत है और हम एक बार फिर वापसी करेंगे।‘’ 

‘’असल में एक टूर्नामेंट के बाद दूसरे टूर्नामेंट की प्लानिंग करने में उन्हें तैयारी के लिए ज़्यादा समय नहीं मिल पाया। मुझे लगता है कि आज नहीं तो कल, हमें ये आश्वस्त करना है कि एक बार फिर वह पटरी पर होंगी और तैयारियां शुरू करेंगी।‘’ 46 वर्षीय गोपीचंद ने ये बातें कहीं।

लक्ष्य का लक्ष्य है शानदार

पिछले साल भले ही सीनियर खिलाड़ियों ने सीज़न का अंत अच्छे से नहीं किया, लेकिन युवा लक्ष्य सेन लाजवाब लय में रहे। पॉलिश ओपन के फ़ाइनल में पहुंच कर ही लक्ष्य ने कुछ बड़ा करने की झलक दिखा दी थी, और फिर लक्ष्य ने 2019 में ही बेल्जियन ओपन, डच ओपन, सारलॉरलक्स ओपन, स्कॉटिश ओपन और बांग्लादेश इंटरनेश्नल चैलेंज जीतकर बता दिया कि उनका लक्ष्य कहां है।

18 वर्षीय इस शटलर की तारीफ़ों में गोपीचंद ने भी ख़ूब क़सीदे गढ़े, ख़ास तौर से उनकी तकनीक और एकाग्रता की बात करते हुए लक्ष्य को उन्होंने बड़े स्तर का खिलाड़ी बताया।

‘’यह शानदार है, क्योंकि बहुत ही कम उम्र में लक्ष्य इस मुक़ाम पर पहुंच गए हैं। रैंकिंग सिस्टम को ध्यान में रखते हुए ये ज़रूरी है कि आप तुरंत ही टॉप-30 में शामिल हो जाएं। क्योंकि उसके बाद ही आपको बड़ी प्रतियोगिताओं में खेलने के अवसर हासिल होंगे।‘’

पुलेला गोपीचंद ने कहा ‘’वह उस मुक़ाम पर पहुंच चुके हैं, और उन्हें ऑल इंग्लैंड जैसी प्रतियोगिताओं में भी खेलने के मौक़े मिलेंगे। मुझे विश्वास है कि वह इस स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए उपयुक्त हैं। वह युवा हैं और उनमें जिस तरह का आत्मविश्वास भी भरा हुआ है, ऊपर से जैसे स्ट्रोक्स वह आसानी से खेलते हैं, यह सब देखने के बाद मुझे लगता है कि आने वाले वक़्त में उन्हें देखना उत्साह से भरा होगा।‘’