एक खुशी, कई ग़म के साथ पीवी सिंधु का सीज़न 2019 हुआ ख़त्म

भारतीय दिग्गज शटलर के 2019 बैडमिंटन सीज़न पर एक नज़र, जो लेकर आया ख़ुशियां भी और दे गया ग़म भी, अब है भविष्य में उम्मीदों की बारी।

लेखक सैयद हुसैन ·

भारत की नंबर-1 शटलर और वर्ल्ड चैंपियन पीवी सिंधु के लिए पिछले 12 महीने पूरी तरह से उतार चढ़ाव से भरे रहे। 24 वर्षीय इस शटलर के लिए ये साल कई बड़ी प्रतियोगिताओं में पहले दौर तक ही सीमित रहा, तो साथ ही साथ अगस्त में सिंधु ने बीडब्लूएफ़ वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास भी रच दिया।

वर्ल्ड चैंपियन बनने के बाद से अचानक सिंधु का ग्राफ़ नीचे की ओर गिरता गया, और उन्होंने सीज़न का अंत बीडब्लूएफ़ वर्ल्ड फ़ाइनल्स में हार के साथ ख़त्म किया। सीज़न के आख़िरी टूर्नामेंट में सिंधु ग्रुप स्टेज में ही हार कर बाहर हो गईं। अब जब उतार चढ़ाव से भरा सिंधु का ये सीज़न ख़त्म हो गया है, तो अब ये देखना है कि 2020 टोक्यो ओलंपिक के लिए कैसे ये भारत की सबसे बड़ी उम्मीद जीत की पटरी पर वापस लौटती है।

चिंताजनक है सिंधु का प्रदर्शन ?

2016 रियो ओलंपिक की रजत पदक विजेता के लिए साल 2019 से अलग वर्ल्ड चैंपियनशिप में जीते स्वर्ण को हटा दिया जाए तो फिर ये साल उनके लिए बेहद निराशाजनक ही रहा। सिंधु ने इस साल खेली प्रतियोगिताओं में वर्ल्ड चैंपियनशिप के अलावा सिर्फ़ इंडोनेशिया ओपन के ही फ़ाइनल तक पहुंच पाईं। इसके अलावा दो ही बार उन्होंने सेमीफ़ाइनल का भी सफ़र (इंडिया ओपन और सिंगापुर ओपन) तय किया। इस कैलेंडर वर्ष में अगर सिंधु के हार जीत के रिकॉर्ड को देखें तो ये 30-17 रहा, जो कि पिछले सीज़न से बेहद कम है। 2018 सीज़न में सिंधु ने 46 मैच जीते थे जबकि हार उन्हें 16 में ही मिली थी।

ख़ास तौर से वर्ल्ड चैंपियनशिप के बाद से सिंधु का फ़ॉर्म बेहद निराशाजनक रहा है, क्योंकि ज़्यादातर प्रतियोगिताओं में सिंधु पहले दौर या क्वार्टर फ़ाइनल से भी पहले हार गईं। क्वार्टर फ़ाइनल भी वह सिर्फ़ फ़्रेंच ओपन में ही पहुंच पाईं थीं, और ये गिरता हुआ प्रदर्शन बीडब्लूएफ़ में भी जारी रहा और वहां तो सिंधु तीन में दो मुक़ाबले हारते हुए ग्रुप स्टेज को भी पार नहीं कर सकीं।

साल 2019 में पीवी सिंधु ने 30 मैच जीते जबकि 17 में उन्हें हार मिली

जिस जगह उन्होंने 2018 में बीडब्लूएफ़ वर्ल्ड टूर फ़ाइनल्स में गोल्ड मेडल हासिल किया था, इस बार सिंधु के सामने दूसरी शटलरों का जवाब भी नहीं था। पहले सिंधु को जापान की अकाने यामागुची से हार मिली, और अगले ही मैच में चीन की चेन यू फ़ेई ने भी भारतीय शटलर को चारों ख़ाने चित कर दिया। दोनों ही मुक़ाबलों में ये साफ़ दिख रहा था कि तीसरे गेम में सिंधु पर थकान पूरी तरह से हावी थी। और यही वजह थी कि सिंधु अपनी प्रतिद्वंदियों के सामने फ़िट्नेस में कहीं पीछे रहीं। दोनों ही निर्णायक गेम में सिंधु पहले 8-21 से यामागुची से हारीं और 12-21 से उन्हें चेन ने भी मात दी।

सिंधु के इस तरह प्रदर्शन में गिरावट के पीछे की सबसे बड़ी वजह बीडब्लूएफ़ का लगातार कार्यक्रम भी है। इस भारतीय शटलर ने पिछले 12 महीनों में क़रीब क़रीब दुनिया के हर हिस्से में जाकर बैडमिंटन खेला, और उन्हें ज़्यादा आराम करने का भी मौक़ा नहीं मिला। एक ऐसी शटलर जो अपने ताक़तवर शॉट्स पर ज़्यादा निर्भर रहती हैं, उन्हें प्रतियोगिताओं के बीच में आराम ज़रूरी है ताकि वह अपने शरीर को उसी हिसाब से तैयार रख सकें। सिंधु के लिए इस सीज़न ये नहीं हो सका, जिसकी उन्हें बहुत दरकार थी।

ओलंपिक गोल्ड को लेकर अपने जुनून पर बोलीं पीवी सिंधु

भारत ने आखिरी बार 2008 में ओलंपिक स्वर्ण पदक जीता था। बैडमिंटन स्टार पीवी स...

“मुझे लगता है ये उसके (सिंधु) लिए एक बेहद कठिन साल था, कठिन परिस्थितियों में वह अपने आप को नहीं ढाल पाईं। वर्ल्ड चैंपियनशिप के नतीजे लाजवाब थे, लेकिन उसके बाद की प्रतियोगिताओं में वह और अच्छा कर सकतीं थीं। जहां कई क़रीबी मुक़ाबलों में उनकी हार हुई, कुल मिलाकर मैं यही कहूंगा कि ये साल उनके लिए काफ़ी मुश्किल था।” ओलंपिक चैनल को दिए इंटरव्यू में सिंधु के कोच पुलेला गोपीचंद ने ये बातें कहीं।

पीवी सिंधु के लिए आगे की राह

वर्ल्ड टूर फ़ाइनल्स के साथ उनके इस सीज़न का सफ़र ख़त्म होने के बाद, आख़िरकार पीवी सिंधु को ज़रूरी आराम और खेल से थोड़ा दूर रहने का वक़्त मिल गया है। सिंधु अब दोबारा कोर्ट पर जनवरी के अंत तक ही प्रीमियर बैडमिंटन लीग (पीबीएल) में नज़र आ सकती हैं।

लिहाज़ा अगला महीना सिंधु को एक बार फिर वापसी की पटरी पर लौटने के लिए अहम हो सकता है, जहां से वह अपनी कमियों को दूर करना चाहेंगी क्योंकि 2020 टोक्यो ओलंपिक भी इसी साल है। सिंधु सबसे असरदार तब होती हैं जब शुरू से ही वह आक्रामक खेल खेलती हैं, और अपनी प्रतिद्वंदी को ताक़तवर स्मैशेज़ से पूरी तरह दबाव में ले आती हैं।

वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी सिंधु की जीत का मंत्र यही रवैया था, उससे पहले की प्रतियोगिताओं में भी सिंधु का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था। लेकिन सही और ज़रूरी मौक़े पर सिंधु ने अपने खेल में बदलाव लाते हुए इतिहास रचा था।

सिंधु ने इससे पहले भी कई बार ये साबित किया है कि उनमें वापसी की क़ाबिलियत है और बड़ी प्रतियोगिताओं में वह बेहद असरदार रहती हैं। और पूर्व भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी अपर्ना पोपट को भी सिंधु की इसी क़ाबिलियत पर विश्वास है।

“मुझे नहीं लगता कि ये समय है सिंधु की हार का पोस्टमार्टम करने का, ज़रूरी ये है कि वह ख़ुश रहें। चाइना ओपन हो या कोरिया ओपन या इंडिया ओपन, इन सबसे ज़्यादा तवज्जो किसी के लिए भी ये है कि वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड आए। वर्ल्ड चैंपियन ही बनना सबसे ऊपर है।” इएसपीएन के साथ बात करते हुए पोपट ने ये बातें कहीं।

पोपट ने ये भी कहा कि सिंधु के इन गिरते हुए ग्राफ़ का असर कहीं से भी 2020 टोक्यो ओलंपिक पर नहीं पड़ने वाला है। “मुझे नहीं लगता कि फ़ॉर्म के आधार पर अंदाज़ा लगा देना कि सिंधु कैसा करेंगी या कर रही हैं, ये सही है। वह किसी भी टूर्नामेंट में ये सोचकर नहीं उतरती कि पहले क्या हुआ था। उनके लिए बस एक ही चीज़ अहम है कि सही समय पर उनका खेल अच्छा रहे, मुझे पूरा भरोसा है कि उनको और उनकी टीम को ये पता है कि उन्हें क्या करना चाहिए।”

सिंधु ख़ुद भी अपनी फ़ॉर्म को लेकर पहले भी कभी चिंता में नहीं दिखीं हैं, उन्होंने अभी भी चेन के साथ हारने के बाद ओलंपिक चैनल को दिए इंटरव्यू में बेहद आशावादी नज़र आईं।

“मुझे लगता है ये एक अच्छा और देर तक चलने वाला मुक़ाबला था, मैं थोड़ी निराश हूं लेकिन ये चलता रहता है। मैं अपनी ग़लतियों से सबक़ लूंगी और ज़ोरदार वापसी करूंगी।” :पीवी सिंधु

2020 टोक्यो ओलंपिक में अभी क़रीब 9 महीने का समय बचा है, जो मौजूदा ओलंपिक रनर अप के लिए अपने आप को तैयार करने और रंग में लौटने के लिए पर्याप्त है। कुछ दिनों का आराम और कोर्ट से बाहर रहते हुए हम उम्मीद कर सकते हैं कि 2020 बैडमिंटन सीज़न सिंधु के लिए एक शानदार, यादगार और ऐतिहासिक सीज़न बन कर आए।