पीवी सिंधु और सुनील छेत्री ने अभिभावकों से अपने बच्चों को खेल के प्रति बढ़ावा देने का किया आग्रह

पीवी सिंधु और सुनील छेत्री दोनों ने ही खेल को करियर के तौर पर चुनने के लिए अपने माता-पिता को श्रेय दिया है।

भारतीय बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु (PV Sindhu) और फुटबॉल शीर्ष सुनील छेत्री (Sunil Chhetri) के माता-पिता का समर्थन ही था, जिसने उन्हें अपने अंदर की क्षमता को तलाशने का मौका दिया।

दोनों ही खिलाड़ियों ने अपने देश के लिए कई पुरस्कार जीते हैं। जहां एक ओर सुनील छेत्री भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में सबसे अधिक गोल करने वाले खिलाड़ियों में से एक बन गए हैं और इसके साथ ही वह नेशनल टीम का नेतृत्व भी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पीवी सिंधु एक ओलंपिक कांस्य पदक विजेता और विश्व बैडमिंटन चैंपियन हैं।

इसीलिए दोनों ने भारत के सभी माता-पिता से आग्रह किया है कि वे अपने बच्चों को खेल की मदद से जीवन की राह खोजने के लिए प्रोत्साहित करें।

शुक्रवार को भारत सरकार की एक प्रमुख परियोजना फिट इंडिया सीरीज़ के एक ऑनलाइन सत्र के दौरान बोलते हुए इन शीर्ष एथलीटों ने बताया कि खेल में उनकी सफलता का बीज बचपन में ही उनके घरों में बो दिया गया था।

पीवी सिंधु ने कहा, “मैं अपने माता-पिता की आभारी हूं; मैं भाग्यशाली हूं कि वे खुद खिलाड़ी थे। उन्होंने बहुत कुछ सहा है और इसीलिए मैंने जिस भी खेल को चुनना चाहा तो उसमें उन्होंने मेरा साथ दिया।”

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"Respect the Training Honor the Commitment Cherish the Results" I truly believe in this saying. What an incredible few weeks it has been!! I thank everyone who has supported, prayed,loved and wished me in this grand success. The whole country has routed for me, how lucky am I to receive this unconditional love from all of you. I take this opportunity to thank my coach Mr Gopichand who worked relentlessly and always had big dreams for me. I also thank my parents who always encouraged my love for this sport. I also thank my sponsors OGQ ..... who helped in my endeavors. I am truly lucky to have all these loving people in my life. I try to live up to the expectations of the nation in the days to come. @olympicgoldquest @bai_media

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पीवी सिंधु के माता-पिता दोनों ही वॉलीबॉल खिलाड़ी थे लेकिन उनकी बेटी को बैडमिंटन में दिलचस्पी थी। इस खेल को उन्होंने खुद ही चुना था।

सुनील छेत्री के मामले में भी ठीक ऐसा ही था। उनके माता-पिता बड़े खेल प्रेमी थे, जिसने उनके फुटबॉल के सपने को साकार करने में बहुत मदद की।

भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान ने कहा, “मैं और मेरी बहन सभी अलग-अलग खेल खेलने के लिए प्रोत्साहित किए गए। 13 साल की उम्र तक मेरी मां ही मेरी सबसे बड़ी प्रतिद्वंदी रहीं। मेरा एकमात्र सपना उन्हें हराना था।”

“हमें खुद से कुछ भी करने की अनुमति दी गई, जिसके बारे में अब मैं सोचता हूं तो बहुत गहरी बात लगती है। इसलिए मैंने अपने जीवन में जो कुछ भी हासिल किया है, वह मेरे माता-पिता की वजह से है।”

अपने खुद के अनुभव के साथ छेत्री ने सभी अभिभावकों को अपने बच्चों का साथ देने के लिए प्रोत्साहित किया, क्योंकि वे खुद भी अपनी राह खोजने के लिए तैयार थे।

उन्होंने कहा, “एक सप्ताह में वे पीवी सिंधु बनना चाहते हैं तो अगले सप्ताह लिएंडर पेस और सचिन तेंदुलकर। फुटबॉल खेलने से लेकर डॉक्टर बनने तक, सप्ताह के बाद माता-पिता के लिए यह निराशाजनक हो सकता है। लेकिन बच्चे ऐसे ही होते हैं।”

खेल आपको बनाता है बेहतर इंसान

सुनील छेत्री के अनुसार खेल अनुशासन को बढ़ावा देने के साथ ही जीवन के कई पहलुओं को भी बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकता है।

उन्होंने कहा, "आपकी पुस्तकों में ऐसा कुछ भी नहीं है जो आपको खेलों से अधिक बेहतर तरीके से सिखा सके। कैसे एक हार से उबरने के लिए आपको खुद को बेहतर करना होता है। कैसे एक जीत के बाद आपको विनम्र रहना होता है और जीवन को जीने के बारे में... खेल आपको सब कुछ सिखाता है।

अगर सिंधु, मैं या अन्य सभी एथलीट बेहतर इंसान बन सके हैं, तो यह खेल के कारण है। हम इसकी वजह से ही बेहतर इंसान हैं।

उन्होंने जोर देते हुए कहा, “कोई भी खेल चुनो और उसका आनंद लेते रहो। आप एक डॉक्टर, इंजीनियर या आप जो भी बनना चाहते हैं बन सकते हैं, लेकिन खेलते रहिए।”

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