टोक्यो 2020 से पहले सात्विक-चिराग को अपने डिफ़ेंस पर ध्यान देने की ज़रूरत

भारतीय डबल्स स्टार सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी के लिए साल 2019 शानदार रहा, लेकिन इंडोनेशियाई कोच फ़्लैन्डी लिमपेल मानते हैं कि 2020 ओलंपिक गेम्स में पदक जीतने के लिए अभी और मेहनत की दरकार है।

लेखक सैयद हुसैन ·

भारतीय पुरुष युगल जोड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी के लिए साल 2019 बेहद यादगार रहा था, जुलाई के महीने में इस जोड़ी ने अपना पहला सुपर 500 ख़िताब थाईलैंड ओपन अपने नाम किया था और अक्टूबर में हुए फ़्रेंच ओपन 750 में भी ये जोड़ी बेहद क़रीबी मुक़ाबले में हार के बाद दूसरे स्थान पर रही थी।

इन प्रदर्शनों के बाद बैडमिंटन वर्ल्ड फ़ेडरेशन ने इन्हें ‘मोस्ट इम्प्रूव्ड प्लेयर ऑफ़ द ईयर’ के लिए भी नामित किया था।

इनके फ़ॉर्म को देखते हुए डबल्स विशेषज्ञ फ़्लैन्डी लिमपेल भी मानते हैं कि ये जोड़ी 2020 टोक्यो ओलंपिक में पदक जीतने की क्षमता रखती है, लेकिन यह तभी मुमकिन है जब वे अपने डिफ़ेंस और निरंतरता पर ध्यान दें।

क़रीब होकर भी हैं दूर

लिमपेल को बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (बीएआई) ने अपने साथ मार्च में जोड़ा था। लिपेल ने इन दोनों के बारे में न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के साथ बात करते हुए कहा कि, ‘’इन दोनों ने इस साल अच्छी शुरुआत की है, लेकिन अभी भी कुछ चीज़ें हैं जहां उन्हें बदलाव की ज़रूरत है। इनके पास ओलंपिक में पदक जीतने की तो क्षमता है लेकिन साथ ही साथ उन्हें शॉट के चयन में निरंतरता दिखानी होगी। कोर्ट पर पूरी तरह से रणनीति में भी बेहतर करने की ज़रूरत है।‘’

इन दोनों के डिफ़ेंस और निरंतरता की कमी पर और भी प्रकाश डालते हुए लिमपेल ने कहा, ‘’इनका आक्रामक खेल तो अच्छा है, लेकिन रक्षात्मक क्षेत्र ख़राब है। इनके प्रदर्शन में भी उतार और चढ़ाव काफ़ी हैं, और अब जब ओलंपिक में ज़्यादा समय नहीं बचा है तो उन्हें अपने रक्षात्मक खेल पर ध्यान देने की ज़रूरत है। साथ ही साथ जब उन्हें और अनुभव हासिल होगा तो वह दुनिया के सर्वोच्च जोड़ी के ख़िलाफ़ भी अच्छा प्रदर्शन करेंगे।‘’

खेल के प्रति रवैये में भी तालमेल बैठाना ज़रूरी

साथ ही साथ लिमपेल को ये भी लगता है कि इन खिलाड़ियों के खेल के प्रति रवैये में भी थोड़ी समस्या है। इसके महत्व पर ज़ोर देते हुए लिमपेल ने कहा, ‘’खिलाड़ियों के रवैये को लेकर भी कुछ करना होगा। क्योंकि ये डबल्स में एक समस्या बन जाती है, यह एक टीम खेल है। यह कोई व्यक्तिगत खेल नहीं है, इसलिए ज़रूरी है कि आपका साझेदार आपकी परवाह करने वाला हो, आपको इसके लिए इस तरह से ही दोनों को अभ्यास कराना होगा।‘’

‘’दोनों के लिए ही एक तरह का लक्ष्य होना चाहिए, दोनों को ही एक साथ और एक पथ पर रहना ज़रूरी है। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो फिर प्रतियोगिता जीतना मुमकिन नहीं।‘’

सांस्कृतिक मतभेद

ये जानते हुए कि हर देश की अपनी एक अलग संस्कृति होती है, लिमपेल ने ये भी कहा कि मानसिक तौर पर बदलाव करना ज़रूरी है अगर भारत चाहता है कि डबल्स में और ऊपर की ओर बढ़ें। उन्होंने आगे ज़ोर देते हुए कहा ‘’एक कोच के तौर पर मेरा काम है ये सब बदल देना, और एक अच्छी टीम बनाना, और इसके लिए मैं कोशिश कर रहा हूं। और यही वजह है कि सात्विक और चिराग लगातार ऊपर की ओर बढ़ रहे हैं। वे मेरी बातों को मानते भी हैं और इसके नतीजे सभी के सामने हैं। मैं हमेशा उनकी मदद के लिए हूं।‘’ 

लिमपेल का क़रार टोक्यो 2020 तक है, और यह इंडोनेशियाई इसके लिए जी जान भी लगा रहे हैं और अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं कि 2020 टोक्यो ओलंपिक में ये जोड़ी पदक जीते। ‘’मुझे पूरी उम्मीद है कि मैं ओलंपिक में भारत के लिए डबल्स में पदक दिलवाऊं। ऊपर वाला जानता है, मैं इसके लिए कितनी कोशिश कर रहा हूं, मुझे उम्मीद है पदक के लिए खिलाड़ी भी उतनी ही कोशिश कर रहे हैं।