इन सात खिलाड़ियों को मिलेगा पद्म श्री सम्मान, जानिए इनके बारे में मुख्य बातें  

सम्मानित होने वालों में टेबल टेनिस खिलाड़ी मौमा दास और पीटी उषा के कोच माधवन नांबियार भी शामिल  

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

भारत सरकार ने 72वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर 2021 में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित होने वाले सात खिलाड़ियों के नामों की घोषणा की। इनमें मौमा दास (टेबल टेनिस), अंशु जामसेनपा (पर्वतारोही), अनीता पौलदुरई (बास्केटबॉल), माधवन नांबियार (पीटी उषा के कोच), वीरेंद्र सिंह (पहलवान), और केवाई वेंकटेश (पैरा-एथलीट) शामिल हैं।

यह देश का चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है। इस वर्ष अलग-अलग क्षेत्रों से इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए कुल 119 लोगों का चयन किया गया है।

आइए जानते हैं पद्म श्री पुरस्कार के लिए चुने गए सभी सात खिलाड़ियों के बारे में-

तिरंगे झंडे के साथ मौमा दास

मौमा दास

मौमा दास एक पूर्व टेबल टेनिस खिलाड़ी हैं, जिनका जन्म कोलकाता में हुआ था। खेल में उनके योगदान के लिए उन्हें भारत के दूसरे सबसे बड़े खेल पुरस्कार अर्जुन अवार्ड से भी नवाजा गया है। उन्होंने याकुट्स्क में 2nd एशिया इंटरनेशनल स्पोर्ट्स गेम्स 2000 में पहला अंतर्राष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीता था। 2015 के राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में दास ने एकल, टीम इवेंट और मिश्रित युगल में रजत पदक पर कब्जा जमाया था।

2017 में ITTF की रैंकिंग में मौमा दास और मनिका बत्रा ने दुनिया में 12वां स्थान हासिल किया, जो 28 राष्ट्रमंडल देशों में सर्वश्रेष्ठ है। ITTF चैलेंज स्पैनिश ओपन में मानिका बत्रा के साथ दास ने फाइनल में जगह बनाई थी। हालांकि शीर्ष वरीयता प्राप्त जोड़ी जेहि जियोन और हियून यांग से मात खाने के बाद ITTF चैलेंज श्रृंखला में रजत पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला जोड़ी बनी।

दास, 2018 राष्ट्रमंडल खेलों के फाइनल में सिंगापुर को 3-1 के स्कोर से हराकर स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाने वाली टीम का भी हिस्सा थीं। उन्होंने टेबल टेनिस खिलाड़ी के रूप में दक्षिण एशियाई खेलों में आठ स्वर्ण पदक जीते। इसके साथ ही उन्होंने एक भारतीय द्वारा सबसे ज्यादा कॉमनवेल्थ प्रतियोगिताओं (गेम्स और चैम्पियनशिप) में 19 पदक जीते हैं।

भारतीय पर्वतारोही अंशु जामसेनपा

अंशु जामसेनपा

अंशु जामसेनपा वो भारतीय पर्वतारोही हैं, जिन्होंने एक सीज़न में दो बार माउंट एवरेस्ट को फतह कर, ऐसा करने वाली दुनिया की पहली महिला होने का रिकॉर्ड बनाया। इसके साथ ही वो पांच दिनों के भीतर ऐसा करने वाली सबसे तेज़ डबल समिटर हैं।

उन्होंने पहली बार 12 मई, 2011 को एवरेस्ट को फतह किया और 21 मई को दूसरी बार चढ़ाई की। इसके बाद 2013 में अंशु ने सुरजीत सिंह लिशंगथेम के साथ फिर से चढ़ाई की।

2017 में, वह पांच दिनों के भीतर दो बार एवरेस्ट को फतह करने वाली पहली महिला बनीं। यह पांचवीं बार चढ़ाई थी, जो एक भारतीय महिला द्वारा सबसे अधिक थी।

इस उपलब्धि के लिए उन्हें 2011 में CNN-IBN यंग इंडियन लीडर अवार्ड से सम्मानित किया गया। 2017 में उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश के सर्वोच्च्य साहसिक पुरस्कार तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार से नवाजा। इसी साल उन्हें अरुणाचल प्रदेश सरकार द्वारा टूरिज्म आइकन ऑफ़ द ईयर अवार्ड प्रदान किया।

पर्वतारोहण में उपलब्धियों के लिए उन्हें अरुणाचल विश्वविद्यालय अध्ययन संस्थान द्वारा पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।

भारतीय महिला बास्केटबॉल टीम की पूर्व कप्तान अनीता पौलदुरई 

अनीता पौलदुरई

अनीता पौलदुरई भारतीय महिला बास्केटबॉल टीम की पूर्व कप्तान हैं। 18 साल के करियर में नौ एशियाई बास्केटबॉल परिसंघ (ABC) में भाग लेने वाली, वह एकमात्र भारतीय महिला हैं।

चेन्नई की रहने वाली अनीता ने 11 साल की उम्र में ही बास्केटबॉल खेलना शुरू कर दिया था। उन्हें वॉलीबॉल और एथलेटिक्स ज्यादा पसंद थे, लेकिन उनके स्कूल के बास्केटबॉल कोच ने उन्हें इस खेल को चुनने की सलाह दी। यह उनके करियर के लिए महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।

19 साल की उम्र में वो सीनियर टीम का नेतृत्व करने वाली सबसे कम उम्र की कप्तान बन गईं। अनीता ने दोहा 2013 में प्रथम 3x3 FIBA एशियन बास्केटबॉल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक, 2012 में हैयांग, चीन के तीसरे एशियाई बीच गेम्स में स्वर्ण पदक, 2011 में श्रीलंका के दक्षिण एशियाई बीच गेम्स में स्वर्ण पदक और 2009 में वियतनाम के एशियाई इंडोर गेम्स में रजत पदक जीता।

2017 में उन्हें भारत अंडर-16 बास्केटबॉल टीम का सहायक कोच नियुक्त किया गया था। 2018 में तमिलनाडु सरकार ने उन्हें लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया।

अपने कोच माधवन नांबियार के साथ पीटी ऊषा

माधवन नाम्बियार

माधवन नांबियार 1977 से 1990 तक 'पय्योली एक्सप्रेस' के नाम से मशहूर पीटी उषा के कोच रहे। उन्होंने पहली बार 1976 में पय्योली स्कूल के वार्षिक खेल समारोह के दौरान उषा को देखा था। 

1978 में क्विलोन नेशनल्स में उषा ने छह पदक जीतकर खेल में धमाकेदार आगाज किया। भारतीय वायु सेना में अधिकारी रहे नांबियार ने रेलवे में नौकरी नहीं मिलने तक उषा के साथ दौरों पर जाने के लिए अपनी पेंशन की राशि का उपयोग किया।

लॉस एंजिल्स ओलंपिक से पहले वो यह मानकर चल रहे थे कि 400 मीटर बाधा दौड़ में ओलंपिक पदक लाने की उषा में कुव्वत है, लेकिन दुर्भाग्य से वह एक सेकंड के सौवें हिस्से से एक पोडियम फिनिश देने से चूक गई। नांबियार ने इसे अपने करियर में "सबसे दुख:द, लेकिन सबसे शानदार पल" के रूप में याद किया।

1985 में उषा ने एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पांच स्वर्ण पदक और एक कांस्य जीता। इसके बाद कोच नांबियार ने उनके फिजियो और मालिश करने वाले के रूप में काम किया, क्योंकि उषा इसके लिए किसी और को नहीं रख सकती थी। उनके कोच ने यह भी सुनिश्चित किया कि उनका प्रशिक्षु केवल पांच दिनों में 11 दौड़ लगाने के लिए पर्याप्त रूप से फिट रहे।

इससे पहले नांबियार को 1985 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ स्टीपलचेज में राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक सुधा सिंह

सुधा सिंह

सुधा सिंह 3000 मीटर स्टीपलचेज में राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक हैं। सिंह को पहली बड़ी सफलता चीन के ग्वांगझू में 2010 के एशियाई खेलों में मिली थी। इसने उन्होंने 9:55:67 के समय के साथ 3000 मीटर स्टीपलचेज प्रतियोगिता जीती। इस प्रतियोगिता का आयोजन पहली बार किया गया था, इसलिए वो पहली एशियाई चैंपियन बनी।  

2012 में उन्होंने 9:47:70 सेकंड के राष्ट्रीय रिकॉर्ड समय के साथ ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया। हालांकि, हीट में 13वें स्थान पर रहने के कारण ओलंपिक में फाइनल के लिए क्वालीफाई नहीं कर सकी। उसी साल उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 

2014 में इंचियोन के एशियाई खेलों में चौथे स्थान पर रहने के बावजूद अच्छी किस्मत ने उन्हें कांस्य पदक दिलाया। क्योंकि स्वर्ण पदक विजेता रूथ जेबेट को लाइन पार करने से पहले ट्रैक के अंदर कदम रखने के कारण अयोग्य घोषित कर दिया गया था।

2016 में उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय एमेच्योर एथलेटिक्स महासंघ (IAAF) डायमंड लीग मीट में 9:26:55 s के समय के साथ एक बार फिर राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ते हुए रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया। हालांकि हीट में 30वें स्थान पर रही।

सुधा ने भुवनेश्वर में 2017 एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण और जकार्ता में 2018 एशियाई खेलों में रजत पदक जीता। जकार्ता में एशियाई खेल उनके लिए एक लिटमस टेस्ट था, क्योंकि अधिकांश आलोचकों ने लिखा था कि उनका करियर खत्म होने के कगार पर है। हालांकि, उन्होंने 9:40:04 के समय के साथ पोडियम में एक स्थान कायम किया।

पहलवान सुशील कुमार के साथ भारतीय फ्रीस्टाइल पहलवान वीरेंद्र सिंह

वीरेंद्र सिंह

वीरेंद्र सिंह 74 किग्रा वर्ग में प्रतिस्पर्धा करने वाले भारतीय फ्रीस्टाइल पहलवान हैं। उन्होंने नौ साल की उम्र से ही पहलवानी में प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया था। सिंह के पहले कोच उनके चाचा सुरिंदर पहलवान और द्रोणाचार्य अवार्डी महा सिंह राव और रामफल सिंह थे।

उन्होंने 2002 में विश्व कैडेट कुश्ती चैंपियनशिप के नेशनल राउंड में पहली बार सफलता का स्वाद चखा और स्वर्ण पदक जीता। 2005 में मेलबर्न में समर डिफ्लैम्पिक्स में भाग लेकर स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया।

सिंह ने 2008 में आर्मेनिया में विश्व बधिर कुश्ती चैंपियनशिप में भाग लेकर रजत पदक और 2009 में ताइपेई, चीन में समर डिफ्लैम्पिक्स में कांस्य जीता।

उन्होंने चार साल बाद बुल्गारिया में 2013 ग्रीष्मकालीन डिफ्लैम्पिक्स में बेहतर प्रदर्शन करते हुए 74 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। 2015 में उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया।

2016 में ईरान के तेहरान में विश्व बधिर कुश्ती चैंपियनशिप में उन्होंने एक और स्वर्ण पदक जीता। वर्तमान में वह भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) में जूनियर स्पोर्ट्स कोच के रूप में कार्यरत हैं।

केवाई वेंकटेश

केवाई वेंकटेश कर्नाटक के पैरा-एथलीट हैं। उनका जन्म एकान्ड्रप्लेश़ यानि बौनेपन के साथ हुआ। इसके कारण उनका कद 4"2' ही रह गया। चौथे वर्ल्ड ड्वॉर्फ गेम्स में छह पदक जीतकर 2005 में उन्होंने लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराया।

अपने करियर के दौरान उन्होंने एथलेटिक्स, बास्केटबॉल, हॉकी, वॉलीबॉल, फुटबॉल और बैडमिंटन जैसी विभिन्न प्रतिस्पधाओं में पदक जीते हैं। इतना ही नहीं ऑस्ट्रिया में आयोजित एक बहु विकलांगता चैंपियनशिप की शॉट पुट स्पर्धा में स्वर्ण पदक भी जीता। 

2004 में ओपन ट्रैक एंड फील्ड चैम्पियनशिप की शॉट पुट, डिस्कस थ्रो और भाला फेंक स्पर्धा में उन्होंने तीन स्वर्ण और दो रजत पदक पर कब्जा जमाया। अपनी महत्वाकांक्षा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने 2006 में हॉकी में स्वर्ण, फुटबॉल और बास्केटबॉल में रजत और 2006 की यूरोपियन ओपन चैम्पियनशिप की बैडमिंटन स्पर्धा में कांस्य पदक अपने नाम किया। 

2012 में खेलों से सन्यास लेने के बाद उन्होंने कर्नाटक पैरा-बैडमिंटन एसोसिएशन के सचिव के रूप में काम किया। 48 वर्षीय वेंकटेश विकलांग व्यक्तियों के बीच खेल को विकसित करने और बढ़ावा देने के लिए प्रशासनिक स्तर पर काम कर रहे हैं।