रोहन बोपन्ना और पाक के एसाम-उल-हक़ क़ुरैशी के साथ खेले गए US ओपन फ़ाइनल की याद कुछ ऐसे ताज़ा हुई

भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ी रोहन बोपन्ना और एसाम-उल-हक़ क़ुरैशी की जोड़ी ने अपनी दोस्ती के चित्रों को कोर्ट पर बख़ूबी दर्शाया।

पाकिस्तान के टेनिस दिग्गज एसाम-उल-हक़ क़ुरैशी (Aisam-ul-Haq Qureshi) का मानना है कि साल 2010 में रोहन बोपन्ना (Rohan Bopanna) के साथ यूएस ओपन (US Open) के फाइनल में पहुँचना बहुत ख़ास रहा था। वह साल इस जोड़ी के लिए बहुत अहम रहा और उन्होंने विंबलडन के क्वार्टर-फाइनल और न्यूयॉर्क में हुए यूएस ओपन ग्रैंड स्लैम के फाइनल में कदम रखे थे।

पूरव राजा (Purav Raja) के साथ हुई इन्स्टाग्राम चैट में एसाम-उल-हक़ क़ुरैशी ने कहा “यूएस फाइनल मेरे लिए ज़िन्दगी बदल देने वाला पल था। यह कुछ ऐसा था जिसके लिए मैंने हमेशा से प्रयत्न किए हैं और विश्वास था है कि हम यह कर सकते हैं। यह एल अलग अनुभव था, और इसे अपने सबसे अच्छे दोस्त रोहन बोपन्ना के साथ अनुभव करने में बात ही अलग है। 

उन्होंने आगे बात करते हुए कहा “फाइनल ने मेरी ज़िंदगी बदल दी। ना सिर्फ़ टेनिस कोर्ट पर बल्कि उसके बाहर भी। मैं रोहन का भी धन्यवाद करता हूं कि इसे हासिल करने में उन्होंने साथ दिया। सही में यह ऐसे पल थे जिन्हें मैं भूल नहीं सकता।”

इंडो-पाक एक्सप्रेस के नाम से मशहूर इस जोड़ी ने एटीपी सर्किट पर सफलता हासिल करने के साथ-साथ भारत और पाकिस्तान की मित्रता के भी संदेश दिए थे। दोनों मुल्कों के बीच एक गहरा इतिहास रहा है और सब कुछ भूल कर यह दोनों टेनिस खिलाड़ी कोर्ट पर एक दूसरे का साथ देते थे और एक ही मकसद के साथ उतरते थे और वह थी जीत।

कोर्ट की सीमाओं के बाहर भी थी दोस्ती

जूनियर सर्किट के दिनों से ही यह दोनों खिलाड़ी एक दूसरे को जानने लग गए थे। डेनवर, यूएसए में हुए चैलेंजर टूर्नामेंट 2003 (Challenger tournament 2003) यह जोड़ी पहली बार एक साथ कोर्ट पर उतरी और ख़ास तो तब बन गई जब इन्होंने ख़िताबी जीत अपने नाम की।

सफलता तो मिल गई लेकिन दोनों खिलाड़ियों की रैंकिंग में काफी फर्क था और इसके चलते दोनों का ध्यान सिंगल्स टेनिस की ओर जाने लगा। इसके बाद यह जोड़ी 3 साल के लिए अलग हो गई और फिर 2007 में बोपन्ना और एसाम-उल-हक़ क़ुरैशी एक साथ कोर्ट पर पसीना बहाते हुए दिखे।

दोनों खिलाड़ियों के खेलने का ज़ायका अलग था, जहां भारतीय टेनिस स्टार रोहन बोपन्ना आक्रामक खेल और ताकतवर शॉट्स के लिए जाने जाते वहीं पाकिस्तान के एसाम-उल-हक़ क़ुरैशी सटीक सर्व और अपने वॉली गेम के लिए मशहूर थे। धीरे-धीरे इस इंडो-एक्सप्रेस ने लोगो के दिलो में घर करना शुरू कर दिया था और सब के चहेते बनते जा रहे थे।

स्पोर्ट्सकीड़ा से बात करते हुए बोपन्ना ने कहा था “हमारी जोड़ी की सबसे बड़ी बात यह थी कि हमने कभी पीछे मुड़कर नहीं सोचा कि हमारे देशों के बीच क्या हालात हैं। मेरे ख्याल में यह वह कोर्ट में भी दिखाई दिया और हम टेनिस के अलावा कुछ और नहीं सोचते थे और कोशिश होती थी कि कुछ बच्चों की प्ररणा भी बन सके। एक दम से दो देश एक ही टीम का साथ दे रहे थे और यह एक सकारात्मक बात है।”

दोनों खिलाड़ियों ने ‘स्टॉप वॉर’ जैसे मुद्दों में भी भाग लिया और आर्थर ऐश ह्युमेनीटेरियन  अवार्ड ऑफ़ द ईयर (Arthur Ashe Humanitarian of the Year award) को भी जीता। ऐसाम उल हक कुरैशी ने यूएस ओपन 2010 के बाद अलफ़ाज़ साझा करते हुए कहा “स्पोर्ट्स बीच की दूरी मिटाकर लोगो को एक साथ लाने का काम करता है। मैंने हमेशा माना है कि खेल किसी भी धर्म, राजनैतिक अवस्था, जाति और पंथ की सीमाओं को हमेशा हटा देता है।

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