यूरोपियन ओपन का ख़िताब जीतने से चूक गए रोहन बोपन्ना

भारत के दिग्गज टेनिस स्टार रोहन बोपन्ना और उनके डच जोड़ीदार मातवे मिडेलकूप की जोड़ी को फ़ाइनल में दूसरी वरीयता हासिल जॉन पीयर्स और माइकल वीनस की जोड़ी ने मात दी।

लेखक सैयद हुसैन ·

रोहन बोपन्ना (Rohan Bopanna) से भारतवासियों को उम्मीद थी कि कोरोना वायरस (COVID-19) के ब्रेक के बाद शुरू हुई टेनिस प्रतियोगिता में वह ख़िताबी जीत हासिल करेंगे। लेकिन रविवार की रात यूरोपियन ओपन के मेंस डबल्स फ़ाइनल में बोपन्ना और उनके डच जोड़ीदार मातवे मिडेलकूप (Matwe Middelkoop) की जोड़ी हार गई।

एंटवर्प में हुई इस ख़िताबी भिड़ंत में 58 मिनट के अंदर ही भारतीय-डच जोड़ी को दूसरी वरीयता प्राप्त जॉन पीयर्स (John Peers) और माइकल वीनस (Michael Venus) की जोड़ी ने सीधे सेटों में 6-3, 6-4 से शिकस्त दे दी।

बड़ी उम्मीद

फ़ाइनल में पहुंचने से पहले बोपन्ना-मिडेलकूप ने चौथी और पांचवीं वरीयता हासिल जोड़ियों को भी शिकस्त दी थी, जिसके बाद इस जोड़ी से बेल्जियम में खेली गई ATP 250 चैंपियनशिप में उम्मीद बढ़ गई थी। लेकिन पीयर्स-वीनस की जोड़ी ने जिस अंदाज़ में शुरुआत की और भारतीय-डच जोड़ी पर दबाव डाला उससे ये जोड़ी बिखर सी गई थी।

इस जीत में ऑस्ट्रेलियाई-कीवी जोड़ी का प्रमुख हथियार उनकी तेज़ और ज़ोरदार सर्विस रही, अपनी सर्विस के दौरान उन्होंने केवल तीन प्वाइंट्स ही ड्रॉप किए।

वीनस और पीयर्स ने महज़ एक घंटे के अंदर मुक़ाबला अपने नाम करते हुए इस साल अपना तीसरा ATP टूर ख़िताब जीत लिया।

हालांकि रनर-अप रहते हुए भी भारत के रोहन बोपन्ना इस चैंपियनशिप से काफ़ी सकारात्मक चीज़ें लेकर लौटेंगे, उन्होंने पहली बार मातवे मिडेलकूप के साथ जोड़ी बनाई थी और इन दोनों का तालमेल शानदार रहा।

इससे पहले रोहन बोपन्ना ने आख़िरी बार क़तर ओपन का ख़िताब जीता था, जो इस साल कोविड ब्रेक के पहले जनवरी में हुआ था। उस टूर्नामेंट में भी उनके जोड़ीदार एक और डच खिलाड़ी वेसली कूलहोफ़ (Wesley Koolhof) रहे थे।

उम्मीद है कि बोपन्ना का मनोबल इस प्रदर्शन के बाद बढ़ गया होगा और इसका असर आने वाले उनके टूर्नामेंट में देखने को मिलेगा।