बैडमिंटन

बैडमिंटन एशिया टीम चैंपियनशिप में भारत ने जीता कांस्य पदक

सेमीफाइनल में इंडोनेशिया से 2-3 से हारने के बाद भारतीय बैडमिंटन टीम ने अपने 2016 के प्रदर्शन को दोहराया

लेखक विवेक कुमार सिंह ·

भारतीय बैडमिंटन टीम ने इस मुक़ाबले में एड़ी-चोटी का जोर लगाया लेकिन वो गत विजेता इंडोनेशिया को हरा नहीं सके और बैडमिंटन एशिया टीम चैंपियनशिप के सेमीफाइनल में 2-3 से हार गए।

पेनल्टीमेट राउंड में जगह बनाने के कारण भारतीय टीम को कांस्य पदक मिला और इस तरह टीम ने तरह 2016 में अपने प्रदर्शन को दोहराया जहां वो सेमीफाइनल में इंडोनेशिया से ही हार गई थी।

अनुभवी शटलर किदांबी श्रीकांत (Kidambi Srikanth) और एचएस प्रणय (HS Prannoy) के इस टाई से बाहर बैठाने के बाद, ये मुक़ाबला युवा खिलाड़ियों पर छोड़ दिया गया और उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया।

एमआर अर्जुन (MR Arjun)और ध्रुव कपिला (*Dhruv Kapila)* की जोड़ी की जीत के बाद लक्ष्य सेन (*Lakshya Sen)* ने सुभांकर डे (*Subhankar Dey)* की तरह ही अपना सिंगल्स मुक़ाबला जीत लिया, लेकिन उससे पहले चिराग शेट्टी (*Chirag Shetty)* के साथ डबल्स में मिली हार और बी साई प्रणीत (B Sai Praneeth) की चोट ने टीम की रणनीति बिगाड़ दी।

मैच के बीच से ही बी साई प्रणीत को होना पड़ा बाहर

बैडमिंटन एशिया टीम चैम्पियनशिप के सेमीफाइनल की शुरुआत भारतीय बैडमिंटन टीम के लिए अच्छी नहीं रही, क्योंकि सिंगल्स में बी साई प्रणीत दुनिया के 5वें नंबर के खिलाड़ी के खिलाफ मैच के बीच से चोट के चलते बाहर हो गए। उस दौरान वो एंथोनी सिनिसुका गिंटिंग से पहला गेम 6-21 से हार चुके थे।

मैच की शुरूआत काफी रोमांचक रही जब दोनों खिलाड़ियों ने एक-दूसरे के ख़िलाफ़ कुछ शानदार शॉट लगाए लेकिन इंडोनेशियाई खिलाड़ी ने कई आसान अंक जीते और इस गेम में 11-4 से बढ़त बना ली।

ब्रेक के दौरान, बी साई प्रणीत को भारतीय बैडमिंटन कोच के साथ अपने हैमस्ट्रिंग को दबाते हुए देखा गया था। हालांकि, वो फिर से मुकाबले के लिए उतरे, उन्हें देखकर ये साफ पता चल रहा था कि वो खुळकर नहीं खेल पा रहे हैं, वो शॉट लगाने के लिए कूद भी नहीं पा रहे थे।

पहला गेम हारने के बाद शीर्ष क्रम के भारतीय बैडमिंटन स्टार ने अंपायर से बात की और एंथोनी सिनिसुका गिनटिंग के साथ हाथ मिलाया, जिसका मतलब था कि भारतीय टीम 1-0 से पिछड़ गई है।

बी साई प्रणीत के लिए करियर की पहली बड़ी उपलब्धि 2010 BWF वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतना था।

लक्ष्य सेन ने कराई वापसी

भारत ने अगले ही मैच में इंडोनेशिया के ख़िलाफ़ स्कोर बराबर कर लिया, जहां 18 वर्षीय लक्ष्य सेन ने चौंकाते हुए दुनिया के 7वें नंबर के खिलाड़ी और 2018 एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता, जोनातन क्रिस्टी को सीधे गेमों में 21-18, 22-20 से हरा दिया।

क्वार्टर फाइनल में थाईलैंड के ख़िलाफ़ एक रोमांचक जीत हासिल करने वाले भारतीय बैडमिंटन टीम के इस युवा खिलाड़ी ने पूरे मैच में खुद को शांत रखा और सटीक शॉट लगाए। उन्होंने अपने शॉट्स के लिए योजना बनाई और स्मैश या बार-बार ड्रॉप करने की कोशिश के बजाए उन्होंने इंडोनेशियाई खिलाड़ी के साथ चतुराई से मुक़ाबला किया।

पहला गेम जीतने के बाद, दूसरे गेम में लक्ष्य सेन ने कई अंक हासिल किए। भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी मैच को समाप्त करने के लिए उत्सुक थे और उसी प्रक्रिया में एक मैच प्वाइंट सहित दो अंक गंवा दिया।

19-20 के स्कोर पर जोनाथन क्रिस्टी ने जानबूझकर गेम को धीमा कर दिया, कभी अपने पसीने को पोंछने के लिए ब्रेक लिया, तो कभी कोर्ट को साफ करने के लिए कहा। उनकी इस रणनीति ने काम किया और उन्होंने एक अंक जीत लिया लेकिन बाद में अपनी सर्विस नियंत्रण नहीं रख सके और लक्ष्य सेन ने वापसी करते हुए अपनी दूसरे सिंगल्स मैच में जीत दिलाई।.

इसके बाद एमआर अर्जुन-ध्रुव कपिला की युवा जोड़ी ने दुनिया के दूसरे नंबर की इंडोनेशियाई जोड़ी से मुक़ाबला किया लेकिन वो मोहम्मद अहसान और हेंड्रा सेतियावान की जोड़ी से 10-21, 21-14, 21-23 से हार गए।

पहले गेम में हारने के बाद, दूसरे गेम में मोहम्मद अहसान और हेंड्रा सेतियावान ने बेहतरीन वापसी की और गेम अपने नाम कर लिया।

निर्णायक गेम ने ज्यादातर भारतीय बैडमिंटन जोड़ी को बढ़त लेते देखा गया लेकिन उन्‍होंने कई अप्रत्‍याशित गलतियां की जिससे इंडोनेशियाई खिलाड़ियों को वापसी करने का मौका मिल गया, बाद उन्होंने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए मैच अपने नाम कर लिया।

आखिरी के दो मुक़ाबले

सुभांकर डे ने दिन का दूसरा बड़ा उलटफेर किया, जब उन्होंने शेसर हिरेन रुस्तावितो को 21-17, 21-15 से मात दी।

आपको बता दें कि सुभांकर डे, किदांबी श्रीकांत की जगह बैडमिंटन एशिया टीम चैंपियनशिप में अपना पहला मैच खेल रहे थे, वो पूरी तरह से मैच में हावी थे, और अपने प्रतिद्वंदी वापसी करने का मौका तक नहीं दिया।

सुभांकर डे ने स्मैश करने के लिए बाएं और दाएं जाकर अपने रिफ्लेक्शन का सही इस्तेमाल रहे थे और दो गेमों में शेसर हिरेन रुस्तावितो को चौकाते हुए 49 मिनट में ही जीत हासिल कर ली।

अंतिम टाई में लक्ष्य सेन-चिराग शेट्टी की जोड़ी को मार्कस फर्नाडी गिडिओन और केविन संजया सुकामुलजो ने 6-21, 13-21 से हराया।

इस मुक़ाबले में चिराग शेट्टी डबल्स के विशेषज्ञ खिलाड़ी थे, फिर भी उन्हें लगातार अपने छोटे सहयोगी के निर्देशों का पालन करते हुए देखा गया, जो दिन का अपना दूसरा मैच खेल रहे थे।

हालांकि, शीर्ष क्रम के पुरुष डबल्स जोड़ी के खिलाफ दो युवाओं का खेलना किसी जोखिम से कम नहीं था और मैच पूरी तरह से उम्मीद के मुताबिक रहा। इंडोनेशियाई जोड़ी इस मैच में ज्यादा तालमेल के साथ खेल रही थी, क्योंकि वो लंबे समय तक एक दूसरे के साथ खेले हैं लेकिन भारतीय बैडमिंटन टीम की इस जोड़ी ने एक भी मैच साथ में नहीं खेला था।

हालांकि भारतीय बैडमिंटन टीम ने एशिया टीम चैम्पियनशिप में प्रदर्शन की बदौलत कांस्य पदक लेकर घर लौटेगी।