भारतीय खेल मंत्रालय ने SAI फ़ैसिलिटीज़ का नाम भारतीय सितारों पर रखने का फ़ैसला किया

ये निर्णय भारतीय खेल नायकों को सम्मानित करने के लिए किया गया है, ताकि भविष्य के सितारे इससे प्रेरित हो सकें।

लेखक सैयद हुसैन ·

रविवार को भारतीय खेल मंत्रालय ने इस बात पर मुहर लगाई कि अब स्पोर्ट्स ऑथिरिटी ऑफ़ इंडिया (SAI) की फ़ैसिलिटीज़ का नाम उन एथलीटों पर होगा जिन्होंने वैश्विक स्तर पर देश का नाम रोशन किया है।

सरकार की ये पहल उन भारतीय सितारों को सम्मानित करने के लिए उठाया गया एक क़दम है जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय तिरंगे का मान बढ़ाया है।

भारतीय खेल मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने कहा, “खेल सुविधाओं के नामकरण के बाद खेल में उनके योगदान को याद करते हुए, सरकार का खिलाड़ियों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करने का ये महज़ एक प्रयास है।“

हालांकि सरकार की ओर से अब तक ये नहीं बताया गया है कि किन खिलाड़ियों के ऊपर SAI की फ़ैसिलिटीज़ का नाम रखा जाएगा। पहले लेग में कई सुविधाएं शामिल हैं, जिनमें लखनऊ में स्थित नेशनल सेंटर ऑफ़ एक्सेलेंस (NCOE) में बना नया रेसलिंग हॉल और स्वीमिंग पूल शामिल है। इसके अलावा भोपाल के NCOE में स्थित 100 बेड का अस्पताल भी दिग्गज खिलाड़ियों के नाम पर किया जा सकता है।

वैश्विक स्तर पर ये एक बहुत ही आम चलन है जहां खेल सुविधाओं का नामकरण दिग्गज खिलाड़ियों के ऊपर किया जाता है और अब भारत में भी ये देखने को मिल रहा है।

देश में सबसे लोकप्रिय खेल होने के बावजूद क्रिकेट में अब तक कोई भी स्टेडियम एक भारतीय क्रिकेटर के नाम नहीं है। सुनील गावस्कर (Sunil Gavaskar), सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar), एमएस धोनी (MS Dhoni), विराट कोहली (Virat Kohli), वीरेन्द्र सहवाग (Virender Sehwag), राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) और कई दिग्गजों के नाम पर गेट, स्टैंड्स या पैवेलियन तो हैं लेकिन स्टेडियम का होना बाक़ी है।

ठीक यही हाल कुछ दिनों पहले तक फ़ुटबॉल का भी था लेकिन सिक्किम के नामची में आख़िरकार पिछले साल एक स्टेडियम का नाम दिग्गज भारतीय फ़ुटबॉलर बाईचुंग भूटिया (Bhaichung Bhutia) पर पड़ गया।

हालांकि हॉकी ने सबसे पहले इसकी शुरुआत की थी।

लखनऊ का केडी सिंह बाबू स्टेडियम और ग्वालियर का कैप्टेन रूप सिंह स्टेडियम, ये दोनों ही हॉकी दिग्गजों के नाम पर है। नई दिल्ली में स्थित नेशनल हॉकी स्टेडियम भी जादूगर मेजर ध्यान चंद (Dhyan Chand) के नाम पर 2002 में बनाया गया था।