बेहद दिलचस्प है ओलंपिक मेडल विजेता साक्षी मलिक से जुड़ी यह बातें

हालातों से लड़ने के बाद, भारत के लिए ओलंपिक गेम्स में लड़ीं साक्षी मलिक

लेखक जतिन ऋषि राज ·

इस समय दुनिया भर के पहलवान वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप की तैयारी में जुटे हुए हैं। इस चैंपियनशिप में भारत की तरफ से 2016 रियो ओलंपिक की ब्रॉन्ज़ मेडल विजेता साक्षी मलिक भी बाकी पहलवानों की तरह ज़ोर-आज़माइश करती हुई दिखाई देंगी। रियो ओलंपिक 2016 में ब्रॉन्ज़ मेडल के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स में 2 मेडल और एशियन गेम्स में 3 ब्रॉन्ज़ मेडल जीत चुकी साक्षी से भारत को काफी उम्मीदें हैं। ऐसे में उनसे जुड़ी बातों को जानना बेहद ही दिलचस्प हो जाता है।

परिवार से मिली “पॉवर”

साक्षी के पिता सुखबीर मलिक, दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन में बस कंडक्टर थे और मां रोहतक में एक हेल्थ क्लिनिक में काम करती थीं। आर्थिक स्थिति कमज़ोर होने के बावजूद, साक्षी को घर परिवार से प्रोत्साहन मिलता रहा और नतीजा हम सबके सामने है। 12 साल की उम्र से ही साक्षी पेशेवर रेसलिंग सीखने लगी और तभी से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

हरियाणा का रोहतक, एक ऐसा ज़िला है जहां लड़कियों को ज़्यादा प्रोत्साहित नहीं किया जाता। लेकिन इसके विपरीत, साक्षी के माता-पिता ने पनि बेटी की क्षमता को परखा और उनको रेसलिंग सीखने की सलाह दी। कहते है न, कि गुरु जितना ख़ास, शिष्य उतना ही बलवान। ऐसी ही कुछ साक्षी और उनके कोच ईश्वर सिंह दहिया की कहानी है। ईश्वर सिंह ने साक्षी को एक बड़ा रेसलर बनाने के लिए सारी हदें पार कर दी। उन्होंने साक्षी की ट्रेनिंग देसी अखाड़े में शुरू कर दी जहां सारे लड़के पहलवानी करते थे। कोच का मानना था कि साक्षी को हर वह सख्त चीज़ अपनानी होगी जो उन्हें सबसे बेहतर पहलवान बना सके और इसका नतीजा आज हम सभी के सामने है। आज साक्षी मलिक जब मैट पर उतरतीं हैं तो अपनी पहलवानी से वह दुनिया का मन मोह लेती हैं और अपने प्रदर्शन से आलोचकों को जवाब भी देती हैं।

ट्रेनिंग और खान-पान पर ख़ास ध्यान

हुनर तब तक किसी काम का नहीं जब तक खिलाड़ी उस पर कड़ी मेहनत न करे। 27 वर्षीय साक्षी इस बात से बिलकुल वाकिफ हैं और अपने हुनर को बढ़ाने का अभ्यास रोज़ करती हैं। साक्षी और अभ्यास यह दो लफ्ज़ हमेशा एक साथ लिए जाते हैं। अपने व्यायाम में साक्षी कम से कम 500 दंड बैठक करती हैं। कहते है ना कि प्रतिद्वंदी को उन हज़ारों मूव से खतरा नहीं है जिनका आपने एक बार अभ्यास किया है, बल्कि उस एक मूव से खतरा है जिनका आपने हज़ार बार अभ्यास किया है। साक्षी का भी अभ्यास कार्य कुछ ऐसा ही है, वह मैट पर घंटो अभ्यास करती हैं और अपनी शक्ति को बढ़ाती हैं। एक पहलवान को अभ्यास के साथ-साथ अपने आहार का भी ध्यान रखना पड़ता है। साक्षी रोज़ाना की ज़िन्दगी में दूध, बादाम, सोया जैसी चीज़ों का सेवन करती हैं ताकि शारीरक रूप से तंदरुस्त रह सके।

पहलवान पर आया दिल

साक्षी मालिक के जीवन साथी, सत्यव्रत कादियान हैं, और वे भी एक रेसलर हैं। कादियान अलग-अलग मंच पर भारत को सम्मान दिलाते रहे हैं। 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर और 2016 कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में गोल्ड हासिल करके अपनी क़ाबलियत का प्रमाण वह पहले ही दे चुके हैं। खेल सिर्फ प्रशंसको को नहीं बल्कि खिलाड़ियों को भी साथ लाता है। साक्षी और सत्यव्रत के बीच प्यार की शुरुआत भी रेसलिंग की वजह से ही हुई। रोहतक, हरियाणा के रहने वाले यह दोनों पहलवान शादी के बंधन में बंधते हुए बेहद सफल जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

साक्षी मलिक: 2014 कॉमन वेल्थ गोल्ड मेडल दिखाते हुए 

लंबी है सफलता की फेहरित

हर खिलाड़ी के लिए जीतना अहम होता है। हर खिलाड़ी की चाह होती है कि उसका नाम देश के सभी धुरंधरों के साथ लिया जाए। साक्षी का यह सपना भी सच हुआ जब उन्होंने रियो ओलंपिक 2016 में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता। रियो ओलंपिक की जीत के बाद साक्षी का नाम उन चुनिंदा भारतीय महिला खिलाड़ियों की लिस्ट में दर्ज हो गया जिन्होंने ओलंपिक गेम्स में भारत को मेडल जितवाएं हैं। इस लिस्ट में कर्णम मल्लेश्वरी, मैरी कॉम, साइना नेहवाल और पीवी सिन्धु जैसे दिग्गजों के नाम शामिल हैं।

साक्षी ओलंपिक खेलों में मेडल जीतने वाली पहली और इकलौती भारतीय महिला रेसलर हैं। अब साक्षी की नज़रें वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप पर होंगी जहां वह 58 किग्रो वर्ग में लड़ती नज़र आएंगी। यह चैंपियनशिप कज़ाकिस्तान की राजधानी नूर-सुलतान में आयोजित की जाएगी। इस चैंपियनशिप के हर वर्ग के टॉप 6 खिलाड़ियों को ओलंपिक 2020 में प्रदर्शन करने का मौका मिलेगा। साक्षी की भी नज़र होगी कि वह ओलंपिक गेम्स 2020 में क्वालीफाई कर देश के सम्मान में चार-चांद लगा दें।

events

14 - 23 Sep 2019

UWW World Championships - Nur-Sultan

Kazakhstan