भारतीय शूटर समरेश जंग और उनके परिवार ने जीती कोरोना के ख़िलाफ़ जंग

7 बार के कॉमनवेल्थ गेम्स चैंपियन समरेश जंग ने कोरोना वायरस को मात दी और कहा कि इसमें घबराएं नहीं और एहतियात बरतें।

एक खिलाड़ी अपने करियर में बहुत सी चीज़ों से लड़ता है और हर रोज़ कुछ नया करने की ठान कर जीत की ओर चल पड़ता है। इस समय दुनिया की सबसे बड़ी मुसीबत के आगे अपना दम दिखाने वाले भारतीय शूटर समरेश जंग (Samaresh Jung) दृढ़ संकल्प और सकारात्मकता के प्रतीक बनें जब उन्होंने कोरोना वायरस (COVID-19) जैसी खतरनाक बीमारी को मात दी।

कॉमनवेल्थ में 7 बार गोल्ड मेडल जीतने वाले समरेश जंग समेत परिवार के 5 और सदस्यों को कोरोना पॉज़िटिव घोषित किया गया। हालांकि इस जंग में समरेश जंग और उनके परवार ने हार नहीं मानी और सरकार के दिशा निर्देशों को सिर आँखों पर रखते हुए खुद को सेल्फ आइसोलेशन में डाल लिया और अब 22 जून को उन्हें अथॉरिटी द्वारा कोरोना मुक्त करार कर दिया ग
या है।

इस गंभीर बीमारी को मात देने के बाद यह भारतीय शूटर इस बीमारी से लड़ने में बाकी लोगों की मदद करने को तैयार हैं।
पीटीआई से बात करते हुए समरेश ने कहा “इस बीमारी में कुछ करने और कुछ न करने की सलाह देना चाहता हूं। जिन्हें मैं जानता हूं और अपनी बात रख सकता हूं तो मैं ऐसा ज़रूर करूंगा।”

घबराने की नहीं है ज़रूरत

50 वर्षीय इस भारतीय ने कोरोना वायरस को ज़िंदगी की एक अलग की तकलीफ बताते हुए कहा “जो लोग कोरोना वायरस से पीड़ित हैं उन्हें घबराना नहीं चाहिए लेकिन हम इसे हलके में भी नहीं ले सकते।”

2002 के अर्जुन अवार्ड विजेता का मानना है कि हम सभी को एहतियात बरतनी चाहिए और ध्यान देना चाहिए कि यह इन्फेक्शन हम तक न पहुंचे।

सकारात्मक सोच ही है मर्ज़ की दवा

भारतीय शूटर समरेश जंग ने सकारात्मक सोच रखने की सीख दी और उनका मानना है कि पॉज़िटिव माइंडसेट ही इस महामारी का चुस्त इलाज है।

उन्होंने बातचीत को आगे बढ़ाते हुए कहा “मैंने खुद को हर नकारात्मक व्हाट्सएप्प (Whatsapp) मेसेज और टीवी (TV) की ख़बरों से दूर रखा। हालांकि कुछ मुश्किल दिन भी आए लेकिन मैंने हमेशा खुद को सकारात्मक रखा।”

इस महामारी से लड़ते हुए शूटर के परिवार के 4 लोगों ने तो घर में ही समय बिताया और दो सदस्य ऐसे भी थे जिन्होंने ख़ास जगह जाकर आइसोलेशन किया। “हमारे पास ज़्यादा कमरे और गुसलखाने हैं और इस वजह से इस सुविधा को हम व्यक्तिगत तौर पर इस्तेमाल में ले पाए।”

यारों दोस्ती बड़ी ही हसीन है

समरेश जंग की यह जंग आसान नहीं थी लेकिन उनके रिश्तेदारों और दोस्तों ने इस जर्नी को भी आसान बनाने की पूरी कोशिश की।

“यह आसान नहीं था, हमारे घर के पास कुछ दोस्त रहते हैं जो हमे दवाइयाँ और ग्रोसरी दे जाते थे।”

समरेश जंग के परिवार को CISF के डॉक्टरों का भी साथ मिला और साथ ही कुछ घरेलू चिकित्सकों ने भी भरपूर योगदान दिया।

क्या आपको यह आर्टिकल पसंद आया? इसे अपने दोस्तों के साथ साझा करें!