सानिया मिर्ज़ा को नहीं मिल रहा कोई पार्टनर, अभ्यास पर भी लगा विराम

सानिया मिर्ज़ा के नेतृत्व में पहली बार भारतीय टीम ने फ़ेड कप के प्ले-ऑफ़्स का सफ़र तय किया, लेकिन अब कोरोना वायरस की मार हर खेल पर पड़ रही है

लेखक सैयद हुसैन ·

भारतीय टेनिस दिग्गज सानिया मिर्ज़ा (Sania Mirza) इस समय सेल्फ-आइसोलेशन पर हैं, और उन्हें अभ्यास करने के लिए भी कोई साथी नहीं मिल पा रहा है।

कोरोना वायरस (COVID-19) के बढ़ते प्रकोप की वजह से पूरी दुनिया में अलग अलग खेल इवेंट्स पर असर पड़ रहा है। इस महामारी को बढ़ने से रोकने के लिए विश्व के कई देशों में इस समय लॉकडाउन जारी है।

स्पोर्ट्सस्टार के साथ बातचीत करते हुए सानिया मिर्ज़ा ने कहा, ‘’मुझे अभ्यास करने के लिए एक साथी की ज़रूरत है, और लॉकडाउन की वजह से कोई भी उपलब्ध नहीं है।‘’

‘’मैं अगर टेनिस कोर्ट (घर के क़रीब में ही है कोर्ट) पर जाती भी हूं तो शाम में मेरे बेटे इज़हान के साथ।‘’

भारतीय टेनिस स्टार ने इससे पहले ये भी कहा था कि उन्हें अपने खेल में कई चीज़ों को दुरुस्त करने की भी ज़रूरत है, लेकिन वह फ़िलहाल प्रैक्टिस नहीं कर पा रहीं हैं।

फ़ेड कप की शानदार क़ामयाबी

खेल प्रतियोगिताएं रद्द होने और कई देशों में लॉकडाउन लगने से ठीक पहले, भारतीय महिला टीम ने फ़ेड कप के प्ले-ऑफ़्स में पहुंचते हुए इतिहास रच दिया था।

उस प्रतियोगिता में सानिया मिर्ज़ा ने लगातार भारतीय टीम का नेतृत्व किया था और ज़रूरी सलाह दी थी। इंडोनेशिया के ख़िलाफ़ करो या मरो के मुक़ाबले में युवा अंकिता रैना (Ankita Raina) के साथ मिलकर दिग्गज सानिया मिर्ज़ा ने भारत को जीत दिलाई थी। भारतीय जोड़ी ने वह मुक़ाबला 7(7)-6(4), 6-0 से जीतते हुए अगले दौर में जगह बनाई थी।

सानिया मिर्ज़ा ने उन लम्हों को याद करते हुए कहा, ‘’मुझे बहुत ख़ुशी है कि मेरे नेतृत्व में भारतीय टीम ने फ़ेड कप वर्ल्ड ग्रुप में जगह बना पाई, जो इससे पहले हमने कभी नहीं किया था।‘’

‘’मैं बहुत उत्साहित थी, ये मेरे करियर के एक बेहतरीन उपलब्धियों में से एक है। अगर मैं कभी दोबारा टेनिस नहीं भी खेलती हूं तो ये एक ऐसा पल है जिसे मैं लंबे अर्से तक याद कर सकती हूं।‘’

हालांकि 33 वर्षीय इस खिलाड़ी के लिए वर्ल्ड नंबर-1 बनना इससे कहीं बड़ी उपलब्धियों में से एक था, जो उन्होंने अपने करियर में हासिल किया था।

12 अप्रैल 2015 को उन्होंने मार्टिना हिंगिस (Martina Hingis) के साथ मिलकर WTA फ़ैमिली सर्किल में लगातार तीसरा ख़िताब जीता था, और इसी के बाद सानिया मिर्ज़ा दुनिया की नंबर-1 महिला युगल खिलाड़ी बन गईं थीं। भारत की ओर से ये मुक़ाम हासिल करने वाली वह पहली महिला टेनिस खिलाड़ी हैं।

उन यादों के बारे में सानिया मिर्ज़ा ने कहा, ‘’नंबर-1 बनना कुछ ऐसा है, जिसे पाने का सपना हरेक खिलाड़ी देखता है। और इतना ही नहीं मैंने इस स्थान को दो सालों तक अपने पास रखा, जो इससे पहले किसी भी भारतीय खिलाड़ी ने नहीं किया था। ये एक ऐसी चीज़ है जिसपर मुझे गर्व है।‘’

सानिया मिर्ज़ा ने लॉकडाउन की इस मुश्किल घड़ी में ज़रूरतमंदों की मदद के लिए भी हाथ आगे बढ़ाए हैं।