टोक्यो 2020 में रोहन बोपन्ना के साथ जोड़ी बनाना चाहती हैं सानिया मिर्ज़ा

सानिया/बोपन्ना की जोड़ी रियो ओलंपिक गेम्स में ब्रॉन्ज़ जीतने के बेहद करीब थी 

लेखक जतिन ऋषि राज ·

सानिया मिर्ज़ा एक ऐसा नाम है जिससे हर भारतीय खेल प्रेमी अवगत है। भारतीय टेनिस की सर्वप्रिय खिलाड़ी सानिया मिर्ज़ा ने कोर्ट पर बहुत सी शौहरत हासिल की है और बड़े से बड़े प्रतिद्वंदी को घुटने टेकने पर मजबूर भी किया किया है। हालांकि उनकी झोली आज भी ओलंपिक मेडल से वंचित है, लेकिन उनके करियर का यह सूखा आने वाले ओलंपिक गेम्स की मदद से हट सकता है। 2016 रियो ओलंपिक गेम्स में सानिया की जोड़ी बनी थी भारतीय दिग्गज रोहन बोपन्ना के साथ और यह काफी हद तक सफल भी हुई। यह जोड़ी मेडल पर अपने नाम की मुहर तो न लगा सकीब्रॉन्ज़की चमक को मानो इन्होंने छू ही लिया था।

रियो ओलंपिक गेम्स में सानिया और बोपन्ना का ब्रॉन्ज़ मेडल मैच हुआ चेक रिपब्लिक के लुसी ह्रादेका के रादेक स्तेपानेक के साथ। इस बहुत ही दिलचस्प मुकाबले में भारतीय जोड़ी को हार का सामना करना पड़ा लेकिन इस 2 सेटर मुकाबले ने मिर्ज़ा और बोपन्ना को आने वाले समय के लिए बहुत सी उम्मीदें और अपने खेल के स्तर को बढ़ाने के कारण दे दिए थे।

अक्टूबर 2017 में WTA चाइना ओपन के दौरान घुटने में लगी चोट के कारण मिर्ज़ा को कोर्ट से कुछ समय के लिए दूरी बनानी पड़ी। इस बीच मिर्ज़ा और उनके पति शोएब मलिक के घर खुशियों की शहनाई बजी और अब यह जोड़ा एक नन्हें से बच्चे का माता-पिता बन चुका है। टोक्यो 2020 से पहले मिर्ज़ा ने एक बार फिर अपने पुराने साथी रोहन बोपन्ना के साथ जोड़ी बनाने की इच्छा जताई है। अगर ऐसा होता है तो 2020 ओलंपिक गेम्स में यह जोड़ी एक बार फिर भारत की अगुवाई करते हुए दिख सकती है और साथ ही अपने पुराने अनुभव का प्रयोग करते हुए इस बार मेडल पर अपने नाम की मुहर लगा सकती है।

हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए मिर्ज़ा ने बताया “टोक्यो ओलंपिक गेम्स मेरे ज़हन में है लेकिन सिर्फ इसी पर मेरा विशेष ध्यान नहीं है। पहला फोकस मेरा पूरी तरह से स्वस्थ होने पर है। अगर मैं खुद को ऐसी स्थिति में झोंक दूं कि मैं फिर एक बार ओलंपिक खेलों में प्रतिस्पर्धा कर पाऊं तो मुझे खुद पर गर्व होगा।”

उन्होंने आगे बताया “पिछली बार मेडल के करीब आकर उसे हासिल न कर पाना काफी अफ़सोसनाक रहा। अगर मैं और बोपन्ना खुद को ऐसी स्थिति में डाल लेते है जहां हम प्रतिस्पर्धा कर मेडल को जीत पाएं तो यह बहुत ख़ुशी की बात होगी।”

फिटनेस पर ध्यान

टेनिस एक ऐसा खेल है जहां एक खिलाड़ी को अपनी शारीरिक फिटनेस पर बहुत ज़्यादा ध्यान देना होता है और ऐसे में गर्भावस्था के बाद मिर्ज़ा के लिए दोबारा कोर्ट पर उसी ऊर्जा के साथ उतरना मुश्किल होगा। उन्होंने बताया कि वे कैसे एक समय पर किसी एक अध्याय पर ध्यान दे रही हैं और खुद को खेल के लिए कैसे तैयार कर रहीं है। उन्होंने कहा “डिलीवरी के अगले दिन ही मैंने फैसला किया था कि मुझे 23 किग्रा वज़न घटाना है। मेरे लिए स्वस्थ रहना ज़्यादा ज़रूरी था, और मैंने 4 महीने में 26 किग्रा वज़न भी घटाया।“

मिर्ज़ा ने आगे कहा “मैं पहले ऐसा कर चुकीं हूं, और मेरा शरीर अब दोबारा वैसा हो गया है जैसा कि पहले हुआ करता था “मज़बूत दुबला”। फिर मैंने सोचा कि अब कोर्ट पर उतरना सही है। पहले मैं हफ्ते में एक बार अभ्यास करती थी फिर हफ्ते में दो बार और फिर मुझे दोबारा मज़ा आने लगा। मुझे एहसास हुआ कि मेरा शरीर मेरी उम्मीद से ज़्यादा तंदरुस्त हो गया है और तब मुझे वापसी करने की प्रेरणा मिली।“ 

ऑस्ट्रेलियन ओपन पर नज़र

छह बार की ग्रैंड स्लैम चैंपियन 11 जनवरी से WTA होबार्ट इंटरनेशनल में खेलती दिख सकती हैं। इसके कुछ ही समय बाद ऑस्ट्रेलियन ओपन शुरू होगा और होबार्ट इंटरनेशनल में खेलना मिर्ज़ा के अभ्यास के लिए सही मौका होगा। ऑस्ट्रेलियन ओपन में भारत की सानिया मिर्ज़ा वूमेंस डबल्स में यूक्रेन की नाडिया किचेनोक के साथ जोड़ी बनाएंगी और मिक्स्ड डबल्स में यूएसए के राजीव राम के साथ कोर्ट पर कब्ज़ा करने उतरेंगी।