सानिया मिर्ज़ा टोक्यो ओलंपिक में रियो की हार को भुलाने के लिए बेक़रार हैं

सानिया मिर्ज़ा और मिक्सड डबल्स के उनके साथी रोहन बोपन्ना 2016 में रियो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने से चूक गए थे।

भारतीय टेनिस स्टार सानिया मिर्जा (Sania Mirza) अगले साल टोक्यो ओलंपिक को रियो 2016 के हार को भुलाने के अवसर के रूप में देख रही हैं।

तीन बार की भारतीय ओलंपियन अपने पिछले खेलों में पदक जीतने से चूक गई थीं, जहां रोहन बोपन्ना (Rohan Bopanna) के साथ उन्होंने मिक्सड डबल्स के सेमीफाइनल में जगह बनाई थी, लेकिन कांस्य पदक मैच में हार गए। ये वो परिणाम है जिसने उन्हें सबसे ज्यादा परेशान किया है।

उन्होंने हाल ही में Airbnb प्लेटफॉर्म पर एक इंटरेक्टिव सेशन के दौरान कहा कि, "रियो ओलंपिक में हारना मेरी जिंदगी के सबसे दिल तोड़ने वाले पलों में से एक था, मैंने नहीं सोचा था कि मैं एक और ओलंपिक खेलूंगी।"

सानिया मिर्ज़ा ने ओलंपियन और पैरालिंपियन ऑनलाइन एक्सपिरियंस इवेंट के समर फेस्टिवल के वर्चुअल सेशन को होस्ट किया। ये अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC), अंतरराष्ट्रीय पैरालंपिक समिति (IPC) और वर्ल्डवाइड ओलंपिक पार्टनर Airbnb द्वारा आयोजित किया गया था।

पांच दिवसीय ऑनलाइन कार्यक्रम में 100 से अधिक ओलंपिक और पैरालिंपियन दर्शकों के लिए अपने अनुभवों को साझा करते हैं। इसमें अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra) और शिवा केशवन (Shiva Keshavan) के सत्र शामिल हैं

सानिया मिर्ज़ा के भाग का शीर्षक ‘Grand Slam inspired training regime with Sania’ था, जबकि अभिनव बिंद्रा का सत्र साथी ओलंपिक चैंपियन निकोलो कैंप्रियानी (Niccolo Campriani) के साथ था।

सानिया मिर्ज़ा – कभी हार न मानने वाली खिलाड़ी

33 वर्षीय मिर्जा ने 2018 से शुरू होने वाले मातृत्व अवकाश पर थीं और इस साल की शुरुआत में उन्होंने कोर्ट पर वापसी की। उनका मानना है कि टोक्यो ओलंपिक को एक साल के लिए टाल दिया जाना उनके सपने को पूरा करने का एक अवसर देता है।

"निश्चित रूप से एक-डेढ़ साल बहुत लंबा होता है, खासकर एक एथलीट के जीवन में और हम बढ़ती उम्र को रोक नहीं सकते हैं। लेकिन, मुझे लगता है कि ये (2021 में होने वाला ओलंपिक) मुझे एक पदक जीतने का मौका देता है। मैं अगले साल 34 साल की हो जाऊंगी, लेकिन ईमानदारी से एक और कोशिश की उम्मीद करूंगी।''

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पिछले कुछ वर्षों में सानिया मिर्ज़ा ने अपने आलोचकों को बार-बार गलत साबित किया है और उनका मानना है कि ये रवैया अपनाए रखने से टेनिस में आगे बढ़ने में मदद करता रहेगा।

“मैं एक बाग़ी की तरह हूं। अगर आप कहते हैं, मैं ये या वो नहीं कर सकती, तो मैं ऐसा करने के लिए दृढ़ निश्चय कर लेती हूं। मैं हमेशा ये मानती थी कि मैं जो कुछ भी करती हूं उसमें सर्वश्रेष्ठ दे सकूं। यह अति आत्मविश्वास नहीं बल्कि आत्म-विश्वास है।”

एक बच्चे की मां हो चुकी सानिया मिर्ज़ा ने बताया कि गर्भावस्था से शारीरिक परिवर्तनों के बाद खेल में वापस आने के लिए उन्हें क्या करना पड़ा।

सानिया मिर्ज़ा ने कहा कि, “एक बेटे (इज़हान) के बाद चार महीने में 26 किलो वजन कम करना एक अलग तरह की चुनौती थी और मैंने इसे पूरी जिद के साथ निभाया। इसने मुझे मानसिक रूप से मजबूत होने में मदद की।”

अपनी वापसी के बाद सानिया मिर्ज़ा ने जनवरी में होबार्ट इंटरनेशनल WTA युगल खिताब जीता

उन्होंने इसे अपने करियर की सबसे विशेष जीत में से एक बताते हुए कहा, “इस जीत ने मेरे साथ कई लोगों को भी आश्चर्यचकित कर दिया। इससे ये सुनिश्चित हो गया कि मैं फिर से प्रतिस्पर्धी सर्किट में होने वाले संघर्ष के लिए तैयार हूं।”

''मुझे एक माँ, पत्नी, बेटी, टेनिस खिलाड़ी होने के साथ बहुत सी भूमिकाएँ निभानी थीं। मुझे शारीरिक प्रतिकूलता से उबरना पड़ा और मानसिक रूप से भी शांत रहना पड़ा।’’ - सानिया मिर्ज़ा।

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