‘ओलंपिक वे ऑफ़ लाइफ़’ से देश के युवाओं का मार्गदर्शन करना चाहते हैं शिवा केशवन

6 बार के विंटर ओलंपियन शिवा केशवन अपने तजुर्बे को भारत की क्षमता को बढ़ाने में लगाना चाहते हैं।

भारत के महान ल्यूज (एक खेल) एथलीट शिवा केशवन (Shiva Keshavan) ने लगभग 20 सालों तक भारत का विंटर ओलंपिक गेम्स (Winter Olympic Games) में प्रतिनिधित्व किया। रिटायर होने के बाद भी यह एथलीट भारत और भारतवासियों के लिए कुछ बड़ा करना चाहता है।

मनाली में जन्मा यह एथलीट पहाड़ों पर बसे लोगों को ‘ओलंपिक वे ऑफ़ लाइफ’ द्वारा मार्गदर्शन देना चाहता है और उनकी ज़िंदगी को बदलना चाहता है। फर्स्टपोस्ट को दिए गए इंटरव्यू में शिवा केशवन ने कहा था “हिमालया में 50—60 मिलियन लोग रहते हैं और वह टूरिज़्म, डेवलपमेंट, हॉस्पिटैलिटी, साइंस एंड टेक्नोलॉजी से राज्यों को स्पोर्ट्स द्वारा फायदा दिला सकते हैं। यह कुछ ऐसा है जिसमें मैं अपनी ज़िंदगी तक झोंकने को तैयार हूं।”

शिवा ने आगे कहा “मैं ओलंपिक वे ऑफ़ लाइफ को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना चाहता हूं आप ओलंपिक की सोच को ही जानते हैं। मैं ओलंपिक के मैसेज को लोगों तक पहुंचना चाहता हूं।”

विंटर गेम्स में पहली बार जेरेमी बुकोव्स्की (Jeremy Bujakowski) ने एक भारतीय के रूप में 1964 में हिस्सा लिया था। उस समय के बाद से आज तक विंटर गेम्स में शिवा केशवन भारत के लिए सबसे लोकप्रिय एथलीट रहे हैं। 1998, 2002, 2006, 2010, 2014 और 2018 के संस्करणों में इस दिग्गज ने भारत का प्रतिनिधित्व किया, आपको जानकर हैरानी होगी कि दो संस्करणों में तो वह विंटर ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले एकमात्र भारतीय थे।

आने वाली पीढ़ी के लिए राह खोलने की तैयारी हालांकि एशियन ल्यूज चैंपियनशिप में 4 गोल्ड मेडल जीत चुके इस एथलीट के लिए उपलब्धियाँ हासिल करना आसान नहीं था। विंटर स्पोर्ट्स में बहुत मेहनत लगती है और भारत जैसे देश जहां इस खेल को इतनी प्रसिद्धी हासिल नहीं है, ऐसे में शिवा केशवन के लिए राह आसान नहीं थी। इस खेल में कड़ा अनुशासन और जबरदस्त तकनीक का पालन करना पड़ता है।

भारत में ल्यूज की न तो आधिकारिक संरचना है और न ही हर जगह इसकी ट्रेनिंग दी जाती है। कहते हैं न कि अगर दिल में जुनून हो तो राह खुद निकल आती है और भारतीय ल्यूजर ने भी अपने जुनून को नहीं छोड़ा और मुश्किल राह से निकल कर ओलंपिक तक का सफ़र तय कर ही लिया था।बातचीत के दौरान उन्होंने आगे कहा “मैं बीते समय का ज़्यादा नहीं सोचता। मैं यह सोचता हूं कि मैं  भविष्य की पीढ़ी के लिए क्या कर सकता हूंल्यूज में भारत की अगुवाई करने वाले पहले और एकमात्र खिलाड़ी ने कहा “मैंने संघर्ष किया है लेकिन मैं चाहता हूं कि आने वाले पीढ़ी के लिए चीज़ें आसान हों। मेरे ख्याल में भारत के पास विंटर सपोर्ट की अद्भुत क्षमता है। हम इसे समझने के लिए इससे जुड़ी परतों को नहीं हटा रहे हैं।”

देश के लिए प्यार का मतलब क्या है यह केशवन ने तब बताया जब इटली की तरफ से मिले ऑफर को उन्होंने ठुकरा दिया था। इटली वह स्थल हैं जहां इनकी माँ ने जन्म लिया है। शिवा केशवन ने आगे बताया “मैंने कभी भी पैसे और फेम को नहीं ढूंढा है। मैं ट्रैक पर जिंदा महसूस करता हूं। मुझे लगता है कि मैं किसी आवेशपूर्ण चीज़ का हिस्सा हूं।

जब मुझे अपने देश के लिए खेलने का मौका मिला तो मैंने खुद को बड़ी चीज़ों के लिए झोंक दिया और सही मायनों में मैं खुद को खुशकिस्मत मानता हूं कि मुझे यह मौका मिला।”

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