स्वर्ण पदक जीतने का सपना और सचिन तेंदुलकर बनने की ख़्वाहिश, ये है भाई-बहन की रोमांचक कहानी

कैसे स्कूल के एक फैसले से आदिवासी भाई बहन श्रवण (Sravan Mandangi) और सोनी मंडंगी (Soni Mandangi) ने ओडिशा की गुमनाम जगह से राष्ट्रीय कैंप तक का सफर तय किया

लेखक ओलंपिक चैनल ·

भुवनेश्वर में बुधवार को 19 साल की सोनी मंडंगी ((Soni Mandangi)) ज्यादा कुछ तो नहीं कर सकती थी लेकिन वह उस पल की साक्षी बनीं जब उनके भाई श्रवण ने खेलो इंडिया के तीरंदाजी टीम इंवेट गोल्ड मेडल जीता। ये पल कुछ ऐसा ही था मानो ये मेडल श्रवण ने नहीं बल्कि सोनी ने जीता हो। ओडिशा के आदिवासी परिवार से आने वाले इन भाई बहन के लिए मेडल्स जीतने की केवल शुरुआत भर है।

इनकी उपलब्धि की शुरुआत तब से शुरू हुई जब इनके माता पिता ने  इन दोनों का दाखिला कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (Kalinga Institute of Social Sciences) में करवाया। कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (Kalinga Institute of Industrial Technology) आदिवासी छात्र- छात्राओं के लिए दुनिया के सबसे बड़े संस्थान में से एक है।

श्रवण मंदांगी ने खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स 2020 में अपने रिकर्व टीम इवेंट के लिए स्वर्ण पदक जीता। तस्वीर साभार: KIUG

श्रवण की बहन सोनी ने बताया कि “अगर हम अपने गांव की बात करें तो वहां न तो पढ़ने की कोई जगह थी और न ही खेलने की। जब हमारे पिता को पता चला कि यहां आदिवासी बच्चों के लिए स्कूल है तो उन्होंने हमारा दाखिला वहां करवा दिया”

इन दोनों की सफलता में स्कूल का भी महत्वपूर्ण योगदान है। स्कूल ने उन्हें फ्री शिक्षा, खाना और स्वास्थ्य सुविधा तो दी ही इसके साथ ही उन्हें खेल के उपकरण भी मुहैया करवाए। इसी बदौलत श्रवण और सोनी ने यहां तक का सफर तय किया और अपने सपने को सच करने के बारे में सोचा।

खेलों में आने के बाद कैसे बदली दुनिया

श्रवण ने गोल्ड मेडल जीतने के बाद बताया कि “मैं कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस में जब 7वीं क्लास में था तो मैंने तीरंदाजी में करियर बनाने का सोचा। हमारे पिता एक आदिवासी ( अब किसान) हैं। हमें जो भी सुविधा मिली, वह स्कूल के द्वारा मिली। हमारा स्कूल ही हमारा घर है, यहां तक की हम घर भी केवल साल में एक बार गर्मी की छुट्टियों में जाते हैं।”

खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में सफलता और अपना नाम कमाने के बाद श्रवण का अगला लक्ष्य तीरंदाजी में उपलब्धियां हासिल करना है। श्रवण ने कहा कि “मैं एकल के साथ साथ टीम इंवेट में भी हिस्सा लूंगा और उम्मीद करता हूं कि यहां से राष्ट्रीय खेलों तक का सफर तय कर करूंगा”

सचिन तेंदुलकर जैसा बनने की उम्मीद

आदिवासी परिवार से आने वाली भारत की एक रग्बी खिलाड़ी सोनी मंडंगी अपने खेल से हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रहीं हैं। KIIT की रग्बी टीम की तरफ से खेलने वाली सोनी ने पंजाब यूनिवर्सिटी के खिलाफ गुरुवार को हुए मुकाबलें में अपनी टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

सोनी मंदंगी को इस खेल ने तब आकर्षित किया गया, जब स्कूल में दाखिला लेने के कुछ साल बाद, 2007 में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले उनके संस्थान के छात्रों ने लंदन में इंटरनेशनल स्कूल रग्बी टूर्नामेंट (International School Rugby Tournament) जीता।

सोनी मंदंगी को उम्मीद है कि वह एक दिन सचिन तेंदुलकर जितनी सफलता हासिल करेंगी। तस्वीर साभार: KIUG

19 साल की ये खिलाड़ी भारत की जूनियर रग्बी टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इस खिलाड़ी को भी पता है कि उन्होंने जो खेल चुना है, वह देश में इतना लोकप्रिय नहीं है लेकिन इसके बावजूद उन्हें उम्मीद है कि वह भारत के महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) जितनी प्रसिद्धी हासिल कर लेंगी।

सोनी ने कहा कि “मेरा अंतिम सपना सचिन तेंदुलकर के रूप में प्रसिद्ध होना है। सच ये भी है कि भारत में रग्बी बहुत लोकप्रिय खेल नहीं है।  यह उड़ीसा में तो लोकप्रिय है लेकिन कुछ जिले अभी भी इस खेल से परिचित नहीं है”। इस खिलाड़ी ने बताया कि वह पूरे राज्य में खेल के प्रति जागरूकता लाना चाहती हूं।