स्टीफन कॉन्स्टेंटाइन ने कहा कि विदेशी खिलाड़ियों को कम करने से भारतीय स्ट्राइकरों को मिलेगा बढ़ावा

भारत के पूर्व फुटबॉल कोच को लगता है कि आईएसएल और आई-लीग में हिस्सा लेने वाले विदेशी खिलाड़ियों की वजह से देश का हुनर दब जाता है।

भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व हेड कोच स्टीफन कॉन्स्टेंटाइन (Stephen Constantine) का मानना है कि सुनील छेत्री (Sunil Chhetri) के रिटायर होने के बाद भारतीय फुटबॉल की प्रगति नहीं रुकेगी, लेकिन वह मानते हैं कि कुछ चुनौतियों का सामना जरूर करना होगा।

छेत्री अंतरराष्ट्रीय खेल में भारत के सबसे अधिक स्कोर करने वाले फुटबॉलर हैं और बाईचुंग भूटिया (Bhaichung Bhutia) युग के बाद बीते एक दशक में वह लोगों की प्रेरणा रहे हैं।

सुनील छेत्री दुनिया के दूसरे सबसे अधिक एक्टिव अंतरराष्ट्रीय गोल स्कोरर भी हैं, जो गोल करने के मामले में फिलहाल क्रिस्टियानो रोनाल्डो (Cristiano Ronaldo) और लियोनेल मेसी (Lionel Messi) जैसे अंतरराष्ट्रीय सुपरस्टार के बीच में काबिज़ हैं।

अब जब इस साल भारत के कप्तान 36 साल के हो जाएंगे तो भारतीय फुटबॉल प्रशंसकों के बीच इस बात पर संशय बना हुआ है कि अगली पीढ़ी का कोई भी खिलाड़ी छेत्री के पद को संभाल सकता है या नहीं।

कॉन्स्टेंटाइन ने आउटलुक से बात करते हुए कहा, "किसने कहा कि वे (भारत) नहीं ढूंढ (छेत्री का उत्तराधिकारी) सके हैं? आज पहले से कहीं अधिक युवा स्ट्राइकर मौजूद हैं जो कि एक अवसर की तलाश में हैं। मनवीर सिंह (Manvir Singh), फारुख चौधरी (Farukh Choudhary) और अन्य कई लोग तैयार हैं।”

विदेशी चुनौतियां

जबकि 57 वर्षीय कॉन्स्टेंटाइन को इस बात का भरोसा तो है कि खिलाड़ियों की प्रतिभा में निखार आया है, लेकिन फीफा के अनुभवी प्रशिक्षक ने महसूस किया कि युवा भारतीय खिलाड़ी तभी चमकेंगे जब उन्हें अपने-अपने क्लबों में उनके खेलने की प्रकृति के अनुसार मौका दिया जाएगा।

इसके अलावा इंडियन सुपर लीग (ISL) और आई-लीग दोनों ने ही भारतीय टीमों में युवा भारतीय खिलाड़ियों को नकारते हुए विदेशी खिलाड़ियों को अधिक मौके दिए हैं।

कॉन्स्टेंटाइन ने भारतीय राष्ट्रीय टीम के अपने दो अनुभव के आधार पर समझाते हुए कहा, “भारतीय खिलाड़ियों को नुकसान होगा क्योंकि कोच विदेशी खिलाड़ियों को उनकी पसंद की पोज़ीशन में खेलने देते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “कभी-कभी विदेशी खिलाड़ियों को समायोजित करने की वजह से आप हमारे भारतीय खिलाड़ियों को आगे-पीछे या सेंटर मिडफ़ील्ड में खेलते हुए देखेंगे और निश्चित रूप से भारतीय खिलाड़ियों के विकास में यह बाधा पहुंचाएगा।”

आईएसएल और आई-लीग दोनों ही क्लब पिछले सीज़न तक सात विदेशी खिलाड़ियों को रजिस्टर कर सकते थे और मैचों के दौरान पांच खिलाड़ियों को मैदान में उतार सकते हैं।

सही दिशा में बढ़ रहे कदम

AIFF टेक्निकल कमेटी ने हाल ही में विदेशी खिलाड़ियों को रजिस्टर किए जाने की संख्या को कम करने का प्रस्ताव रखा है और साथ ही मैदान पर अधिकतम चार (तीन विदेशी और एक एशियाई मूल का खिलाड़ी) विदेशियों को उतारने की बात कही है।

आपको बता दें, प्रस्ताव को I-League क्लबों द्वारा पहले ही स्वीकार कर लिया गया है। जबकि उम्मीद है कि ISL इसे 2021-22 सत्र से अपनाएगा। कॉन्स्टेंटाइन का मानना है कि यह कदम सही है।

उन्होंने कहा, “यह पहले दिन से ऐसा ही होना चाहिए था। आने वाले सत्र में विदेशी खिलाड़ियों की कमी के साथ यह मुद्दा कुछ हद तक सुलझ जाएगा और उम्मीद है कि भविष्य में हम उन्हें और अधिक संख्या में खेलते हुए देखेंगे।”

भारत के पूर्व कोच स्टीफन कॉन्स्टेंटाइन के साथ सुनील छेत्री
भारत के पूर्व कोच स्टीफन कॉन्स्टेंटाइन के साथ सुनील छेत्रीभारत के पूर्व कोच स्टीफन कॉन्स्टेंटाइन के साथ सुनील छेत्री

भारतीय फुटबॉल के लिए उज्ज्वल भविष्य

कॉन्स्टेंटाइन यह भी मानते हैं कि भारतीय फुटबॉल का भविष्य कुछ प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के दल के साथ उज्जवल लग रहा है।

उन्होंने कहा, “मेरे लिए सभी युवा खिलाड़ी उज्ज्वल संभावना के तौर पर थे। कुछ ने दूसरों की तुलना में बेहतर किया, लेकिन कुछ खिलाड़ियों को बेहतर होने में अधिक समय लगता है। आशिक कुरुनियान (Ashique Kuruniyan), अनिरुद्ध थापा (Anirudh Thapa), सुभाशीष बोस (Subhasish Bose), जर्मनप्रीत सिंह (Germanpreet Singh), उदांत सिंह (Udanta Singh), विशाल कैथ (Vishal Kaith) और कुछ अन्य मेरी राय में अच्छे खिलाड़ी हैं।”

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