सुशील कुमार ने बताई एक पहलवान की दिनचर्या, कहा- सुबह 4 बजे से होती है शुरुआत

सुशील कुमार के अनुसार कुश्ती की शुरुआत करने की आदर्श उम्र है 16 साल

लेखक भारत शर्मा ·

दो बार के ओलंपिक पदक विजेता पहलवान सुशील कुमार वर्तमान में कई युवा पहलवानों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं और वह युवाओं को कुश्ती के गुर सिखाने के लिए भी समय निकाल रहे हैं। 37 वर्षीय ने 2008 बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीता और 2012 लंदन ओलंपिक में रजत पदक अपने नाम किया था।

हालाँकि, उन्हें अभी भी टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करना है और फिटनेस की कमी के कारण राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप से बाहर कर दिया गया है। ऐसे में सुशील वर्तमान में अपने आधिकारिक YouTube चैनल पर वीडियो के जरिए युवाओं को कुश्ती से दूर रहने के दौरान समय के सदुपयोग के गुर सिखा रहे हैं।

सुशील कुमार ने कहा, "पेशेवर कुश्ती के लिए 16 साल आदर्श उम्र है। 18, 19, 20 और उसके बाद शुरू करने पर आपको दाव और आवश्यक प्रशिक्षण में समायोजन बैठाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में शुरुआत के लिए 16 साल सबसे आदर्श उम्र है और इसके बाद देश के लिए खेलने के लिए आगे बढ़ना चाहिए।"

उन्होंने कहा, "पहलवान बनने का सबसे महत्वपूर्ण पहलू अनुशासन है। इसमें वह सब कुछ शामिल है जो एक पहलवान के लिए जरूरी है। एक अनुशासित इंसान हमेशा अच्छे परिणाम प्राप्त कर सकता है।"

तीन बार के राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता ने भी पहलवान की प्रतिदिन की दिनचर्या के बारे में बताया है। उन्होंने कहा कि एक पहलवान सुबह 4 बजे उठता है और फिर नियमित प्रशिक्षण प्राप्त करता है जो लगभग 5-6 घंटे तक चलता है।

सुशील ने इच्छुक पहलवानों को आहार पर विशेष ध्यान देने और आराम करने के लिए कहा क्योंकि यह उन्हें दूसरे सत्र में बेहतर प्रशिक्षण लेने के लिए तैयार करता है।

उन्होंने कहा, "एक पहलवान सुबह 4 बजे उठता है और फिर प्रशिक्षण में जाता है और अपने कोच से सलाह लेता है कि उसे और मजबूत बनने के लिए क्या करना चाहिए? कोच 15 दिनों के प्रशिक्षण के लिए एक कार्यक्रम बनाता है। इसमें वह दौड़, रस्सी कूद, सिट-अप और सुबह की कुश्ती का प्रशिक्षण शामिल होता है।"

उन्होंने कहा, "मैंने इसे सुबह 4 बजे से 10 बजे नियमित रूप से अभ्यास किया है। इसके बाद पहलवान को दूसरे सत्र के लिए आराम की जरूरत होती है। यदि वह अच्छी तरह से आराम करता है तो वह दूसरे सत्र में और ताजगी के साथ उतर सकता है। आराम करने से पहले, उसके पास बादाम, दूध, मक्खन, फल आदि स्नैक्स होने चाहिए। यदि कोई पहलवान एक दिन भी प्रशिक्षण नहीं लेता है तो वह बहुत पिछड़ जाता है।"

कुश्ती के दौरान दाव लगाते पहलवान सुशील कुमार

2010 विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल करने वाले सुशील ने बताया कि एक पहलवान का आहार उस भार वर्ग पर निर्भर करता है। ऐसे में उसे विशेषज्ञ की सलाह पर उसे अपनाना पड़ता है।

दिग्गज पहलवान ने कहा, "यदि पहलवान को दो चपातियां (फ्लैट ब्रेड), चावल या फल चाहिए होते हैं तो इसका फैसला आहार विशेषज्ञ ही करता है। दूसरी बात यह है कि पहलवान अपने वजन वर्ग के अनुसार अपने आहार की योजना बनाता है।"

उन्होंने कहा, "बहुत सारे लोग सोचते हैं कि एक पहलवान को क्या खाना चाहिए। (लोग सोचते हैं कि जमकर खाते हैं) 1 बाल्टी दूध या चपाती। यह ऐसा नहीं है। एक पहलवान एक आम आदमी की तरह है और उसे नियमित रूप से आहार लेने की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि उन्हें कार्बोहाइड्रेट और विटामिन की जरूरत है। वह अपना आहार लेते हैं और फिर प्रशिक्षण के लिए जाते हैं।"

शाम के प्रशिक्षण सत्र को लेकर सुशील ने कहा कि तकनीक और शक्ति प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। पहलवान के लिए दिन के अंत भोजन में ज्यूस का होना बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसी तरह रात का खाना करीब 9:30 बजे लिया जाता है और इसके बाद उसे जल्दी पचाने के लिए टहलना होता है।

इसके अतिरिक्त, सुशील ने उल्लेख किया कि एक पहलवान जल्दी सोता है ताकि वह अच्छी तरह से आराम कर सके और सुबह जल्दी प्रशिक्षण शुरू कर सके।

उन्होंने कहा, "शाम के प्रशिक्षण में कोच तकनीक और शक्ति प्रशिक्षण कराते हैं। इसके अलावा मनोरंजन प्रशिक्षण भी होता हैं। इसके बाद उन्हें बादाम शेक मिलता है और फिर 9:30 बजे उन्हें खाना खाना होता है। खाना खत्म करने के बाद वह टहलते हैं और सोने चले जाते हैं।सुबह 4 बजे फिर से उनके नए दिन की शुरुआत होती है।"