सर्वश्रेष्ठ टेबल टेनिस खिलाड़ी जी साथियान ने बताया भारत और विदेश में खेलने के बीच का फर्क  

उन्हें यह भी लगता है कि बार-बार 14 दिन का क्वारींटाइन मानसिक परेशानी पैदा करता है 

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

टेबल टेनिस खिलाड़ी जी साथियान (G Sathiyan) जब से यात्रा प्रतिबंध आसान हुए हैं, तब से अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए पूरी धरती का चक्कर लगा रहे हैं।

अक्टूबर में उन्होंने अपने ट्रेड में खेलने के लिए पोलैंड में पोलिश टेबल टेनिस लीग के लिए दो सप्ताह का दौरा किया। इसके बाद ओकायामा रिवेट्स की ओर से T-लीग में भाग लेने के लिए टोक्यो गए। यह कहने की जरूरत नहीं है कि कोरोना महामारी के कारण दोनों देशों में सख्त क्वारींटाइन नियम लागू थे।

साथियान ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, "लगातार 14 दिनों के क्वारींटाइन से एथलीटों को कोई फायदा नहीं मिला। एक कमरे में दो सप्ताह तक अलग-थलग रहने के बाद, किसी को भी अपने मूल आकार में वापस आना बहुत मुश्किल होता है।"

जापान में सख्त कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना, उनके लिए बहुत मुश्किल वक्त था, लेकिन इस दौरान उन्होंने स्थानीय खान—पान का पूरा लुत्फ उठाया।

सर्वश्रेष्ठ टेबल टेनिस खिलाड़ी ने कहा, "टोक्यो में क्वारींटाइन रहने के दौरान, मुझे टेबल टेनिस कोर्ट के आकार वाले कमरे में रहना पड़ा था। कमरे से केवल दो घंटे के लिए बाहर निकलने की अनुमति थी। मेरे छोटे से कमरे में एक टेबल थी। मानसिक रूप से यह मेरे जीवन में सबसे चुनौतीपूर्ण स्थिति थी। वे वहां सख्त कोविड प्रोटोकॉल की पालना करा रहे थे, जो उस समय की जरूरत थी। हालांकि, उनका अतिथि सत्कार बहुत अच्छा था। जापानी खाना शानदार था।"

हालांकि, इस टूर्नामेंट ने उन्हें 2021 में होने वाले टोक्यो गेम्स के माहौल में घुल—मिल जाने के लिए तैयार किया है। भले ही यहां प्रशंसकों के बिना टूर्नामेंट का आयोजन हुआ। इसमें उसे खेल के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के खिलाफ भी मुकाबला करने का मौका दिया, जिसने उनका दायरा आगे बढ़ाया।

एक मैच के दौरान अंक जुटाने के बाद जी साथियान

उन्होंने कहा, "मैं लम्बे समय से जापान के दौरे का इंतजार कर रहा था। मैं सिर्फ ओलंपिक की अनुभूति प्राप्त करना चाहता था। टोक्यो जाना मेरे लिए बहुत मददगार था। लीग बहुत उच्च स्तर की थी। सभी खिलाड़ी मुझसे अधिक रैंक वाले थे, इनमें से अधिकांश शीर्ष-20 में स्थान रखने वाले खिलाड़ी थे। बिना दर्शकों के मैच काफी रोमांचक थे। मैंने चार मुकाबले खेले और इनमें से एक जीता और तीन हार गया। जीत भी एक शीर्ष वरियता प्राप्त खिलाड़ी के खिलाफ मिली। यदि मेरे पास तैयारी के लिए ज्यादा समय होता तो शायद मैं और बेहतर प्रदर्शन करता।"

"यह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में से कुछ के खिलाफ खेलने के रूप में बहुत अच्छा अनुभव था। उच्च स्तर वाली प्रतियोगिता ओलंपिक के पहले की तैयारी के लिए एकदम सही थी।"

साथियान ने कुछ तकनीकी पहलुओं पर भी मंथन किया, जो एक खिलाड़ी को भारत या यूरोप में खेलने के दौरान उसकी शैली में समायोजन करने के लिए मजबूर करता है।

उन्होंने खुलासा किया, "इसके बारे में कोई नहीं जानता, लेकिन हम जिस टेबल पर खेलते हैं वह एक देश से दूसरे देश में अलग-अलग होती है। गर्मी की वजह से भारत में इसकी सतह पर अधिक घर्षण होता है, जिसका मतलब है कि गेंद टेबल से उछल जाती है और बहुत अधिक घूमती है। फुटवर्क कौशल यहां ज्यादा मायने नहीं रखता। जबकि यूरोप में टेबल आमतौर पर धीमी होती हैं और इसमें गेंद बहुत अधिक घुमाव नहीं लेती और इसीलिए यहां मुकाबला लम्बा चलता है।"

उन्होंने टेबल टेनिस खिलाड़ी के सामने आने वाली कठिनाइयों को दूर करने के लिए टेनिस से अनुरूपता बनाने का विकल्प चुना।

उन्होंने कहा, "अगर, नडाल (राफेल) या फेडरर (रोजर) को कहा जाये कि आज उन्हें क्ले कोर्ट पर खेलना है और अगले दिन ग्रास कोर्ट पर खेलना है। कल्पना करें कि यह उनके लिए कितना मुश्किल होगा। ऐसी ही परेशानी का सामना हम टेबल टेनिस में करते हैं। जब हम यूरोप में खेलने के बाद भारत में आकर खेलते हैं। मानसिक बदलाव बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि एक ही गेंद भारत और यूरोप में अलग तरह से व्यवहार करेगी।"

उन्होंने उल्लेख किया कि जापानी बोर्ड इन ​दोनों के बीच में थे। ये न तो बहुत धीमे हैं और न ही बहुत तेज।

विश्व में 37वें स्थान पर काबिज खिलाड़ी ने अभी तक राष्ट्रीय खिताब नहीं जीता है। वो तीन बार सेमीफाइनल और फाइनल में हार गए, लेकिन इस बार वो स्थितियों को बदलने की पूरी उम्मीद कर रहे हैं।

साथियान ने सोमवार को TT नेशनल में सानिल शेट्टी को 11-9, 11-9, 11-13, 11-8, 11-6 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया।

उन्होंने कहा, "पहली बार मुझे राष्ट्रीय चैंपियनशिप के लिए घर पर तीन सप्ताह का प्रशिक्षण करने का मौका मिला। मैंने अच्छी तैयारी की और उम्मीद है कि इस बार मैं भाग्यशाली रहूंगा।"