प्रोजेक्ट ‘टेकिंग रेफ़्यूजी’ को मिली अपनी ख़ास धुन

इस ख़ास सीरीज़ के थीम सॉन्ग को ग्रैमी अवॉर्ड विजेता रिकी केज ने कम्पोज़ किया है। इसमें निकोलो कैंप्रियानी और अभिनव बिंद्रा का कैमियो भी नज़र आएगा।

टेकिंग रेफ्यूजी: टार्गेट टोक्यो 2020 का एक आधिकारिक थीम सॉन्ग है। 

यह गाना बुधवार को लॉन्च किया गया। इटली के ओलंपिक चैंपियन निकोलो कैंप्रियानी (Niccolo Campriani) और भारत के अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra) द्वारा संचालित इस प्रोजेक्ट के गाने को ग्रैमी अवॉर्ड विजेता रिकी केज ने कम्पोज़ किया है। यही नहीं इसमें कैंप्रियानी और बिंद्रा खुद कैमियो करते हुए भी नज़र आते हैं।

अभिनव बिंद्रा ने ट्विटर पर गाने की रिलीज़ की घोषणा करते हुए कहा कि सॉन्ग 'मेक अ मार्क' (यह गीत नई ऊंचाइयों को छुते हुए अपनी अद्भुत छाप छोड़ेगा) और यह इस प्रोजेक्ट की मूल भावना को प्रदर्शित करता है। जिसके तहत चैंपियन निशानेबाज़ तीन रेफ्यूजी महदी (Mahdi), खौला (Khaoula) और लूना (Luna) को प्रशिक्षण देने में मदद करते हैं ताकि वह टोक्यो ओलंपिक में अपनी जगह पक्की कर सकें।

वहीं, निकोलो कैंप्रियानी ने इसे एक प्रोजेक्ट के रूप में देखा जो टोक्यो 2020 से भी आगे तक जाएगा और एथलीटों की एक नई पीढ़ी को प्रेरित करेगा।

कैंप्रियानी ने अपने ट्विटर पेज पर इसका उल्लेख करते हुए कहा, "यह सब लगभग एक साल पहले शुरू हुआ था, एक बहुत ही आसान से आइडिया के साथ। मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि यह ग्रैमी अवॉर्ड विजेता रिकी केज (Ricky Kej) और अन्य ओलंपिक चैंपियन अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra) को आकर्षित करेगा।”

निकोलो कैंप्रियानी के देखरेख में रेफ्यूजी निशानेबाज़ों का यह सफर एक साल पहले शुरू हुआ था। इटली के इस दिग्गज के लिए यह यूनाइटेड नेशन्स हाई कमिश्नर फॉर रेफ्यूजीस (UNHCR) के एक हिस्से के तौर ज़ाम्बिया की यात्रा थी, जो कि बेहद उत्प्रेरक साबित हुई।

उन्होने ओलंपिक चैनल से बात करते हुए कहा, "उस अनुभव ने मुझ पर बहुत प्रभाव डाला और मुझे यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि मैं एक ओलंपियन के रूप में अपना उपयोग कैसे कर सकता हूं, और मैं जिन लोगों के बीच बड़ा हुआ उसी को अपने दिल के बेहद करीब महसूस करता हूं।”

निकोलो कैंप्रियानी के दिमाग की उपज

ओलंपिक एथलीट के रूप में अपनी स्थिति के उपयोग करने के उद्देश्य से अन्य एथलीटों को प्रेरित करने के लिए और 'खेल के माध्यम से दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने के लिए' 32 वर्षीय ने अपने इस विचार को स्विट्ज़रलैंड के लौसाने के एक स्थानीय इमिग्रेशन ऑफिस में पेश किया, जहां वह 2018 के अंत से स्पोर्ट्स इंटेलिजेंस मैनेजर के तौर पर IOC के साथ काम कर रहे थे।

फिर उन्होंने स्थानीय शरणार्थियों के एक चयनित समूह के उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया और तीन निशानेबाजों को प्रेरित करने का काम किया।

इसका मुख्य उद्देश्य निशानेबाज़ों की हर संभव मदद करना है, जिससे वह टोक्यो ओलंपिक खेलों के लिए 10 मीटर एयर राइफल में मिनिमम क्वालिफाइंग स्कोर (MQS) हासिल करते हुए रेफ्यूजी ओलंपिक टीम या नेशनल ओलंपिक समिति की ओर से ‘खेलों के महाकुंभ’ में अपनी जगह पक्की कर सकें।

निकोलो कैंप्रियानी इस बात का आश्वासन दे रहे हैं कि वह अपना लक्ष्य हासिल करने में उनकी मदद करते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ दे रहे हैं।

उन्होंने कहा, "मैं इन लोगों को अपने शरीर पर बेहतर नियंत्रण हासिल करने में मदद करना चाहता हूं, वह अपनी श्वास को नियंत्रण में ला सकें और दिल की धड़कन को महसूस कर सकें।”

“यह खुद के अतीत के डर से आगे बढ़ने के बारे में है। इसे भूलना नहीं है लेकिन यह सीखना है कि इससे कैसे निपटा जाए। यह खुद की खोज करने की एक प्रक्रिया है और मैं इन कौशलों को दूसरों को देना चाहूंगा।"

भारत से इसका संबंध

इटली के इस दिग्गज के सपनों के प्रोजेक्ट में उनकी मदद उनका एक अच्छा दोस्त और भारतीय खेल दिग्गज अभिनव बिंद्रा कर रहे हैं।

निकोलो कैंप्रियानी के साथ ये निशानेबाज़ पिछले साल के अंत में भारत में मौजूद थे और देश के लिए व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाले एकमात्र एथलीट से और अधिक सीखने की कोशिश कर रहे थे।

शूटिंग में शामिल हुए इन नए एथलीटों का बेंगलुरु में अपने केंद्र पर स्वागत करने वाले अभिनव बिंद्रा का मानना था कि यह प्रोजेक्ट लोगों को उनके सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित कर सकता है।

उन्होंने कहा था, “एक एथलीट के रूप में हम सभी प्रशिक्षण और परिणामों के लिए प्रतिबद्ध होते हैं, जो कि हमें आगे बढ़ाता है; खुद को एक उद्देश्य दें। हम में से बहुत से लोग यह नहीं देख पाते हैं कि खेल में हमें एकजुट करने, दूसरों को प्रेरित करने और बाधाओं को पार करने की क्षमता होती है।”

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