ओलंपिक खेलों के लिए क्वालिफाई करने के लिए उत्साहित रिफ्यूजी शूटर्स की कहानी

ओरिजनल सीरीज़ की 'टेकिंग रिफ्यूजी' ओलंपिक विजेता निकोलो कैंपियानी द्वारा निर्देशित तीन प्रतियोगियों की कहानी बताती है, जो टोक्यो 2020 के लिए क्वालिफाई करना चाहते हैं। 

ओलंपिक चैनल का टेकिंग रिफ्यूजी (Taking Refuge) सोमवार (15 June) को रिलीज हो गया, जो एक प्रेरणादायक और भावनात्मक डॉक्यूमेट्री की सीरीज़ है, जिसमें तीन रिफ्यूजियों की टोक्यो 2020 ओलंपिक खेलों में क्वालिफाई करने कहानी बताई गई है।

रियो 2016 के बाद शूटिंग छोड़ने के वाले, निकोलो कैंप्रीयानी (Niccolo Campriani) को नई दिशा की आवश्यकता थी।

रियो खेलों में पहली रिफ्यूजी ओलंपिक टीम (ROT) से प्रेरित और जाम्बिया में एक रिफ्यूजी कैंप का दौरा करने के बाद इटली के तीन बार के स्वर्ण पदक विजेता एक ओलंपिक चैंपियन होने के नाते अपनी स्थिति का अच्छा उपयोग करना चाहते थे।

कैंप्रीयानी ने फैसला किया कि वे लुसाने में अपने घर के पास रिफ्यूजियों के एक जोड़े को ढूंढेंगे और उन्हें 10 मीटर एयर राइफल में न्यूनतम क्वालिफिकेशन अंक प्राप्त करने में मदद करेंगे जो उन्हें टोक्यो 2020 में प्रतिस्पर्धा करने के लिए योग्य बना देगा।

उन्होंने तीन नौसिखिए निशानेबाजों - खौला, महदी और लूना के साथ मिलकर 'टेकिंग रिफ्यूजी' की स्थापना की, जिन्हें एथलीटों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के माध्यम से प्रतियोगिता के लिए चुना गया।

COVID-19 के कारण टोक्यो 2020 खेलों के स्थगन का मतलब है कि और बहुत कुछ देखना बाकी है।

"प्रत्येक दिन में शूटिंग में बहुत कुछ सीखता हूं.ये मेरी जिंदगी को सुधारने में भी बहुत मदद करता है।" – रिफ्यूजी शूटर खौला

'टेकिंग रिफ्यूजी' का मकसद क्या है

कैंप्रीयानी मानते हैं कि लंदन 2012 में स्वर्ण और रजत जीतने के बाद, उनके खेल के लिए उनका जुनून "आदत" बन गई।

वो रियो में 10 मीटर एयर राइफल का खिताब जीतने में कामयाब रहे, जो चार साल पहले की तुलना में बेहतर था।

फिर अपने 50 मीटर राइफल 3 पोजिशन के खिताब को बचाया, हालांकि सर्गेई कमेंस्की ने फाइनल में उनसे बेहतर प्रदर्शन किया।

रूसी को गोल्ड मेडल के लिए अपने आखिरी शॉट के में सिर्फ 8.7 की जरूरत थी। उस पोजिशन में 9.2 उनका सबसे खराब स्कोर था।

कैंप्रीयानी अपना तीसरा ओलंपिक खिताब जीतने में कामयाब रहे। उन्होंने बताया कि उन्होंने इसकी उम्मीद नहीं की थी।

"ये अब जाकर खत्म हुआ है। आठ सेकंड के लिए, मैं रजत पदक विजेता था। और फिर अपने शॉट के बाद, मैं नया ओलंपिक चैंपियन हूं।"

"मैं वास्तव में इसे हजम नहीं कर पा रहा था। इस तरह से गोल्ड जीतने से ज्यादा मैं उस रजत पदक से बहुत खुश था, मुझे नहीं लगा कि मैंने इसे हासिल किया है।" - निकोलो कैंप्रीयानी

कैंप्रीयानी ने संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त रिफ्यूजियों (UNHCR) को सिल्वर और गोल्ड की पुरस्कार राशि को दान में दे दिया।

जिसके कारण जाम्बिया के महेबा रिफ्यूजी कैंप को मौका मिला, जो कि अफ्रीका का सबसे बड़ा कैंप है, जिसने इस परियोजना की शुरूआत की।

मार्च 2019 में, उन्होंने EVAM से रिफ्यूजियों को आमंत्रित किया - जो आप्रवासियों और रिफ्यूजियों के लिए वुड की स्वागत सेवा का कैंटन है -  जिनको चयन दिवस के लिए एयर राइफल को फायर करने के तरीके की मूल बातें दिखाई गईं।

उसने उस दिन एक पुरुष और एक महिला शूटर चुनने का इरादा किया था, लेकिन दो महिला शूटर के बीच एक को चुनना मुश्किल हो रहा था - लूना (मूल रूप से इरिट्रिया से) और खौला (फिलिस्तीन) – और बाद में दोनों को एक साथ चुना गया।

अफगानिस्तान के महदी जो पुरुष शूटर हैं, उनके के बारे में कोई संदेह नहीं था। वो हाल ही में ईरान में रह रहे हैं, उन्हें चुना जा रहा है।

रिफ्यूजी निशानेबाज लूना, महदी और खौला के साथ निकोलो कैंप्रीयानी
रिफ्यूजी निशानेबाज लूना, महदी और खौला के साथ निकोलो कैंप्रीयानीरिफ्यूजी निशानेबाज लूना, महदी और खौला के साथ निकोलो कैंप्रीयानी

तीनों ने सप्ताह में तीन बार कैंप्रीयानी के साथ ट्रेनिंग की, जो कि बोलोग्ना में जुलाई के इतालवी राष्ट्रीय चैंपियनशिप के पहले प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले अपने कौशल को निखार रहे थे।

बेहतरीन स्कोर हासिल करने के बाद, उन्होंने एक रिफ्यूजी के रूप में अपने जीवन में परेशानियों से निपटने के लिए उपकरणों के साथ-साथ आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए शूटिंग के खेल के साथ ट्रेनिंग जारी रखा है।

हालांकि वे अतीत में जाने की कोशिश नहीं करते हैं, तीनों ने अपने जीवन में लूना और महदी दोनों के साथ स्विट्जरलैंड का सफर भी तय किया है।

अब वे टोक्यो ओलंपिक में अपनी जगह बनाने की कोशिश में हैं। मई में ओलंपिक चैनल से बात करते हुए खौला ने बताया कि "अगर मैं ट्रेनिंग के लिए नहीं जाता हूं, तो मुझे अपनी राइफल याद आती है, मुझे अपना लक्ष्य याद आता है। सब कुछ, मैं मिस करता हूं।"

वहीं लूना को ट्रेनिंग से कई विषम परिस्थितियों से उबरने में मदद मिली है को पूरा किया है, महदी और खौला कैंप्रीयानी के पूर्व प्रतिद्वंद्वी और बीजिंग 2008 के स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा के निमंत्रण पर भारत की यात्रा करने में सफल रहे।

जहां उन्होंने एक दोस्ताना मैच में भाग लिया जिसमें विश्व कप विजेता और रियो 2016 ओलंपियन अपूर्वी चंदेला शामिल थीं।

पहले से बेहतर करने के बाद महदी ने कैंप्रीयानी के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने करने की कोशिश की।

उन्होंने कहा, "मेरे लिए ये एक मानसिक खेल है और ये ऐसी चीज है जिसने मुझे मेरी मानसिकता को सुधारने में मदद की है।

"जब समस्याएं होती हैं, तो आप खाली नहीं बैठ सकते। आप रुक नहीं सकते।" महदी

शरणार्थी निशानेबाज़ ने टोक्यो के लिए लिया बिंद्रा का सुझाव

शरणार्थी निशानेबाज़ ने टोक्यो के लिए लिया बिंद्रा का सुझाव

सालों पहले हुई इस सफर की शुरुआत

24 जुलाई को टोक्यो 2020 खेलों की निर्धारित शुरुआत से 500 दिन पहले परियोजना शुरू हुई।

लेकिन COVID-19 के कारण खेलों के स्थगित होने का मतलब है कि कैंप्रीयानी को एक और साल के लिए अपने "नेटवर्क" के साथ चलना होगा।

ये सभी तीन निशानेबाज़, विशेष रूप से लूना, को ओलंपिक खेलों के लिए अंतिम क्वालिफायर से पहले अभ्यास करने और खुद का ट्रेन करने के लिए अधिक समय देता है।

कैंप्रीयानी के लिए, तीनों के साथ काम करने से खेल के प्रति उनका प्यार फिर से जाग उठा।

COVID-19 महामारी के सबसे बुरे दौर से गुजरने के बाद, टोक्यो की ओर उनका मार्गदर्शन करते हुए वो अब उन्हें ट्रेनिंग की ओर ले जाने की सोच रहे हैं।

"एक एथलीट और एक ओलंपिक चैंपियन की जिम्मेदारी आखिरी शॉट या आखिरी जंप या उसके या उसके करियर के आखिरी मीटर से आगे जाती है। मैं खौला, महदी और लूना से मिलने और उनके साथ इस सफर में चलने के बहुत आभारी हूं। । " - निकोलो कैंप्रीयानी

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