निकोलो कैंप्रियानी चाहते हैं कि टेकिंग रिफ्यूजी जारी रहे

इटली के निशानेबाज़ इस परियोजना के माध्यम से अपने ट्रेनीज को प्रेरणा देने और प्रभावित करना चाहते हैं।

ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता निकोलो कैंप्रियानी (Niccolo Campriani), का टेकिंग रिफ्यूज: टार्गेट टोक्यो 2020 के लिए एक ऐसा सफर है जो ओलंपिक के आगे भी जारी रहेगा।

इटेलियन निशानेबाज़ी चाहते हैं कि उनके निशानेबाज़ खौला (Khaoula), महदी (Mahdi) और लूना (Luna) इस सफर से प्रेरणा लें और सकारात्मक तरीके से आगे बढ़े।

सोमवार को ओलंपिक चैनल ओरिजिनल्स के प्रीमियर पर एक मीडिया ब्रीफिंग में बोलते हुए, निकोलो कैंप्रियानी ने कहा कि ये परियोजना प्रणाली के साथ एकजुट करने की प्रक्रिया है।

उन्होंने कहा, "मेरे दृष्टिकोण से, टोक्यो 2020 के बाद भी ये ऐसे ही चलेगा। मैं चाहता हूं कि वो खेल पर सौ फीसदी ध्यान केंद्रित करें।"

"ये मायने नहीं रखता कि मैंने अपने खेल के कैरियर को कैसे जिया। मैंने अपने 16 साल के लंबे करियर में 13 साल की उम्र से शुरूआत की थी। इस दौरान हमेशा खेल के लिए मैंने जिंदगी को जिया।

"ये (टेकिंग रिफ्यूजी) एक बहुत ही शानदार सफर है, जहां इन्हें साथ लेकर आगे बढ़ने और पहचान दिलाने में मदद मिलती है। उनके लिए एक रिफ्यूजी की तरह स्विट्ज़रलैंड में उन्हें एकजुट करने और एक पूर्व एथलीट की तरह उनके साथ काम करने का अवसर मिलता है।

तीन शूटर का चयन कैसे हुआ इस बात पर बोलते हुए 32 वर्षीय ने कहा कि इसमें उन लोगों को शामिल किया गया जो इस बारे में स्पष्ट थे कि वो इस परियोजना में क्यों आना चाहते हैं। इटली के शूटर ने कहा ‘मैं ओलंपिक में जाना चाहता हूं’

उन्होंने कहा, “मैं किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश में था जो परियोजना के उद्देश्य के बारे में स्पष्ट हो। बेशक, मुकाबला करने का ज़ज़्बा बहुत महत्वपूर्ण है।”

"मेरे लिए अपनी बात कहने की बजाय, उनके बारे में जानना महत्वपूर्ण था। मुझे लगता है कि, मेरे लिए, ये बहुत महत्वपूर्ण था कि हम शुरू से ही इस उद्देश्य पर बहुत खरे उतरे।”

रिफ्यूजी निशानेबाजों का सफर

अपने ट्रेनीज के बारे में बोलते हुए, निकोलो कैंप्रीयानी ने कहा: "खौला के लिए, ये एक दिन उसके बेटे के लिए एक उदाहरण स्थापित करने का अवसर है, ताकि वो उसपर गर्व करे। महदी दुनिया और रिफ्यूजी समुदाय को संदेश देना चाहेंगे।

"आप इस सीरीज़ में और (टेकिंग रिफ्यूजी) देखेंगे।"

इस सफर में इटली के इस शूटर को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।

लौसाने में रिफ्यूजियों की एक सीमित पूल के लिए एक पुरुष और महिला शूटर को खोजने के लिए एक शिकार शुरू हुआ। स्विट्ज़रलैंड में निकोलो कैंप्रीयानी ने तीसरे शूटर को शामिल करने के लिए अपनी योजनाओं का विस्तार किया।

इसी वजह से उन्हें राइफल वापस मंगवाना पड़ा, जिसे उन्होंने निशानेबाजों को ट्रेनिंग देने के लिए ओलंपिक संग्रहालय को दान कर दिया था।

कैंप्रियानी ने जो भी प्रतिभाएँ खोजी थी उनमें से एक महदी को विदेशी यात्रा करने में परेशानी थी, खौला और लूना ने टेकिंग रिफ्यूजी ’परिवार का विस्तार किया।

निकोलो कैंप्रियानी ने अपनी अब तक की यात्रा के बारे में विस्तार से बताया, उन्होंने कहा, महदी यहां स्विट्ज़रलैंड में थे, लेकिन वो पूरी तरह से मान्यता प्राप्त रिफ्यूजी नहीं थे और न ही उनके अफगानी मूल की कोई आईडी थी। वह थोडे लिंबो में थे। इसलिए हमें स्क्रैच से शुरुआत करनी पड़ी।”

“पहले, हमें अफग़ानिस्तान में उनके पिता की ओर से एक रिश्तेदार की तलाश करनी थी। जैसे ही हमें पता चला, तो हमें जेनेवा में एक अफगानी पासपोर्ट के लिए आवेदन करना था। और फिर अपनी पहली प्रतियोगिता के लिए उन्हें इटली जाना पड़ा।

“हमें प्रतियोगिता से एक दिन पहले उनका पासपोर्ट मिला। ये एक अविश्वसनीय यात्रा रही है और मैंने बहुत कुछ सीखा है। अगर ये परियोजना आगे बढ़ती है, तो ये एक बड़ी उपलब्धि होगी।

“जब लड़कियों की बात आती है। हम खौला और उनके बच्चे के बारे में थोड़ा चिंतित थे, इसीलिए हमने लूना को बैक-अप में रखा। हमने नहीं सोचा था कि बैक-अप में खुद एक बच्चा होगा, लेकिन ऐसा हुआ।

“ये परियोजना में शामिल नहीं होने का एक बहुत ही वाजिब बहाना है। लेकिन खेलों के स्थगन ने लूना को क्वालिफाई होने का मौका दिया है।”

ये सीरीज़ अब ओलंपिक चैनल पर उपलब्ध है।

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