भारत के स्टार एथलीटों ने टोक्यो ओलंपिक को स्थगित करने के फैसले को सही ठहराया

भारतीय ओलंपिक एथलीट मानते हैं कि दुनिया जल्द ही इस महामारी से बाहर आ जाएगी, खेलों को तो बाद में भी खेला जा सकता है।

हालांकि थोड़ा निराशा के साथ भारतीय एथलीटों ने COVID-19 महामारी के कारण टोक्यो ओलंपिक को आगे की तारीख तक स्थगित करने के अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति के फैसले का समर्थन किया है।

टोक्यो खेलों में भारत की पदक दिलाने की उम्मीद रखने वाली एथलीटों में से एक विनेश फोगाट (Vinesh Phogat) जुलाई-अगस्त में होने वाले खेलों के लिए उत्सुकता से देख रही थी।

क्योंकि पिछली बार जब ओलंपिक में भारतीय पहलवान मैट पर उतरी थीं, तो उन्हें निराशा हाथ लगी थी। लेकिन वो समझती है कि ये फैसला लेना भी ज़रूरी था।

उन्होंने ओलंपिक चैनल से बात करते हुए कहा कि, “मैं पिछले एक साल से तैयारी कर रही हूं, और खेलों के लिए समय पर क्वालिफाई भी कर चुकी थी। ये फैसला उस नजरिए से मुश्किल होगा। लेकिन ये एक मुश्किल परिस्थिति है जिससे दुनिया गुजर रही है। और मुझे लगता है कि इससे सावधान रहने की जरूरत है।”

IOC ने कहा कि 53 प्रतिशत ओलंपिक कोटा अभी तक एथलीटों द्वारा हासिल नहीं किया जा सका है, आने वाले समय में ओलंपिक खेलों के इच्छुक खिलाड़ियों को खेलों के लिए टिकट हासिल करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देते हुए देखा जा सकता था।

ट्रेनिंग करने के लिए एक साल का समय और मिलेगा

लेकिन हालिया परिस्थिति ने खेल जगत के इवेंट्स को निलंबित करने के लिए मजबूर किया, जिससे अनिश्चितता की भावना पैदा हो गई थी।

हालांकि ओलंपिक का स्थगित होना अच्छा भी हो सकता है, भारतीय जेवेलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) का मानना ​​है कि क्लालिफाइंग आयोजनों के बारे में निर्णय लेने का फैसला IOC और संबंधित खेल निकायों के विशेषज्ञों पर छोड़ दिया जाना चाहिए।

नीरज चोपड़ा ने कहा, "मैं कहूंगा कि हमें इसे सकारात्मक रूप से देखना चाहिए क्योंकि इससे हमें ओलंपिक के लिए योजना बनाने और ट्रेनिंग करने के लिए एक साल का समय और मिलेगा, जो कई एथलीटों के लिए सबसे बड़ा खेल आयोजन है।"

“अगले कुछ महीनों में तैयारी पर प्रभाव पड़ेगा जब तक कि स्थिति को नियंत्रण में नहीं लाया जाता है, लेकिन ये ऐसी स्थिति है जिसका सभी एथलीटों को समान रूप से सामना करना पड़ रहा है।

“अभी के लिए, मैं क्वालिफाइंग के बारे में नहीं सोच रहा हूँ; नीरज चोपड़ा ने कहा कि IOC और विश्व एथलेटिक्स के विशेषज्ञ हैं जो निर्णय लेने से पहले हर चीज पर विचार करेंगे।

ओलंपिक वर्ष में देखा गया कि भारत की पदक की उम्मीदें बेहतर ढंग से शुरू हो रही हैं। जहां निशानेबाज़ 2019 में सफल सीज़न को विदाई दे कर आ रहे थे, वहीं तब पहलवानों ने एशियान कुश्ती चैंपियनशिप में पदकों की झड़ी लगा दी थी।

पहले स्वास्थ्य फिर खेल

हालाँकि, खेलों को और आगे बढ़ाने के बाद ये देखा जाना बाकी है कि कैसे एथलीट अपने ट्रेनिंग की योजना बनाते हैं ताकि ये सुनिश्चित हो सके कि ओलंपिक के आसपास आने पर वे फिर से शिखर पर पहुंच जाएं।

लेकिन पहलवान बजरंग पूनिया (Bajrang Punia) के अनुसार महामारी को मिटाना या रोकना सर्वोपरि है उसके बाद खेलों का आयोजन हो सकता है। उन्होंने कहा, "हां, फॉर्म बहुत महत्वपूर्ण होगी और हमें ये सुनिश्चित करना होगा कि हमने अब तक जो फॉर्म दिखाई है, हम उसे बरकरार रखें और चोट से बचे रहें।"

“लेकिन सबसे पहले, हमें सरकार के निर्देशों का पालन करना चाहिए और COVID-19 से लड़ने में मदद करनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि "हमें ये सुनिश्चित करना है कि हम जल्द ही इस स्थिति से बाहर आ जाएं, और फिर हम ओलंपिक की तैयारियों के बारे में बात कर सकते हैं।''

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