FIFA अंडर-17 वर्ल्ड कप कप्तान अमरजीत सिंह किसानी में ढूंढ रहे सुकून

अमरजीत सिंह भारत के सबसे होनहार युवा फुटबॉलरों में से एक हैं। मणिपुर का यह खिलाड़ी एक किसान परिवार से ताल्लुक़ रखता है।

चाहे दिल्ली के नेहरू स्टेडियम की फुटबॉल पिच हो या मणिपुर के चावल के खेत, अमरजीत सिंह कियाम (Amarjit Singh Kiyam) हर जगह अपनी भूमिका बहुत अच्छी तरह से निभाना जानते हैं।

अपने खेल में धाक जमा चुके भारत के 2017 फीफा अंडर-17 वर्ल्ड कप टीम के कप्तान अपने परिवार के साथ “शांति” की खोज में एक बार फिर मैदान में जूझते हुए देखे गए। 

आपको बता दें, कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के बढ़ते प्रकोप की वजह से अंतरराष्ट्रीय और घरेलू फुटबॉल पर विराम लगने के बाद 19 वर्षीय अमरजीत मणिपुर में अपने परिवार के साथ घर पर हैं। इम्फाल के बाहरी इलाके में स्थित अपने गांव में वह इस समय खुद को धान की खेती में व्यस्त रख रहे हैं।

अमरजीत सिंह ने ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) के साथ एक साक्षात्कार में कहा, “जहां से आप आते हैं, वहां जाकर जमीन से जुड़े कामों को करने में कोई शर्म की बात नहीं है। मेरा परिवार कई पीढ़ियों से खेती और किसानी कर रहा है।”

इस युवा खिलाड़ी ने स्वीकार किया कि वह अपने फुटबॉल करियर की वजह से खेतों में ज्यादा समय नहीं दे पाए, क्योंकि खेल ने उन्हें ज्यादातर अपने घर से दूर ही रखा। लेकिन वह मानते हैं कि उन्हें "खेतों पर शांति" मिलती है।

परिवार का त्याग और संघर्ष

एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने की वजह से अमरजीत सिंह बहुत ही निचले स्तर से संघर्ष करते हुए आगे बढ़े। यही वजह है कि वह इस बात को बहुत अच्छी तरह समझते हैं कि उनके परिवार की मेहनत और संघर्ष की वजह से वो आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं।

उन्होंने कहा, "उन्होंने (मेरे परिवार) ने मुझे बहुत कुछ दिया है और मुझे एक फुटबॉलर बनाने के लिए बहुत बलिदान दिए हैं। अब धान की खेती में तो कम से कम मैं उनकी मदद कर ही सकता हूं।"

''इसके साथ ही यह मुझे मेरे पिता के साथ वक्त गुज़ारने का भी अवसर देता है। उन्हें यह देखकर खुशी होती है कि उनका बेटा खेती करने में उनकी मदद कर रहा है। मैं भी इससे उन्हें यह दिखा पाता हूं कि मैं उन मुश्किलों को आज भी नहीं भूला हूं जिनका सामना हमने एक साथ मिलकर किया था।''

उन्होंने आगे कहा, "मैं हमेशा यहां नहीं रहता हूं, ज़्यादातर मेरे माता-पिता या भाई-बहन ही रहते हैं, जो खेती का सारा काम देखते हैं। अब जब मेरे पास समय है, तो मुझे उन्हें कुछ वापस देने में बहुत ख़ुशी महसूस हो रही है।”

सुकून और शांति की तलाश

बीते तीन वर्षों में अमरजीत सिंह का भारतीय फुटबॉल में रैंक को देखते हुए जो सुधार हुआ है वह बहुत सराहनीय है।

FIFA अंडर-17 विश्व कप में भारत की कप्तानी करने के कुछ समय बाद यह युवा खिलाड़ी इंडियन सुपर लीग की टीम जमशेदपुर एफसी में शामिल हो गया और इस सीज़न में उन्होंने अपना आईएसएल डेब्यू किया।

अंतरराष्ट्रीय मंच की बात करें तो अमरजीत सिंह ने 2019 की शुरुआत में थाईलैंड में किंग्स कप के ज़रिए सीनियर इंडिया टीम में अपनी शुरुआत की और उनके खेल प्रदर्शन की मुख्य कोच इगोर स्टिमैक (Igor Stimac) और टीम के सीनियर खिलाड़ियों जैसे कि सुनील छेत्री ने काफी सराहा।

साल 2019 में अमरजीत सिंह कियाम ने भारत की सीनियर टीम में किया था अपना डेब्यू।
साल 2019 में अमरजीत सिंह कियाम ने भारत की सीनियर टीम में किया था अपना डेब्यू।साल 2019 में अमरजीत सिंह कियाम ने भारत की सीनियर टीम में किया था अपना डेब्यू।

अमरजीत सिंह कहते हैं, अपने परिवार के साथ खेती करना एक सराहनीय कदम है।

''हमेशा शौक़ के तौर पर कुछ काम करते रहना अच्छा होता है। कुछ ऐसा जो हर दिन कुछ घंटों के लिए आपके दिमाग़ को फुटबॉल से दूर रखने में मदद करता है। मुझे लगता है कि खेती में हाथ बटाना मेरे लिए उस अलग काम के जैसा ही है।''

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