विजेंदर सिंह ने अपनी ओलंपिक मेडल जीत के प्रेरणादायक संदेश का किया खुलासा

भारतीय बॉक्सर ने बीजिंग ओलंपिक में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था।

लेखक अरसलान अहमर ·

साल 2008 में बीजिंग में हुआ ओलंपिक खेल भारत के लिए ख़ास रहा था। दरअसल, इस ओलंपिक खेल में भारत ने बॉक्सिंग का अपना पहला ओलंपिक मेडल हासिल किया था और यह कारनामा करने वाले मुक्केबाज़ थे विजेंदर सिंह। इसके बाद भारत ने बॉक्सिंग में अपना दूसरा मेडल लंदन 2012 ओलंपिक में जीता जब भारतीय महिला मुक्केबाज़ मैरी कॉम ने देश को मेडल जीतकर गौरांवित किया। इसके बाद से ही भारत में मुक्केबाज़ी को एक खेल के रूप में नया आयाम मिला। अमित पंघाल और मनीष कौशिक जैसे प्रतिभावान मुक्केबाज़ आज देश का नाम रोशन कर रहे हैं। आपको बता दें 2019 में हुई वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में इन दोनों मुक्केबाज़ों ने मेडल अपने नाम किया था। 

लेकिन यहां हम बात कर रहे हैं विजेंदर सिंह की जिन्होंने एक दशक से भी ज़्यादा समय पहले अपने शानदार खेल से पूरे विश्व में भारत को गौरांवित था। हाल ही में उन्होंने बीजिंग की अपनी सुनहरी जीत से जुड़ी बात को उजागर किया है। दरअसल, विजेंदर ने उस दौरान के तत्कालीन कोच जीएस संधु के साथ ड्रेसिंग रूम में हुई अपनी बात-चीत का खुलासा किया।

मेडल जीतने का था पूरा भरोसा

बीजिंग 2008 के किस्से को याद करते हुए विजेंदर ने कहा "मेडल के लिए मुकाबले से पहले जब मैं चेंजिंग रूम में अपने कोच जीएस संधु के साथ था और उस समय कोच काफी दबाव महसूस कर रहे थे। उन्होंने उस दौरान मुझसे कहा हम दो पदक जीत चुके हैं। अभिनव बिंद्रा ने स्वर्ण पदक और कुश्ती में भी हमने पदक जीता है। अखिल और जीतेंद्र उस समय अच्छा कर रहे थे। कोच ने कहा कि अगर हम यहां मेडल नहीं जीतते हैं, तो जब हम भारत वापस लौटेंगे तो यह हमारे लिए अपमानजनक होगा।"

नई दिल्ली में एक इवेंट में बात करते हुए विजेंदर ने आगे बताया “सुशील (कुमार) ने तब तक कुश्ती में पदक जीता था। मैं उस समय चेंजिंग रूम में था और मैंने कोच से कहा आप परेशान न हो, हम इस बार पदक जीतेंगे।"

क्वार्टर फाइनल मुकाबले में इक्वाडोर के कार्लोस गोंगोरा को मात देते हुए विजेंदर ने कोच से किया गया वादा निभाया। उनके लिए अफसोसनाक बात यह रही कि विजेंदर क्यूबा के एमिलियो कोरेया के खिलाफ सेमीफाइनल में हार गए, लेकिन उन्होंने फिर भी भारत को बॉक्सिंग में ओलंपिक पदक जीतकर इतिहास रचा।

प्रो बॉक्सिंग में दिखा चुके हैं अपना दम

34 वर्षीय विजेंदर, 2008 के ओलंपिक खेलों के बाद होने वाले राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में पदक जीतने के लिए आगे बढ़े, इसके बाद उन्होंने पेशेवर मुक्केबाजी में अपनी किस्मत आज़माई, जहां उन्होंने अमेरिकी कंपनी - टॉप रैंक के साथ करार किया।

एक पेशेवर मुक्केबाज के रूप में, विजेंदर ने काफी सफलताएं हासिल की। उन्होंने लगातार 11 मुकाबले जीते जिनमें से 8 जीत नॉकआउट के माध्यम मिली। 2020 के टोक्यो खेलों से पहले अमैच्युर बॉक्सिंग में वापसी करने के अपने इरादे के संकेत के बाद, विजेंदर सिंह अब अपने पेशेवर मुक्केबाजी अनुभव का इस्तेमाल भारत की ओलंपिक संभावनाओं के लिए करना चाहते हैं।

आपको बता दें एशिया/ओशिनिया ओलंपिक क्वालिफायर 3-14 फरवरी 2020 तक चीन के वूहान शहर में होने वाले हैं। अगले साल 13-24 मई को पेरिस में फाइनल वर्ल्ड क्वालिफायर होगा, जो यह तय करेगा कि टोक्यो 2020 का टिकट किसे मिलेगा।