माटेयो पेलिकोन मेमोरियल में गोल्ड जीत विनेश ने मारी दहाड़ 

विनेश फोगाट ने माटेयो पेलिकोन मेमोरियल में गोल्ड जीत कर टोक्यो 2020 की तरफ अच्छे संकेत दिखाए। 

लेखक जतिन ऋषि राज ·

साल 2019 ओलंपिक गेम्स का साल है और ऐसे में भारत की स्टार पहलवान का फॉर्म में आना मानों सोने पर सुहागा है। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं विनेश फोगाट की और उन्होंने माटेयो पेलिकोन मेमोरियल में खेलते हुए अपने सीज़न की शुरुआत दुरुस्त अंदाज़ में की है। 

शुक्रवार को लुइसा एलिजाबेथ वाल्वरडे के खिलाफ खेलते हुए विनेश ने 53 किग्रा में 4-0 से जीत दर्ज कर अपने कौशल का प्रमाण दिया। इतना ही नहीं ख्रीस्तना बेरेज़ा के खिलाफ 12-0 से जीत हासिल कर उन्हें मैट पर धराशाई किया। अब बारी थी क्वार्टरफाइनल की और इस भारतीय पहलवान को कड़ी टक्कर देने के लिए चीन की लुन्नान लुओ तैयार थी। एक समय चीनी खिलाड़ी ने 5-2 से बढ़त अपने हक में रखी लेकिन विनेश ने पलटवार कर मुकाबले को 15-5 से अपने हित में किया।

प्रतियोगिता में प्रभावशाली प्रदर्शन

यह विनेश के लिए एक ख़ास अनुभव रहा, क्योंकि वे जिन प्रतिद्वंदियों के साथ लड़ीं हैं वहीं उन्हें जापान में होने वाले ओलंपिक गेम्स में भी मिल सकते हैं। भारतीय स्टार रेसलर ने पीटीआई से बात करते हुए कहा “यह इवेंट ख़ास इसलिए भी था क्योंकि मैं इन पहलवानों के खिलाफ कभी खेली नहीं हूं और Pang के खिलाफ मैं तीन बार खेल चुकि हूं। यह जानना बहुत ज़रूरी था कि उनकी तकनीक वही है या बदली है। इस प्रतियोगिता ने हमे अपने प्रतिद्वंदियों को भांपने का मौका दिया है।”

“बेरेज़ा ने अच्छा खेल दिखाया, यहां आने से पहले मैं इनके साथ ट्रेनिंग कर चुकि हूं। चीनी खिलाड़ियों ने भी अच्छा दम दिखाया। मैं उनके खिलाफ खेलने के लिए बेहद उस्ताहित थी, क्योंकि मैं उनके खिलाफ खेली ही नहीं थी।”

नाज़ुक निर्णय को किया सही साबितहालांकि 50 किग्रा में सफलता हासिल करने के बाद 53 किग्रा में खेलने का निर्णय बहुत बड़ा था। उन्होंने आगे कहा “50 किग्रा में मैं सबका खेल जानती हूं, और अब 53 किग्रा के दावेदारों के खेल को भी समझने लगी हूं। मुझे समझ आ रहा है कि कहा ज़ोर लगाना है और कहां दिमाग। मेरे हिसाब से मैं 60 से 70 प्रतिशत सीख गई हूं।”

टोक्यो 2020 से पहले माटेयो पेलिकोन मेमोरियल जैसी बड़ी प्रतियोगिताओं में खेलना मानों कल के लिए तैयार होना है। 2020 ओलंपिक गेम्स से पहले खेल के साथ अच्छा प्रदर्शन विनेश के मनोबल के लिए सही काम करेगा। विनेश ने अलफ़ाज़ साझा करते हुए कहा “इंटरनेशनल प्रतियोगिता में खेलने से हम खुद की खामियों और ताकतों को सही परख सकते हैं। यह हमे बताता है कि हम सही जा रहे हैं या नहीं।”

बेहतरी के क्षेत्र

ज़ाहिर सी बात है विनेश और कोच वोलेर अकोस ने खामियों को साझा कर उस पर मुकम्मल मुशक्कत करनी शुरू कर दी होगी। “हम लोग ताकत और स्टैमिना पर ज़ोर डाल रहे हैं। मैं ज़्यादा अंक खड़े हो कर प्राप्त करती हूं ना कि ग्राउंड रेसलिंग से। जनवरी में हम मैट ट्रेनिंग भी शुरू करेंगे। बदलाव लाना आसान नहीं है लेकिन पिछली जनवरी से अब तक मैं बहुत बेहतर हुई हूं और कोच भी खुश हैं

माटेयो पेलिकोन मेमोरियल के बाद अब विनेश फोगाट फरवरी 18 से 23 तक दिल्ली में होने वाले एशियन चैंपियनशिप में खेलती दिखेंगी।