वाडा ने रूस पर लगाया 4 साल का प्रतिबंध, टोक्यो ओलंपिक से हुआ बाहर

विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) ने रूस पर अगले 4 साल तक सभी प्रमुख प्रतियोगिताओं में भाग लेने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

लेखक सैयद हुसैन ·

रूस को चार सालों के लिए विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी यानी वाडा ने प्रमुख प्रतियोगिताओं से प्रतिबंधित कर दिया है। सोमवार, 9 दिसंबर को लौसाने में हुई वाडा एक्सिक्यूटिव समिति की बैठक में यह फ़ैसला लिया गया, जहाँ सर्वसम्मति से इस बात पर मुहर लगी कि रशियन डोपिंग रोधी एजेंसी (रुसाडा) वाडा के मापदंडो पर खरी नहीं उतर रही।

दरअसल, यह फ़ैसला इसलिए लिया गया कि वाडा को रुसाडा से जो भी नमूने मिले थे उसमें छेड़-छाड़ नज़र आई थी। यहाँ तक कि दिसंबर 2018 और जनवरी 2019 में कुछ नमूने जो पॉज़िटिव पाए गए थे उनके साथ भी छेड़-छाड़ हुई थी या उन्हें नष्ट करने की कोशिश की गई थी।

वाडा के अध्यक्ष क्रेग रीडी ने कहा कि “कई सालों से रूस साफ़-सुथरा खेल नहीं खेल रहा था, सितंबर 2018 में एक्सको के द्वारा रशियन डोपिंग रोधी एजेंसी की जो स्थापना हुई थी उसका लगातार उल्लंघन किया जा रहा था जिसके बाद यह कठोर फ़ैसला आज लेना पड़ा।“

उन्होंने आगे कहा “रुसाडा को हमने रियायत भी दी थी कि वह वाडा के साथ सही तरीक़े से काम करे लेकिन जब लगातार डोपिंग में छेड़-छाड़ की घटनाएँ रूसाडा के द्वारा होती रही तो मजबूरन हमें कठोर फ़ैसला लेना पड़ा।“

रुसाडा के पास अब 21 दिनों का समय है कि वह इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ कोर्ट ऑफ़ आर्बिट्रेशन फ़ॉर स्पोर्ट (सीएएस) में अपील कर सकता है। इन सबके बीच रूस के एथलीटों के लिए ये रास्ता छोड़ दिया गया है कि वो न्यूट्रल यानी तटस्थ झंडे के तले प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सकते हैं जिसमें टोक्यो 2020 ओलंपिक भी शामिल है। ठीक उसी तरह जिस तरह 2018 विंटर ओलंपिक में रूस के कई एथलीट्स ने तटस्थ झंडे के तले हिस्सा लिया था।

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ यानी IOC ने भी वाडा के इस फ़ैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। बयान में कहा गया “वाडा के इस फ़ैसले को हमारा समर्थन है, जो फ़ैसला वाडा की तरफ़ से लिया गया है वो ठीक उसी दिशा में उठाया गया क़दम है जो ओलंपिक संघ भी कहता चला आया है।‘’

26 नवंबर 2019 को दिये गये IOC के स्टेटमेंट को आप यहाँ पढ़ सकते हैं

रशिया को ओलंपिक से प्रतिबंधित क्यों किया गया था ?

रुसाडा के पूर्व अध्यक्ष ग्रेगोरी रेदचेन्को 2016 में यूनाइटेड स्टेट्स में जाकर छिप गए थे और उन्होंने इस बात को स्वीकारा था कि सोचा ओलंपिक्स में उन्होंने डोपिंग को छुपाने की कोशिश करी थी।

जिसके बाद वाडा ने एक जाँच की थी और 2016 में उन्होंने पहली रिपोर्ट सौंपी थी। रिचर्ड मैकलेरेन कि इस रिपोर्ट में इस बात का ख़ुलासा भी हुआ था कि सोचा 2014 विंटर ओलंपिक में डोपिंग हुई थी और इसमें रूस के खेल मंत्रालय की भी संलिप्तता की संभावना से भी इंकार नहीं किया गया था। रूसी खेल मंत्रालय पर डोपिंग के बाद यूरीन सैंपल में छेड़-छाड़ और डोपिंग को अनदेखा करने का भी शक रहा है।

इसके बाद वाडा ने रुसाडा को सही से काम नहीं करने का ज़िम्मेदार ठहराया था, साथ ही साथ रूस को रियो ओलंपिक 2016 से प्रतिबंधित करने की सिफ़ारिश भी की थी। हालांकि उस समय अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ (आईओसी) ने वाडा की इस सिफ़ारिश पर मुहर नहीं लगाई थी

बल्कि आईओसी ने इस बात का फ़ैसला सभी खेलों के अंतरराष्ट्रीय संघों पर छोड़ दिया था कि वह देखें कि रूस के एथलीट भाग ले सकते हैं या नहीं।

इसके बाद उस समय की एथलीट संघ आईएएएफ़ ने रूस को सभी प्रमुख प्रतियोगिताओं से प्रतिबंधित कर दिया था। सिर्फ़ लॉन्ग जंपर दारिया क्लिशिना को भाग लेने की इजाज़त दी थी।

दारया क्लिशिना: "मैं अपने ओलंपिक अनुभव को सकारात्मक तरीके से बदलना चाहती हूं"

यह लंबी कूद की एथलीट रियो में रूसी ट्रैक और फील्ड टीम की एकमात्र सदस्य थी, ...

आईओसी ने इसके बाद दो डिसिपिलिनरी कमीशंस बनाए, जिसमें एक का काम था रूस के वैसे एथलीट की जांच करना जिनपर डोपिंग में संलिप्त होने का आरोप था और दूसरे कमीशन का काम था कि इस बात की जांच करे कि क्या रूसी खेल मंत्रालय की भी डोपिंग में संलिप्ता पाई गई है।

इसके बाद दोनों ही कमीशन ने अपनी अपनी रिपोर्ट 2017 में पेश की थी, जिसमें ये साफ़ कहा गया था कि डोपिंग हुई है और इसमें छेड़छाड़ भी की गई है। इस रिपोर्ट में कड़े फ़ैसले लेने की भी सिफ़ारिश की गई थी।

आईओसी एक्ज़ेक्यूटिव बोर्ड ने भी इस रिपोर्ट को पारित कर दिया और तत्काल प्रभाव से आर ओ सी को निलंबित कर दिया था। लेकिन कई एथलीटों को एक टेस्ट प्रक्रिया के तहत भाग लेने की इजाज़त भी दी गई, जिसके बाद प्योंगचेंग में हुए 2018 शीतकालीन ओलंपिक में रूस के 168 खिलाड़ियों ने एक तटस्थ झंडे के तले प्रतियोगिता में भाग लिया था, और इन्हें ओलंपिक एथली ऑफ़ रूस यानी ओ ए आर का नाम दिया गया था।

रूसी खेल मंत्रालय और आर ओ सी के सदस्यो को भी खेल के दौरान उपस्थित रहने से प्रतिबंधित कर दिया गया था और रूस के झंडा या राष्ट्रीय गान की भी इजाज़त नहीं थी।

हालांकि इसके बाद फिर आईओसी ने रुस पर लगा प्रतिबंध इस शर्त के साथ हटा दिया था कि आगे वह दोबारा यह ग़लती नहीं करेगा।

रुसाडा का क्या हुआ?

आरओसी की बहाली के बाद, वाडा ने रुसाडा से इस बात का भरोसा लिया कि दोबारा ऐसी ग़लती न हो। जिसके बाद उनपर से पिछले साल सितंबर में वाडा एक्ज़ेक्यूटिव कमीटी ने उन पर से प्रतिबंध हटा दिया था।

लेकिन एक साल बाद वाडा को एक बार फिर रुसाडा के ख़िलाफ़ जांच समीति का गठन करना पड़ा, क्योंकि यह बात फिर सामने आई कि जनवरी 2019 में मॉस्को लैब में नमूनों के साथ छेड़छाड़ पाई गई है। जिसके बाद दो हफ़्ते पहले वाडा कॉम्पलियांस रिव्यू कमीटी ने एक बार फिर रुसाडा को प्रतिबंधित करने की सिफ़ारिश की।

टेक्नीशियन नतालिया बोचकार्योवा और इल्या पोडोलस्की मई 2016 में मास्को में रूसी एंटी-डोपिंग प्रयोगशाला में काम करते हुए।

वाडा ने रूस के ख़िलाफ़ किन प्रतिबंधों की सिफ़ारिशों की ?

रुसाडा पर प्रतिबंध की सिफ़ारिश के साथ साथ, वाडा कॉम्पलियांस रिव्यू कमीटी ने रूस को भी खेलों की दिशा में कई क़दम उठाने की सिफ़ारिश की है, जिनपर अगले चार सालों तक ध्यान देना ज़रूरी है। इनमें शामिल हैं:

· रूस को किसी भी प्रमुख प्रतियोगिताओं की मेज़बानी न दी जाए। (इसमें ओलंपिक और वर्ल्ड चैंपियनशिप शामिल है)

· हर प्रमुख प्रतियोगिता में रूस के झंडे पर प्रतिबंध हो, यानी उसे न फहराया जाए।

· रूसी खेल मंत्रालय के सदस्य और आर ओ सी के सदस्यों को किसी भी प्रमुख प्रतियोगिता में न जाने दिया जाए।

लेकिन इन सब के साथ-साथ रूस के एथलीटों के लिए यह रास्ता छोड़ दिया गया है कि वे तटस्थ झंडे के तले ओलंपिक और दूसरी प्रतियोगिताओं में शिरकत कर सकते हैं। जिसका मतलब हुआ कि रूस के एथलीट टोक्यो 2020 ओलंपिक, बीजिंग 2022 विंटर ओलंपिक और सेनेगल में होने वाले 2022 यूथ समर ओलंपिक में तटस्थ झंडे के तले हिस्सा ले सकते हैं।

रूस को आइस हॉकी में वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप और वर्ल्ड चैंपियनशिप 2023 की मेज़बानी भी करनी है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय आइस हॉकी संघ के अध्यक्ष रेने फ़ासेल ने टीओएसएस को कहा है कि वह इसे नहीं हटा सकते क्योंकि इसके लिए मैदानों की तैयारी तेज़ी से जारी है।

फ़ासेल ने कहा, ‘’मैं नहीं कह सकता कि क़ानूनी तौर पर हम इसे कैसे बदल सकते हैं और मुझे लगता भी नहीं कि ये बदल पाएगा। ये एक क़ानूनी बंधन है, हमारे पास कई कॉन्ट्रैक्ट हैं, हमारे पास प्रायोजक हैं, मुझे लगता है ये बदल पाना मुमकिन नहीं।‘’