मैं युवाओं को वो सब कुछ देना चाहता हूं, जो मुझे नहीं मिला- रोहन बोपन्ना

भारतीय डबल्स स्टार, रोहन बोपन्ना टेनिस अकादमी के माध्यम से युवाओं को एक ही छत के नीचे दे रहे शिक्षा और टेनिस में प्रशिक्षण हासिल करने का विकल्प 

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

एक वैश्विक खेल खेलने वाले भारतीय के रूप में रोहन बोपन्ना (Rohan Bopanna) ने अमीर और वंचितों के बीच की खाई को करीबी से देखा है। पिछले 17 वर्षों में उन्होंने स्पेन, फ्रांस और यूएसए जैसे देशों के खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा की है। वहां विकास कार्यक्रमों में पैसा खर्च कर और संसाधन लगाकर कई सालों तक नई प्रतिभाओं को तराशा जाता है।

जबकि भारत में एक राष्ट्रीय अकादमी या कोचिंग कार्यक्रम भी नहीं है। 40 वर्षीय, 2016 में शुरू की गई रोहन बोपन्ना टेनिस अकादमी के जरिये इस परिदृश्य में बदलाव लाने की उम्मीद कर रहे हैं।

ऑस्ट्रेलियन ओपन के लिए शनिवार को मेलबर्न पहुंचे बोपन्ना ने ओलिंपिक चैनल से बातचीत में कहा, "जो मुझे नहीं मिला, मैं वो सब कुछ नौजवानों को देने की कोशिश कर रहा हूं। सबसे पहले हम एक जगह पर बोर्डिंग, लॉजिंग, शिक्षा और टेनिस का विकल्प दे रहे हैं। जिस जगह पर वो रह रहे हैं, वहां से टेनिस कोर्ट तक पहुंचने में उन्हें चार से पांच मिनट का समय लगे।"

उन्होंने कहा, "हम खासतौर पर युवाओं को टेनिस का विशिष्ट प्रशिक्षण देने पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हमारे पास चेलस्टन पिंटो द्वारा संचालित एक अच्छी टीम है। वो यह समझते हैं कि टेनिस खिलाड़ियों को विशेष रूप से क्या चाहिए। वह अन्य एथलीटों को भी प्रशिक्षित करते हैं और खुद फुटबॉल खेलते हैं। इसलिए वो जानता है कि टेनिस खिलाड़ियों को अभ्यास के विभिन्न सेटों की जरूरत होती है। यह वही संरचनात्मक शुरुआत है जिसे हम करने की कोशिश कर रहे हैं। हम यह नहीं कह रहे हैं कि कल वे चैंपियन बनेंगे, लेकिन हम उन्हें रास्ता दिखा रहे हैं।"

कुर्ग निवासी बोपन्ना ने अपेक्षाकृत देरी से 11 साल की उम्र में इस खेल में प्रवेश किया। जैसा कि उनके आसपास कोई टेनिस अकादमियां भी नहीं थी। इस कारण उन्हें पुणे, महाराष्ट्र जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

2017 फ्रेंच ओपन में कनाडा के गैब्रियला डाब्रोवस्की के साथ मिश्रित युगल खिताब जीतने वाले बोपन्ना कहते हैं, "चार साल तक मैंने साइकिल से रोजाना करीब 15-16 किलोमीटर का सफर तय किया।"

टेनिस खेलते हुए रोहन बोपन्ना

उन्होंने कहा, "मैं नवसहायाद्री में रहते हुए चार किलोमीटर दूर डेक्कन जिमखाना में प्रशिक्षण ले रहा था। फिटनेस ट्रेनिंग सुबह PYC में होती थी और टेनिस की ट्रेनिंग दोपहर में डेक्कन जिम में होती थी। इस तरह रोजाना करीब 16 किलोमीटर का सफर हो जाता था। इस दौरान मैं एक छात्रावास में रहता था।"

उन्होंने तय कर लिया कि वो इस दौर के युवाओं के लिए उच्च प्रदर्शन केंद्र बनायेंगे। ताकि उन्हें सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह तक जाने में ही अपनी अतिरिक्त ऊर्जा नहीं खपानी पड़े। उन्हें एक ही छत के नीचे टेनिस प्रशिक्षण, पौष्टिक भोजन, शिक्षा और शारीरिक प्रशिक्षण सब कुछ मिले।

वह कहते हैं, "बोर्डिंग को हम एक विकल्प के रूप में दे रहे हैं। अगर वो स्कूल में ही दाखिला चाहते हैं तो ऐसा भी कर सकते हैं और वे केवल टेनिस प्रशिक्षण के लिए ही आना चाहते हैं तो आ सकते हैं।"

उन्होंने कहा, "हम बच्चों को छात्रवृत्ति दे रहे हैं। कई अभिभावक सोचते हैं कि इसके पीछे शायद हमारा कोई दूसरा उद्देश्य है। क्योंकि इससे पहले किसी और ने ऐसा कुछ नहीं किया। यहां हम उन्हें 100% तक छात्रवृत्ति प्राप्त करने का मौका दे रहे हैं। शिक्षा और टेनिस दोनों साथ में। क्योंकि हम जानते हैं कि शायद कल टेनिस में ठीक ना भी हो, लेकिन कम से कम इसके साथ शिक्षा भी चल रही है।" बोपन्ना ने प्री-सीजन में अपनी अकादमी में प्रशिक्षण लिया।

उन्होंने कहा, "यह अच्छा ग्रुप था जिसमें 14 साल के बच्चों से लेकर मेरी उम्र यानि 40 साल के खिलाड़ी शामिल थे। हमने बैंगलोर स्थित अकादमी के प्रशिक्षण शिविर में ढाई सप्ताह का बेहतर समय गुजारा था। इसमें करीब 18-20 विद्यार्थी शामिल थे। इसमें हमने दो फिजियो को भी शामिल किया था। यह अच्छा मिश्रण था और हमने एक-दूसरे को आगे बढ़ाया।"

भारतीय डबल्स स्टार ने 2021 की शुरुआत मेलबर्न में ATP इवेंट से करेंगे, जो ऑस्ट्रेलियन ओपन के लिए वार्म-अप का काम करेगा। बोपन्ना, पुर्तगाल के जोआओ सौसा के साथ दो टूर्नामेंट खेलेंगे।