मेरे पिता ही मेरी प्रेरणा, उन्हीं के सपने को कर रहा हूं पूरा: जेरेमी लालरिनुंगा

भारत का यह वेटलिफ्टर नए साल में ओलंपिक के लिए जगह बनाने की कोशिश कर रहा है। वह बीते सीज़न में मिले हर मौके पर अच्छा प्रदर्शन करने में सफल रहे हैं।  

लेखक ओलंपिक चैनल ·

जेरेमी लालरिनुंगा भले ही महज 17 वर्ष के हैं, लेकिन वह जब भी वेटलिफ्टिंग के मंच पर कदम रखते हैं तो अपने शरीर से कहीं अधिक वजन उठाकर सभी को अचम्भित कर देते हैं। 2018 युवा ओलंपिक खेलों में उन्होंने स्वर्ण पदक के लिए शानदार प्रदर्शन किया। जहां वह व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाले दूसरे भारतीय बन गए। आइजोल का यह खिलाड़ी अपनी वरिष्ठ साथी खिलाड़ी साइकोम मिराबाई चानू के साथ भारतीय भारोत्तोलन (वेटलिफ्टिंग) के लिए मशाल धारक रहा।

भारत के जेरेमी लालरिनुंगा इस साल टोक्यो में होने वाले ओलंपिक खेलों में अपनी जगह बनाने के इच्छुक हैं। चित्र साभार: खेलो इंडिया 

बचपन से ही इस युवा खिलाड़ी के जीवन में कभी भी प्रेरणा की कमी नहीं रही। एथलीटों के परिवार में जन्मे लालरिनुंगा ने रविवार को कहा कि वह सीनियर स्तर के विभिन्न वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करके अपने पिता के सपने को पूरा कर रहे हैं।

मार्गदर्शक बने पिता

उन्होंने कहा, “मेरे करियर में मेरे पिता ही सबसे बड़ी प्रेरणा रहे हैं। देश के खेल मंत्रालय द्वारा आयोजित अखिल भारतीय आयु-वर्ग प्रतियोगिता खेलो इंडिया द्वारा जारी एक बयान में उन्होंने कहा, जब से मैंने भारोत्तोलन में जाने का फैसला किया, तब से उन्होंने मेरा पूरा समर्थन किया है”।

आपको बता दें, इस वेटलिफ्टर के पिता जूनियर मुक्केबाज़ी चैंपियन थे। लेकिन उन्हें कभी देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका नहीं मिला। लालरिनुंगा ने कहा, मेरे पिता एक मुक्केबाज़ थे, उन्होंने खिलाड़ी के तौर पर हर कदम पर अपने अनुभव मुझसे साझा किए हैं। वह जूनियर चैंपियन थे, लेकिन दुर्भाग्य से उन्हें देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका नहीं मिला। इसलिए अब मैं उनके सपने को साकार कर रहा हूं"।

टोक्यो ओलंपिक में जगह बनाने की कोशिश

यह खिलाड़ी इस साल टोक्यो में होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए जगह बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने इस साल 67 किग्रा भार वर्ग में दो रजत पदक जीते हैं। पहला थाईलैंड में ईजीएटी कप अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में और दूसरा रजत पदक छठे कतर अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में जीता।

लालरिनुंगा ने कहा, “मैं 2020 ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने की तैयारी कर रहा हूं। ओलंपिक क्वालिफिकेशन के लिए आखिरी टूर्नामेंट इस साल अप्रैल में होगा। मैं उस प्रतियोगिता के लिए जमकर तैयारी कर रहा हूं”।

यूथ गेम्स से खिलाड़ियों को मिलता है अनुभव

खेलो इंडिया के पहले और दूसरे सत्र में स्वर्ण जीतने वाले जेरेमी ने कहा कि इससे युवा खिलाड़ियों को अच्छा अनुभव मिलता है। उन्होंने कहा, “युवा खिलाड़ियों को खेलों इंडिया यूथ गेम्स में अच्छा अनुभव मिलता है। यह प्रतियोगिता अंतरराष्ट्रीय स्तर की है। जो सभी खिलाड़ियों को एक अच्छा मंच प्रदान करती है।”