चावल के खेतों से लेकर ट्रैक और फील्ड तक: भारतीय स्प्रिंटर हिमा दास की कहानी

धींग एक्सप्रेस के नाम से मशहूर इस खिलाड़ी ने अपना नाम इंटरनेशनल लेवल पर कमाया और कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदक अपने नाम किए।

लेखक लक्ष्य शर्मा ·

भारतीय धावक हिमा दास (Hima Das) के पहले कोच उनके पिता थे और वह चावल के किसान थे। इसी कारण से वह कई सालों तक सुबह 4 बजे दौड़ लगाती थी, खास बात यह है कि वह धान के खेतों में ही प्रैक्टिस करती थीं।

इसके बाद वह दिन में अपने पिता की खेत में जुताई करने में मदद करती थी। हिमा दास का धिंग गांव आसाम में है, जहां रनिंग ट्रैक नहीं था लेकिन हिमा दास के पास जो कुछ था उन्होंने उससे ही ट्रेनिंग की। हिमा दास ने छोटे से गांव से ही अपने करियर की शुरुआत की।

जीवन के शुरुआती सालों में हिमा दास को फुटबॉल खेलना पसंद थे लेकिन उन्हें जल्दी ही इस बात का आभास हो गया था कि केवल एक ही रास्ते पर चलकर वह अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर सकती।

 इसके बाद उन्होंने फुटबॉल से रनिंग में करियर बनाने का फैसला किया और इसमें उनके पिता ने भी उनका बहुत साथ दिया।

लाइवमिंट से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे फुटबॉल खेलना पसंद था, यहां तक की मुझे फुटबॉल प्लेयर ही बनना था लेकिन सच कहूं तो मुझे नहीं पता था कि फुटबॉल में मेरे करियर का क्या होगा। मैं असम के एक क्लब में स्ट्राइकर की भूमिका में भी खेली थी। इस भारतीय धावक ने बताया कि “मैं अपने देश का प्रतिनिधित्व करना चाहती थी और फुटबॉल में मेरा करियर क्या होगा, ये मुझे पता नहीं था इसलिए मैंने कुछ और करने का सोचा”।

इसका फायदा हिमा को जल्दी ही मिला और उन्होंने 100 मीटर की स्थानीय रेस में गोल्ड मेडल जीता, ये उनका पहला पदक था और अब जीतने का सिलसिला चल ही रहा है। इसके 5 साल बाद 2018 में ये भारतीय धावक आईएएएफ वर्ल्ड अंडर-20 चैंपियनशिप (IAAF World U20 Championships) में गोल्ड जीतने वाली भारत की पहली एथलीट बनीं।

करियर को बदलने वाला साल 2018

धिंग एक्सप्रेस के नाम से मशहूर हिमा दास ने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 ऑस्ट्रेलिया में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स की। इसके बाद उन्होंने उन्होंने फेडरेशन कप में उन्होंने 400 मीटर रेस जीती।

किसी खिलाड़ी को यह नहीं पता होगा कि कॉमनवेल्थ गेम्स क्या होते हैं और दो साल बाद उन्होंने ना केवल उसमें हिस्सा लिया बल्कि अपा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (51.32) करते हुए छठा स्थान हासिल किया।

इसके तीन महीने बाद ही उन्होंने शानदार प्रदर्शन की बदौलत गोल्ड मेडल जीत लिया। फिनलैंड में हुई वर्ल्ड अंडर-20 चैंपियनशिप की 400 मीटर रेस में उन्होंने 51.46 सेकेंड में रेस पूरी कर इतिहास रच दिया। वर्ल्ड ट्रैक इवेंट में जीत हासिल करने वाली वह भारत की पहली धावक बनीं।

इसके बाद भी हिमा दास को पता नहीं था कि उन्होंने क्या हासिल किया है, जब सोशल मीडिया पर उन्होंने देखा कि पूरा देश उनकी बात कर रहा है, तब जाकर उन्हें अपनी कामयाबी का पता चला।

द क्विंट से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि पहला दिन बिल्कुल साधारण रहा। मैं दौड़ी, मैंने मेडल जीता और फिर मैं सो गई। जब अगल दिन मैंने फेसबुक खोला तो हर तरफ मेरी ही फोटो दिख रही थी। इसने मुझे प्रभावित किया और सही कहूं तो मैं इमोशनल भी हो गई थी।

अब हिमा दास को अपने इमोशन को छुपा कर रखना था कि क्योंकि उनका सफर काफी लंबा था। अगस्त 2018 में जकार्ता में हुए एशियन गेम्स में हिमा दास ने राष्ट्रीय रिकॉर्ड (51.00) बनाते हुए 400 मीटर के लिए क्वालिफाय किया। फाइनल में 50.79 सेकेंड में ही रेस पूरी कर सिल्वर पदक अपने नाम कर लिया।

अभी जर्काता में भारतीय धावक को और कामयाबी देखनी थी। इस खिलाड़ी ने 4x100 वुमेंस पिले रेस में तो गोल्ड जीता ही बल्कि मिक्स्ड रिले कैटेगिरी में भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

इन उपलब्धियों से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि उनका यह साल कैसा बीता। उनके इस शानदार प्रदर्शन को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया।

एक महीने में 5 गोल्ड मेडल

हिमा दास ने अपने इस शानदार सफर को साल 2019 में भी जारी रखा, खासकर जुलाई महीना तो उनके लिए यादगार बन गया। 200 मीटर कैटेगिरी में उन्होंने दो गोल्ड मेडल जीते। पहला गोल्ड मे़ल उन्होंने पोडनेन एथलीट्स ग्रांड प्रिक्स में और दुसरा स्वर्ण कुतनो एथलीट्स मीट में अपने नाम किया।

13 जुलाई को उन्होंने चेक गणराज्य में कल्दो एथलेटिक्स (Kladno Athletics Meet) मीट में 23.43 सेकंड के समय के साथ 200 मीटर में गोल्ड मेडल जीता, वहीं इसके 4 दिन बाद ही टैबोर एथलेटिक्स मीट (Tabor Athletics Meet ) में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 23.25 सेकेंड का समय निकाला।

नोवे मेस्तो में 400 मीटर रेस में उन्होंने एक और गोल्ड जीतकर केवल 19 दिनों में अपना 5वां स्वर्ण पदक जीता, उनके इस प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया पर एक बार फिर आग लग गई।

ओलंपिक के बार में सोचते हैं सभी एथलीट

हालांकि, उनका सफर सिर्फ अच्छा ही नहीं रहा। साल 2019 में वर्ल्ड एथलीट्स चैंपियनशिप से ठीक पहले की चोट फिर से उबर गई, जिसके कारण वह दोहा में होने वाले इस इवेंट में हिस्सा नहीं ले पाईं।

इसके बाद उन्होंने ट्रैक पर लौटने के लिए अपनी जान लगा दी लेकिन चोटों के कारण वह लगातार परेशान ही रही। इस खिलाड़ी के पास पदक जीतने की प्रतिभा तो है लेकिन लगातार होती चोटों के कारण वह ऐसा नहीं कर पाई रहीं।

इस स्टार धावक ने एएनआई एजेंसी को बताया कि सभी एथलीट ओलंपिक के बारे में सोचते हैं और मैं भी यही सोचती हूं। एथलीट के तौर पर जिंदगी काफी छोटी होती है, पता नहीं कब आप चोटिल हो जाएं।”

ओलंपिक का स्थगित होना भारतीय खिलाड़ी के लिए कहीं ना कहीं अच्छी ही खबर है, अब हिमा दास को वापसी करने के लिए और फिट होने के लिए और समय मिल गया है। हिमा दास के पास हासिल करने के लिए अभी बहुत कुछ बचा हुआ है।