जानिए कौन हैं भारतीय महिला बास्केटबॉल की दिग्गज और पद्मश्री से सम्मानित खिलाड़ी अनीता पॉलदुरई?

दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि अपने करियर के दौरान अनीता को अर्जुन पुरस्कार भी नहीं मिला 

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

अनीता पॉलदुराई (Anitha Pauldurai) उन सात खिलाड़ियों में से एक हैं, जिन्हें 26 जनवरी, 2021 को भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री के लिए चुना गया।

पूर्व भारतीय महिला बास्केटबॉल स्टार को पद्मश्री से सम्मानित किया जाना खुशी की बात थी, लेकिन साथ ही आश्चर्य भी था, क्योंकि करियर के दौरान कभी उन्हें अर्जुन पुरस्कार (भारत का सर्वोच्च खेल सम्मान) भी नहीं दिया गया था।

भारतीय महिला बास्केटबॉल टीम में 35 वर्षीय का 17 साल का लंबा और प्रतिष्ठित करियर रहा है। उन्हें लगता है कि पद्मश्री देश के लिए उनके योगदान को सम्मान देने के लिये दिया गया है।

अनीता ने डीटी नेक्स्ट को बताया, "मुझे पद्मश्री पुरस्कार मिलने की खुशी है। मैं अपनी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकती। मैंने लंबे समय तक एक पेशेवर के रूप में बास्केटबॉल खेला है। मुझे लगता है कि यह पिछले कुछ वर्षों में देश के लिए जो कुछ भी हासिल किया, उसका पुरस्कार मिला है।"

आइये जानते हैं कौन हैं अनीता पॉलदुरई और उन्होंने अपने करियर के दौरान भारत के लिए क्या उपलब्धि हासिल की?

पहले वॉलीबॉल, फिर एथलेटिक्स और आखिरकार बास्केटबॉल को चुना

अनीता तमिलनाडु के चेन्नई की रहने वाली हैं। उन्होंने 11 साल की उम्र से बास्केटबॉल खेलना शुरू कर दिया था। हालांकि, बचपन में उसे इस खेल में ज्यादा रुचि नहीं थी।

उनकी पसंद वॉलीबॉल और बाद में एथलेटिक्स में कल्पना की उड़ान भरी। अनीता की लम्बाई को देखते हुए उनके स्कूल के बास्केटबॉल कोच ने उसे इस खेल को आजमाने की सलाह दी। खेलते-खेलते उसकी इसमें गहरी रुचि पैदा होती गई और आखिरकार उसने इसे अपना करियर बना लिया।

उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से वाणिज्य में स्नातक और बास्केटबॉल खेलते हुए अन्नामलाई विश्वविद्यालय से एमबीए किया। उसे स्पोर्ट्स कोटा में दक्षिणी रेलवे में नौकरी मिलेगी।

बास्केटबॉल के एक मैच के दौरान बॉल लेकर आगे बढ़ती अनीता पॉलदुरई।

राइजिंग स्टार क्लब का मिला सहयोग

अनीता ने अपने कॉलेज के दिनों में भारतीय टीम में पदार्पण किया। इसमें काफी हद तक चेन्नई के एक स्थानीय क्लब, राइजिंग स्टार क्लब का योगदान रहा था। क्लब ने उनके करियर को आगे बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाई।

स्कूल के कोच संपथ से हुई शुरुआत को आगे बढ़ाते हुए अनीता ने क्लब की तरफ से खेलते हुए अपनी पहचान बनाई और इसी दौरान उन्हें राष्ट्रीय टीम की खोज करने वालों ने देखा। यह क्लब अभी भी चेन्नई में संचालित है और वहां काफी प्रसिद्ध है। अनीता ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप में 30 से अधिक पदक जीते हैं।

भारतीय टीम के साथ उपलब्धियां

अनीता ने 2001 में भारत की टीम के लिए पदार्पण किया। जल्दी ही वो टीम की मुख्य आधार बन गई और 19 वर्ष की उम्र में कप्तान भी बन गई। इस तरह से वह भारत की सीनियर बास्केटबॉल टीम की अब तक की सबसे कम उम्र की कप्तान बनीं।

उन्होंने आठ सालों तक भारतीय टीम की कप्तानी की और एशियाई चैम्पियनशिप, राष्ट्रमंडल खेल 2006 और एशियाई खेल 2010 जैसी कई बड़ी प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व किया।

वियतनाम में 2009 के एशियाई इंडोर खेलों में अनीता ने भारतीय टीम का नेतृत्व करते हुए रजत पदक जीता था। 2011 में उन्होंने श्रीलंका में दक्षिण एशियाई बीच खेलों में देश को स्वर्ण पदक दिलाया।

2012 में अनीता को थाईलैंड में एक अंतरराष्ट्रीय महिला पेशेवर लीग में खेलने के लिए भी चुना गया था। 2013 में अनीता ने भारत को कतर में शुरुआती 3x3 एशियाई बास्केटबॉल चैंपियनशिप जीतने में मदद की।

मातृत्व सुख और खेल में वापसी

2015 में गर्भावस्था और प्रसव के कारण उन्हें खेल से दूर रहना पड़ा, लेकिन प्रेरणादायक स्टार खिलाड़ी अनीता ने देश के लिए 2017 में वापसी की। ऐसा करने वाली वो पहली महिला बास्केटबॉल खिलाड़ी थीं और बाद में वो स्टेफी निक्सन जैसी अन्य खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनी।

वापसी भी शानदार थी उन्होंने भारत को एक डिवीजन B FIBA महिला एशिया कप विजय के लिए बढ़त दिलाई। इसके बाद उन्होंने संन्यास ले लिया। इसके बाद भारतीय अंडर-16 टीम की कोच बन गई। उनके मार्गदर्शन में टीम ने 2017 के FIBA अंडर-16 महिला एशियन चैम्पियनशिप के डिवीजन B का खिताब अपने नाम किया था।

आखिरकार योगदान को मिला सम्मान

हालांकि, गीथू अन्ना जोस के साथ अनीता को भी भारतीय महिला बास्केटबॉल का चेहरा माना जाता है, लेकिन उन्हें कभी अर्जुन पुरस्कार नहीं मिलना कई को दुर्भाग्यपूर्ण लगता है। पद्मश्री पुरस्कार ने आखिरकार उन्हें वो सम्मान दे ही दिया, जिसकी वो काफी हद तक हकदार थी।

उन्होंने डीटी नेक्स्ट को बताया, "मैं लंबे समय तक एक राष्ट्रीय टीम की खिलाड़ी रही, लेकिन मुझे पर्याप्त सम्मान नहीं मिला। जब आप ऐसे पुरस्कारों से सम्मानित होते हैं, तो आमजन को आपकी उपलब्धियों के बारे में पता चलता है। मुझे लगता है कि इन पुरस्कारों से आने वाले वर्षों में तमिलनाडु बास्केटबॉल को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।