जानिए भाकर व चौधरी की जोड़ी पिस्टल शूटिंग में क्यों है लाजवाब

आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में जारी है जीत का सिलसिला

फिर खिलाड़ी, खेल किसी भी तरह से भेदभाव नहीं करता और सबको बराबर का मौका देता है। भारतीय शूटिंग के दो नए सितारे मनु भाकर और सौरभ चौधरी भी खेल की वजह से ही एक-दूसरे को बेहतर जान पाए और भारत के लिए एकजुट होकर खेल पाए।

एक ज़मीन तो एक आसमान 

मनु भाकर हरियाणा के झज्जर ज़िले की रहने वाली हैं और इनके पिता मर्चेंट नेवी में इंजीनियर हैं। शुरू से ही भाकर की रूचि खेल-कूद में ज़्यादा थी और इसी वजह से बहुत कम उम्र में भाकर ने टेनिस, स्केटिंग और बॉक्सिंग जैसे खेलों का तजुर्बा ले लिया था। लेकिन निशानेबाज़ी को भाकर ने पेशे के तौर पर चुना और एक सफल निशानेबाज़ बनने की तैयारी में जुट गई। परिवार का किरदार बहुत अहम साबित हुआ जिस वजह से भाकर आज भारतीय शूटिंग में बड़ा नाम बन चुकीं हैं।

वहीं सौरव चौधरी उत्तर प्रदेश के मेरठ ज़िले के कलीना गांव से ताल्लुख़ रखते हैं। उनके पिता पेशे से एक किसान हैं। चाहते तो वह भी खेती-बाड़ी में अपने पिता का हाथ बटा सकते थे लेकिन उन्होंने अपने शौक को पेशे में तब्दील करना मुनासिब समझा। गांव में कोई शूटिंग रेंज नहीं होने की वजह से उन्हें लोकल बस से लंबी यात्रा तय करनी होती थी। उस समय वह सिर्फ 13 साल के थे। यह इस बात को बयां करता है कि छोटी सी उम्र में सौरव ने ज़िंदगी में कुछ कर-गुज़रने के सपने संजो लिए थे। और इन्हें सपनों को उड़ान देने के मकसद से वह दिन-रात मेहनत करने लगे।

फिलहाल सौरभ को निशानेबाज़ी करते हुए महज़ 4 साल ही हुए हैं और उन्होंने इस कम अरसे में काफी नाम कमा लिया है। ऐसा करने के लिए सौरभ ने कड़ी मशक्कत की है, चाहे वह अभ्यास के लिए घंटो का सफ़र हो या आर्थिक स्थिति से जूझते हुए खेल को सबसे ज़्यादा महत्व देना। कहते हैं ना कि इरादों में अगर जान हो तो सफलता दूर नहीं होती, ऐसी ही सफलता सौरभ को एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल के रूप में मिली।

कुछ समय पहले कोई नहीं कह सकता था कि यह दोनों (मनु भाकर और सौरभ चौधरी) खिलाड़ी एक साथ खेल कर देश का सम्मान बढ़ा सकते हैं, क्योंकि जहां एक तरफ भाकर का चुलबुला अंदाज़ है वहीं दूसरी तरफ सौरभ कम बोलते हैं। एक धरती तो एक आसमान, इतना फर्क होने के बावजूद भी दोनों ने एक टीम बन कर भारत को समय-समय पर खुशियां दी हैं।

लगातार तीन बार 

सौरभ अब तक सीनियर सर्किट में आ चुके थे। दूसरी तरफ जोश से लैस भाकर एशियन गेम्स में अपने नाम गोल्ड मेडल कर चुकीं थी। इतना ही नहीं ओम प्रकाश मिथरवाल के साथ मिक्स्ड टीम में खेलते हुए 2018 ग्वादलजारा विश्व कप में एक और गोल्ड मेडल भारत की झोली में डाल दिया। 

हालांकि मिथरवाल का नई दिल्ली में हुए आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में हिस्सा न लेने की वजह से भाकर और सौरभ को एक साथ खेलना पड़ा। पहली बार एक टीम में खेलते हुए इस जोड़ी ने सबको हैरान कर दिया और वर्ल्ड कप अपने नाम करते हुए गोल्ड मेडल जीत लिया। यह थी उनकी पहली एकत्रित जीत, जिसके बाद जीत का कारवां बढ़ता चला गया। भाकर और सौरभ की जोड़ी ने आईएसएसएफ फाइनल में 483.4 स्कोर करके यह खिताब हासिल किया।मुकाबले के बाद भाकर ने कहा कि, "मैं थोड़ी चिंतित हो गई थी और मुझे लग रहा था कि हमारा जीतना अब कठिन है, लेकिन सौरभ के शांत व्यवहार ने मुझे प्रोत्साहित किया जिसकी वजह से मेरा आत्मविश्वास बढ़ा और प्रदर्शन निखर कर आया।"

लगभग दो महीने बाद, यह जोड़ी बीजिंग वर्ल्ड कप में एक साथ दिखाई दी। खेल को पूरे तरीके से अपनी रगों में उतारते हुए इस जोड़ी ने बीजिंग वर्ल्ड कप में अपना दूसरा गोल्ड मेडल जीता। भाकर और सौरभ का मुकाबला चीन की जोड़ी जियांग रानक्सिन और पैंग वेई से हुआ। इस भारतीय जोड़ी के निशानों का जवाब किसी के पास न था और उन्होंने मुकाबला 16-6 से अपने नाम किया। इस जोड़ी को रोकना अब मुश्किल हो गया था और किसी भी प्रतिद्वंदी के पास इनके सटीक निशानों का कोई जवाब नहीं था। अब बारी थी म्युनिक में चल रहे वर्ल्ड कप की। इस युवा जोड़ी ने एक बार फिर दोबारा अपने साहस को अपना गहना बनाते हुए 10 मीटर एयर पिस्टल में गोल्ड मेडल जीता। यह इनकी वर्ल्ड कप में लगातार तीसरी जीत साबित हुई। यह वर्ल्ड कप भाकर के लिए और भी ख़ास रहा क्योंकि इस जीत से उन्हें ओलंपिक कोटा प्राप्त हुआ और वह अगले साल जापान में होने वाले ओलंपिक 2020 में अपना जौहर दिखाती हुई नज़र आ सकती हैं।

चुनौतियां अभी बाकी हैं

आगे का सफ़र और भी कठिन होने वाला है। इस जोड़ी का मुकाबला अब ब्राज़ील में होने वाले रियो वर्ल्ड कप में होगा। वैसे सौरभ व्यक्तिगत प्रदर्शन करते हुए रियो वर्ल्ड कप में ब्रॉन्ज़ मेडल जीत चुके हैं और अब उनकी कोशिश होगी कि टीम में खेलते हुए जीत की दहलीज़ पर कदम रखें और आत्मविश्वास के साथ नवम्बर में होने वाली एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में भी अच्छा प्रदर्शन करें। यह दोनों ही खिलाड़ी टोक्यो 2020 के लिए ओलंपिक कोटा प्राप्त कर चुकें हैं और अब इनका मकसद अपनी अच्छी फॉर्म को बरकरार रखने का होगा।

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