कशिश मलिक की है भारत में ताइक्वांडो का नेतृत्व करने की ख्वाहिश

ओलंपिक में जगह पक्की करने के लिए मलिक ने जॉर्डन के अम्मान में होने वाले एशियाई क्वालीफिकेशन टूर्नामेंट को बनाया अपना लक्ष्य  

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

नेतृत्व करने की ख्वाहिश ने कशिश मलिक का जीवन रातों-रात पूरी तरह से बदल दिया। वो IAS अधिकारी बनना चाहती थीं। हालांकि, IAS बनना यूं तो काफी मुश्किल है, लेकिन यह भारत में करियर की दृष्टि से सबसे सुरक्षित भी है। इसके बाद भी उन्होंने एक ताइक्वांडो एथलीट बनने के दिशा में कदम बढाया।

ताइक्वांडो देश में एक लोकप्रिय खेल बनने से बहुत दूर है। ऐसे में एक युवा खिलाड़ी के लिए इसमें करियर बनाने के लिए रोडमैप बनाना काफी मुश्किल होता है। मलिक ऐसी ही अपील का हिस्सा थी।

20 वर्षीय ने कहा, "मैंने इसे चुना क्योंकि ताइक्वांडो एक ओलंपिक खेल है। दूसरी बात यह है कि यह हमारे देश में ज्यादा ख्याति प्राप्त नहीं कर पाया है। मैं एक ऐसे खेल को नहीं चुनना चाहता था जिसमें पहले से ही भारत के किसी व्यक्ति ने बड़े पैमाने पर प्रभाव डाला हो। मैं दूसरी मैरीकॉम या साइना नेहवाल नहीं बनना चाहती थी। मैं अपने खेल में पहली खिलाड़ी बनना चाहता थी।"

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मलिक में हमेशा एक योद्धा की तरह टूट पड़ने की क्षमता थी। कहानी यह है कि जब वह 14 साल की थी, तब स्कूल में उससे बड़े लड़के ने कुछ अपमानजनक बात कह दी तो कशिश उससे भिड़ गईं।

आखिरकार, उनके PE शिक्षक और ताइक्वांडो कोच ने उनकी लड़ाई बंद कराई। इस दौरान वो कशिश के साहस से खासे प्रभावित हुए और उसे अपनी ताइक्वांडो अकादमी में दूसरे विद्यार्थियों के साथ खेलने के लिए आमंत्रित किया। PE शिक्षक ने भी उन्हें इस खेल के लिए प्रोत्साहित किया। ताइक्वोंडो एक आला मार्शल आर्ट है, जिसकी उत्पत्ति कोरिया में हुई और यह किक्स पर केंद्रित है।

उन्होंने कहा, "मुझे पता था कि यह खेल भारत में ज्यादा लोकप्रिय नहीं है, लेकिन किसी को तो इस खेल में क्रांति लाने की जरूरत हैः सानिया (मिर्जा) ने टेनिस के लिए किया, साइना ने बैडमिंटन के लिए किया या मैरी कॉम ने मुक्केबाजी के लिए किया। उन्होंने, मुझसे पूछा कि तुम इनमें से एक क्यों नहीं हो सकती?"

उन्होंने आगे कहा, "मैं घर पहुंची और इसके बारे में सोचा। मैंने रात भर में अपना रास्ता बदलते हुए फैसला किया और माता-पिता से कहा कि मैं ताइक्वांडो में अपना करियर बनाने जा रही हूं।"

उन्होंने कहा, "मैं भाग्यशाली हूं कि माता-पिता ने मेरे फैसले का समर्थन किया और मुझ पर विश्वास किया। वे यह भी जानते थे कि मुझे बहुत संघर्ष करना होगा, क्योंकि हमारे पास संघ नहीं हैं, सुविधाएं और वित्तीय सहायता भी नहीं है। ये काफी मुश्किल था, लेकिन मैं अपने जीवन में एक ऐसा काम करना चाहती थी जिस पर मुझे सदैव गर्व हो। अगर ताइक्वांडो ने मुझे एशियाई खेल या विश्व चैंपियनशिप या फिर ओलंपिक में अपने देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका दिया तो इसे चुनना मेरे लिये खुशी की बात होगी।"

मलिक वर्तमान में पीस ताइक्वांडो अकादमी में पूर्व विश्व चैंपियन सईद हसन रेज़े के निर्देशन में प्रशिक्षण ग्रहण कर रही हैं। जो युद्धग्रस्त अफगानिस्तान से भारत आ गये और यहीं पर बस गये।

वह मानती हैं कि कोचिंग में भी खेल के प्रति देश की उदासीनता छोटे पैमाने पर ही नजर आती है। जैसे कि अकादमी में सभी प्रशिक्षणार्थियों को एक जोड़ी चेस्ट और हेड गार्ड से काम चलाना पड़ता है।ैसे

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मलिक ने कहा, "गार्ड खेल का महत्वपूर्ण भाग है जो इसे पूरी तरह से निष्पक्ष बनाता है। चेस्ट और हेड गार्ड में सेंसर होते हैं और जब तक आप उन्हें एक निर्धारित ताकत के साथ नहीं मारते तब तक आपको अंक नहीं मिलते हैं। इसलिए यह पूरी तरह से स्कोरिंग पर आधारित है, क्योंकि इसके बिना रेफरी, ताइक्वोंडो में अंक नहीं देते हैं।"

उन्होंने कहा, "गार्ड का वजन करीब 1.5 किलो होता है। मैंने इनके साथ कभी प्रशिक्षण नहीं लिया था। जब मैं अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए गया था तब इनका इस्तेमाल करने में मुझे थोड़ा असहज लगा, लेकिन अब कई सालों से मुझे इसकी आदत हो गई है।"

उन्होंने आगे कहा, "ये गार्ड बहुत महंगे हैं और प्रत्येक की लागत करीब 4 लाख रूपये है। भले ही प्रशिक्षण के दौरान यह हमारे पास नहीं हैं, लेकिन मुकाबले के समय हमें इस बात पर ध्यान देना होगा कि सेंसर को कितनी ताकत से मारने की आवश्यकता है। क्योंकि यह सेंसर में दर्ज होता है जिससे हमें एक अंक मिलता है।"

मलिक ने कहा, "मैं मुकाबले के दौरान इनके बारे में नहीं सोचती। क्योंकि अगर मैं इस पर ध्यान केंद्रित करती हूं कि मेरे प्रतिद्वंद्वी के पास बेहतरीन सुविधाएं हैं और वह मुझसे बेहतर तैयार होगा, तो मैं मैट पर उतरने से पहले ही मैच हार जाऊंगी।"

UAE में 2018 फुजैरा ओपन में अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में मलिक ने रजत पदक पर कब्जा जमाया। 2019 में काठमांडू, नेपाल में दक्षिण एशियाई खेलों में मलिक ने 57 और अंडर श्रेणी में स्वर्ण पदक जीता। दिल्ली निवासी मलिक वर्तमान में अपने भार वर्ग में दुनिया में 67वें स्थान पर हैं और टोक्यो ओलंपिक में स्थान पक्का करने की उम्मीद कर रही हैं।

कशिश ने मार्च में ताइक्वांडो में मेगा इवेंट के लिए क्वालिफाई करने वाली पहली भारतीय बनने के लिए जॉर्डन के अम्मान, में होने वाले एशियाई क्वालीफिकेशन टूर्नामेंट को लक्ष्य बनाया है। मलिक का मानना ​​है कि उसके पास ओलंपिक में स्थान पक्का करने के लिए एक मुकाबले का मौका है।