टोक्यो 2020 की मैराथन में सफलता हासिल करना सुधा सिंह का दृढ लक्ष्य

प्रशिक्षण में व्यस्त लंबी दूरी की धाविका को परिवार से मिले हो गया एक साल से ज्यादा

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

टोक्यो 2020 के आयोजन का समय अब तेजी से नजदीक आता जा रहा है। तो वहीं अनुभवी भारतीय 3000 मीटर स्टीपलचेज की महारथी सुधा सिंह ओलंपिक पदक पर नजर गड़ाए हुए है, जो उनके करियर का तीसरा ओलंपिक गेम होगा।

34 वर्षीय सुधा ने अपने विशेष इवेंट स्टीपलचेज की बजाय मैराथन को लक्ष्य के लिए चुना है। 26 जनवरी 2021 को भारत के 72वें गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान पद्मश्री से सम्मानित होने वाली सिंह ने 42.195 किलोमीटर लंबी दौड़ पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

उसका ध्यान इतना दृढ़ है कि वह एक साल में अपने गृहनगर (रायबरेली, उत्तर प्रदेश) परिवार से मिलने नहीं गई। पूर्व 3000 मीटर स्टीपलचेज रिकॉर्ड धारक ने खुलासा किया कि वह आखिरी बार दिसंबर, 2019 में घर गई थी।

उसने राष्ट्रीय खेल संस्थान, पटियाला में राष्ट्रीय शिविर में प्रशिक्षण लेने का विकल्प चुना है। वह इस समय बेंगलुरु में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के हॉस्टल में रह रही हैं।

उन्होंने IANS को बताया, "लॉकडाउन पिछले साल मार्च के आसपास शुरू हो गया था। आखिरी बार में बहुत पहले दिसंबर, 2019 में घर गई थी, लेकिन इसके बावजूद मैं अपने परिवार वालों से रोजाना बात करती हूं।"

इसके साथ ही उसने खुलासा किया कि उसका परिवार पटियाला में उससे मिलने आता था, लेकिन कोरोना के कारण लागू लॉकडाउन के बाद यह भी बंद हो गया।

सुधा ने 2010 के एशियाई खेलों और 2017 एशियाई चैंपियनशिप की स्टीपलचेज़ में स्वर्ण पदक जीता, लेकिन अब उसने स्टीपलचेज़ से पहले मैराथन को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। सुधा का पहला लक्ष्य 21 फरवरी को नई दिल्ली में होने वाली मैराथन है।

उन्होंने कहा, "यह मेरा तीसरा ओलंपिक होगा। मैं फिट हूं और मुझे क्वालीफाई करने के लिए प्रतियोगिताओं की जरूरत है। मेरा अंतिम उद्देश्य ओलंपिक में पदक जीतना है। मैराथन में मैं राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ते हुए ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करना चाहती हूं। इसके बाद स्टीपलचेज़ के बारे में सोचा जायेगा।"

मैराथन में मौजूदा महिलाओं का राष्ट्रीय रिकॉर्ड ओपी जैशा के नाम है। उन्होंने बीजिंग में हुई 2015 विश्व चैंपियनशिप में 2:34:43 के समय के साथ यह रिकॉर्ड कायम किया। मैराथन में सुधा का सर्वश्रेष्ठ समय 2:34:56 है जबकि ओलंपिक का कट-ऑफ 2:29:30 है।

टोक्यो में कोटा हासिल करने लिए सुधा बेंगलुरु में कड़ी मेहनत कर रही हैं। मंगलवार को मिले पद्म श्री पुरस्कार ने उनका मनोबल और बढ़ा दिया है।

सुधा ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा, "जब मुझे पुरस्कार मिलने की खबर मिली तो मैं हॉस्टल में अन्य एथलीटों के साथ बैठी थी। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे यह पुरस्कार मिलेगा।"