वर्ल्ड टूर फाइनल से अपनी फॉर्म तलाशना चाहेंगी पीवी सिंधु

बड़ी प्रतियोगिताओं को जीतने का तजुर्बा कर सकता है बीडब्लूएफ में सिंधु की राह आसान।

लेखक जतिन ऋषि राज ·

पिछले कुछ समय से भारतीय स्टार शटलर पीवी सिंधु अपनी फॉर्म से जूझ रहीं हैं और इस वजह से उन्हें काफी प्रतियोगिताओं से जल्द ही बाहर का रास्ता देखना पड़ा।उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन साल 2019 में फ्रेंच ओपन के दौरान आया जहां उन्होंने क्वार्टरफाइनल तक का सफ़र तय किया।

जहां मीडिया में सिंधु की फॉर्म पर सवाल खड़े हो रहे हैं वहीं भारतीय कोच और पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी पुलेला गोपीचंद ने उनके व्यस्त कार्यक्रम को दोषी माना। यह तो सच है कि पिछले कुछ समय में भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी ने बहुत सी प्रतियोगिताओं में भाग लिया है जिससे वह व्यस्त रहने लगीं जिस वजह से उनकी मौजूदा फॉर्म एक परेशानी का सबब बन चुकी है।

गोपीचंद ने एक भारतीय पब्लिकेशन को दिए इंटरव्यू में बताया कि “मैं मानता हूं कि पिछले कुछ मुकाबलों में सिंधु का प्रदर्शन शानदार नहीं रहा लेकिन मुझे यकीन है कि वह ज़ोरदार वापसी करेंगी।मेरे ख्याल में वर्ल्ड चैंपियन के बाद उनका शेड्यूल काफी व्यस्त रहा। चीन, कोरिया के खिलाफ खेलने के बाद उन्हें डेनमार्क और फ्रांस जाना पड़ा और उसके बाद दोबारा उन्हें चीन और हांग कांग में अगुवाई करनी पड़ी। पिछले दो महीने वाकई में उनके लिए बेहद व्यस्त और कठिन रहें हैं।”

व्यस्त रहा है सीज़न

वर्ल्ड चैंपियनशिप के बाद से सिंधु ने 6 प्रतियोगिताओं में भाग लिया है और जिसमें सितंबर का आधा महीना उनके लिए कम व्यस्त साबित हुआ। हालांकि वही एक समय था जहां इस भारतीय शटलर को आराम का मौका मिला और उसके बाद एशिया, यूरोप और फिर दोबारा एशिया में मुकाबलों की वजह से उन्हें लगातार सफ़र करना पड़ा।

इस 24 वर्षीय खिलाड़ी को 11 में से 6 बार तीन गेम के मुकाबले खेलने पड़े और वह अपने आप में ही बहुत थकान भरा होता है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि कोर्ट में ज़्यादा देर के मुकाबले, लगातार प्रतियोगिताओं में भाग लेना ही बना सिंधु की फॉर्म का दुश्मन बना।

बीडब्लूएफ वर्ल्ड टूर फाइनल की बात करें तो सिंधु का कार्यक्रम बाकी खिलाड़ियों से ज़्यादा सख्त था। अव्वल दर्जे की ताई त्ज़ु यिंग ने हांग कांग ओपन और चीनी शटलर चेन युफेई ने फ्रेन्च ओपन को छोड़ना ठीक समझा ताकि वह अपनी फिटनेस और मानसिक क्षमता को बढ़ा सकें। सीज़न 2018-19 के बाद भी सिंधु के पास अपने शरीर को आराम देने का ज़्यादा समय नहीं था और साथ ही प्रीमियर बैडमिंटन लीग में भी वह अपने कौशल को परखते हुए दिखीं। लगभग एक महीने चलने वाली प्रतियोगिता (पीबीएल) में सिंधु की टीम हैदराबाद हन्टर्स ने सेमीफाइनल तक का सफ़र तय किया। खेल के अलावा भी यह खिलाड़ी व्यावसायिक प्रतिबद्धताएँ पूरी करती हुई दिखीं। एक खिलाड़ी के लिए जितना ज़रूरी कोर्ट पर प्रदर्शन करना होता है उतना ही कोर्ट या फील्ड के बाहर की ज़िन्दगी को संतुलन में लाना भी बहुत आवश्यक होता है।

इन सभी के बीच सिंधु की कोच किम जी ह्युन ने भी अपने पद से इस्तीफ़ा दिया। यह घटना भी इस भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी के लिए अच्छी साबित नहीं हुई और इस वजह से भी उनके फॉर्म पर असर पड़ा।

क्या सिंधु करेंगी ज़बरदस्त वापसी?

खराब फॉर्म से जूझती सिंधु बीडब्लूएफ वर्ल्ड टूर फाइनल में दमख़म दिखाते हुए साल 2019 का अंत अच्छे अंदाज़ में करना चाहेंगी। इस प्रतियोगिता में सिंधु का सामना कुछ ऐसे खिलाड़ियों के साथ हो सकता है जिनके खिलाफ खेलना वह पसंद करती हैं।

अगर पिछली कुछ प्रतियोगिताओं की बात की जाए तो सिंधु को कुछ नए खिलाड़ियों के सामने हार का सामना करना पड़ा था। साउथ कोरिया के एन से-यंग और थाईलैंड की पोर्नपावी चोचुवोंग दोनों ही बैडमिंटन की दुनिया में नए हैं और यह दोनों ही सिंधु को हारने में सफल रहे। हालांकि सिंधु का सामना इन खिलाड़ियों से ज़्यादा नहीं हुआ है तो इसे भी उनकी हार का एक कारण माना जा सकता है लेकिन वर्ल्ड टूर फाइनल में जब सिंधु कोर्ट पर उतरेंगी तो वह अपने प्रतिद्वंदियों की कमियों और ताकतों से वाकिफ होंगी अकाने यामागुची और ताई त्ज़ु यिंग बेहतरीन खिलाड़ियों के सामने सिंधु को कड़ा प्रदर्शन करना होगा ताकि वह साल 2019 को जीत के साथ ख़त्म करें और साल 2020 जो कि ओलंपिक गेम्स का साल है उसमें आत्मविश्वास के साथ अपने क़दम रखें। सिंधु अपने प्रतिद्वंदियों के खेल को जानती हैं और इस वजह से उनके खिलाफ रणनीति बनाने में ज़्यादा मुश्किलात नहीं आनी चाहिए। फिर चाहे त्ज़ु यिंग के ड्रॉप शॉट हों या यामागुची के स्मैश, सिंधु उनके खेल से अच्छी तरह वाकिफ हैं।

पीवी सिंधु ने बीडब्लूएफ वर्ल्ड टूर फाइनल किया अपने नाम

बड़ी प्रतियोगिता का दबाव

वर्ल्ड चैंपियनशिप के हवाले से बात की जाए तो सिंधु का प्रदर्शन सराहनीय रहा और उन्होंने कई मेडल भी अपने नाम किए। गोपीचंद ने ओलंपिक चैनल से आगे बात करते हुए कहा था कि “अगर आप सिंधु के ओलंपिक, एशियन और कॉमनवेल्थ गेम्स के मेडल को गिनने जाए तो वह उनके कारगर होने का सबूत पेश करते हैं और बताते हैं कि भारत के लिए वह एक स्टार खिलाड़ी रहीं हैं।”

खराब फॉर्म के बावजूद भी सिंधु ने इसी साल बीडब्लूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप को अपने नाम करते हुए गोल्ड मेडल जीता। साल 2018 में भी बीडब्लूएफ वर्ल्ड टूर फाइनल से पहले वह अपने फॉर्म को ढूँढ रहीं थी लेकिन अंततः उन्होंने न सिर्फ अच्छा प्रदर्शन किया बल्कि सबसे बेहतरीन रहकर ख़िताब भी जीता। यक़ीनन यह उनकी क्षमता का प्रमाण है और असल खिलाड़ी भी वही है जो गिर कर उठे और फिर जीत के पथ पर चलते हुए अपनी राह आसान करे।

वर्ल्ड चैंपियनशिप 2018 में सिल्वर मेडल जीतने के बाद व्यक्तिगत रूप से सिंधु के रैकेट से विक्टर चाइना ओपन और फ्रेंच ओपन में सबसे अच्छा प्रदर्शन निकला जहां वह महज़ क्वार्टरफाइनल तक का ही सफ़र तय कर पाईं थीं। डेनमार्क ओपन में उनको पहले ही राउंड में शिकस्त का सामना कर बाहर होना पड़ा।हालांकि साल 2018 में वर्ल्ड टूर फाइनल में 5 में से 3 मुकाबले जीत कर इस खिलाड़ी ने एक बार फिर अपने हुनर का प्रमाण दिया।

वर्ल्ड टूर फाइनल 2019 में क़दम रखने से पहले पीवी सिंधु को अपने हालिया साधारण प्रदर्शन को भूलते हुए आगे की रणनीति पर काम करना होगा ताकि कोर्ट में सभी को एक बार फिर से वही पीवी सिंधु दिखे जो अपनी जीत की भूख के लिए जानी जाती है।